00:04जोतिश शास्त्र के मुताबिक होलाश्रक के आठ दिनों में सोरिम वंडल के आठ प्रमुक ग्रह उग्र अवस्था में रहते हैं
00:10अश्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य दशमी को शनी, एकादशी को बुध, द्वादशी को गुरू ब्रिहस्पती, त्रेवदशी को शुक्र, चतुरदशी
00:18को मंगल और पूरिमा को राहु का प्रभाव नकारात्मक दिशा में होता है
00:22ग्रहों की इस उगरता के कारण व्यक्ति की निरना लेने की श्रमता और मानसे को शांती प्रभावत हो सकती है,
00:28जब ग्रह अनुकूल इस्तिती में नहीं होते, तो उस समय शुरू किये गए विवा, मुंडन या ग्रह प्रवेश जैसे शुबकार्यों
00:34में अरजने आने का ख
00:52धार्मिक मानिता अनुसार हुलाष्टक को अशुब मानने के पीछे भक्त प्रहलाद की कथा प्रमुख है, असुर राजा हिरने कश्यप ने
01:00पालगुन शुकल अश्टमी से लेकर पूनिमा तक अपने ही पुत्र प्रहलाद को भगवान वश्नु की भक्ती छोड़ने के लि
01:22यही कारण है कि हुलाष्टक के दौरान किसी भी उत्सव या खोशे के मांगले कारे को करना शास्त्रों में वर्जित
01:28मानते हैं
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