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  • 4 days ago
✨️ आचार्य प्रशांत का एक और प्रेम-उपहार — मंच पर जीवित हुआ बोध ✨️

आचार्य जी अक्सर नाटकों और फ़िल्मों के उदाहरणों के माध्यम से गहन दर्शन को सहज, सुलभ और भीतर तक उतर जाने वाला बना देते हैं।

इस महाशिवरात्रि जो उनका जन्मदिन भी था उन्होंने इस प्रयास को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया।

हज़ारों गीता मिशन विद्यार्थियों के सामने, आचार्य प्रशांत ने एक प्रभावशाली सोलो ऐक्ट प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने मानव जीवन के आंतरिक संघर्ष को मंच पर जीवंत कर दिया।

हम पढ़ते हैं।
हम अध्ययन करते हैं।
हम मनन करते हैं।
फिर भी विवेक हमसे छूट सकता है।

लेकिन जब हमारा अपना आंतरिक संघर्ष हमारी आँखों के सामने मंचित होता है, तो उसे अनदेखा करना असंभव हो जाता है।

हम देखने को विवश हो जाते हैं।
हम सीखने को विवश हो जाते हैं।

यह आपके लिए एक अनोखा अवसर है, स्पष्टता के और करीब आने का।

🎭 YouTube Premiere — आचार्य प्रशांत का नाटक
🗓️ Sunday, February 22, 2026

आइए, बोध को एक नए रूप में जानें।

Category

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Learning
Transcript
00:08कि या था सबसे बड़ा हैलाइट कलका जो प्ले था वो सबसे बैस्ट था
00:16अज्यास में ऐसा कभी निःवा जैसे हमारे रिशिमिन ने कभी ऐसा कोई डॉल प्ले नहीं किया कि वहाई लोगों को
00:22समझ सके
00:24वो सबसे बैस्ट था बिल्कुल दिल को चूगया था
00:27मज बताओ मुझे जीवन दुख हैं, मज बताओ मुझे आरे सत्य, मज बताओ मुझे लोग पर लोग सत्य
00:34अप्ल का प्ले तो अनेख्च एप्सेक्टेड था, हमने कभी नहीं सुचा था कि अचार जी अच्छी अच्छी आख्टिग ने वाले
00:39हैं, अट आल
00:39This play was basically a summarization of everything we need to learn in just a duration of an hour or
00:46so.
00:51So it sounds like the play was entertaining but it had a deeper message in the sense that it was
00:56a reflection on who we really are and how we live our lives.
01:09अजय के लिए आवर अड़ी नहीं है।
01:13सर ने जिस तरीके से समझाया ना वो हम खुद तो नहीं समझ पाते कब बीबी सर ने बिल्कुल हमारा
01:17आई ना दिखा दिया कि तुम ऐसे हो और इन दो चीदों के बीच में फसे होई हूँ।
01:20क्या दिता कल की विंट हूँ।
01:22अजय के बाना।
01:23अजय के बाना।
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