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यह वीडियो 02.02.2026 को आयोजित वेदांत संहिता सत्र – गुवाहाटी से लिया गया है।
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00:00एक लड़की थी जो इरानी क्रांते हुई थी तो उस समय पर एक लड़की ने टैंक के आगे आकर के
00:08इरान में अपनी जान दी थी तो अनुमान लगा जाता है कि शायद उसके लिए लिखी भूमिल लोग चकित थे
00:14ये देखकर कि एक नंगा गुलाब किस तरह लोहे के पहाड क
00:17अपनी मुठी में भीच रहा था लोहे का पहाड क्या टैंक नंगा गुलाब क्या वो लड़की थी ठीक इस तरह
00:25होता है जवानी जब फैसले लेती है गुस्सा जब भी सही जुनून से उभरता है हम साहस के एक नए
00:32तेवर से परिचित होते हैं तब हमें आग के लिए दूस
00:35अखरा नाम नहीं खोजना पड़ता है मुम्किन था कि अपने देशवासियों की गरीबी से साले तीन हाथ अलग हटकर एक
00:42लड़की अपने प्रेमी का सिर्चाती पर रखकर सो रहती देह के अंधेरे में अपनी समझ और अपने सपनों के बीच
00:48मैं उसे कुछ भी न कहता सिर
01:04हुआ टुकडा जोड़ देता और हवा में टांग देता उसके लिए एक असंसदी शब्द नीच जो सच्चाई को पीठ दिखा
01:14करके क्या करते हैं पीछे अड़ जाते हैं सो रहते देह के अंधेरे में उनके लिए वक्त बस एक ही
01:20शब्द रखता है नीच मुम्किन यह भी �
01:23था कि थोड़ी सी महंदी और एक अदद ओढ़नी का लोब लाल तिकोने के खिलाफ बोलता जिहाद लाल तिकोना किसका
01:30होता है कि ज्यादा बच्चे मत प्यादा करो उसके लिए एक लाल त्रिकोर्ड बनाते थे और अपने वैनिटी बैग में
01:35छोड़कर बच्चों की एक ल
01:52प्यारी भावियों ओ नठकट बहनों सिंगारदान को छुट्टी दे दो आईने से कहो कुछ देर अपना अकेला पन घूरता रहे
02:00कंगी को जड़े हुए बालों की याद में गुनगुनाने दो रिबन को फेक दो अलगनी पर ये चोटी करने का
02:09वक्त नहीं और ना बाजार क
02:10बालों को एट कर जुडा बांध लो और सब की सब मेरे पास आओ देखो मैं एक नई और ताजा
02:18खबर के साथ घर की दहलीज पर खड़ाओं जैसा मैंने पहले कहा है 20 सेबों की मिठास से भरा यौवन
02:25जब भी फटता है तो न सिर्फ टैंक तूटता है बलकि खून के छीटे
02:30जहां जहां पड़ते हैं बंजर धर्ती पर आजादी के कल्ले फूटते हैं और ओ प्यारी लड़की कल तु जहां आतिश
02:39के अनार की तरह फूटकर बिखर गई है ठीक वहीं से हम आजादी की वर्षगांट का जशन शुरू करते हैं
02:51ताली तो बजाली आप बताइए आपको कब समर्पित होगी यह कविता
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