00:00हम आइटी में थे वहीं पगल में जियासर रायं यह चला था कže कहा गया था कि गणेश जी की
00:05मूर्तियां दूध पी रही है
00:07तो वहीं आइटी से सटी हुई है जियासर रायं
00:11तो वहां भी एक छोटा सी गणेश मंदिर था लोग जाया करते थे
00:15तो वहां भी सुबह सुबह शोर मचा गी यह सब चल रहा है तो हम लोग भी देखने गए और
00:20वहां देख रहे हैं और यह देखा ही दे रहा है कि क्या हो रहा है तो हम जितने भी
00:24स्कूर्ण से देखने गए थे सब ने एक दूसरे की और देखा और बोले केपिलरी मुशन
00:30क्या
00:31कैपिलरी मोशन
00:33पांस साथ मिनट देखा
00:35वापस आ गए
00:36लोग आ रहे थे और ऐसे वहाँ पर
00:37दूध दिखा रहे थे
00:39और वो जो दूध था
00:41वो उसका जो स्तर था वो थोड़ा सा कम हो जा रहा था
00:43वो तो एक मिनट ही देखा जो कि
00:45उसको देखते ही समझ गई यह क्या हो रहा है
00:48बाकी पांच दस मिनट बस लोगों की शकलें देखी
00:51लोगों के हाव भाव
00:52लोगों के तरीके लोगों की धारणाएं
00:54लोगों का अंधविश्वास वापस आ गए
00:57कोई जरूरी थोड़ी है कि
01:11जंदगी में उचाहियां नहीं चाहिए गया
01:13जूट से संतुष्ट हो तुम
01:14सच जैसी कोई चीज होती है
01:17उसके लिए तरडपते हैं नहीं तुम
01:19प्रेम
01:21नहीं जानते तुम
01:22इश्क के बिना ही जवान हो गए
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