00:00आचास्री विद्या सागर महराज के दर्समों के बाद उनके मन में बैरागी के भाव आई थे। आचास्री से अलालालग समय
00:08पर कुछ बरसों पूर ने लोगों ने ग्रम्चरवत लेकर तब किमार और बैरागी किमार पर जाने के लिए उन्होंने आशिवा
00:17लिया था पहले आ
00:29लिए आचास्री समय सागर मराज ने वेतुन जिले में जैन सिद्ध छेत्र है मुक्तागरी वहां पर दी है कुल 22
00:39दीख्षाएं वहां पर दी गई है कल का माहूल इतना जोड़ार था कि 20-25 जार लोग वहां पर पहुंचे
00:46जहां बहुत कम विवस्ताने थी लेकर आचास्री
00:58करते लिए इतनी विडिवार आओंपस्त पुई है जी जो यह वक्त सिंव मैं यह दिखुनी है तो यह नोक्री कर
01:06रहे थे चार्चरय काउंटेंट थे और एक व्यापारी थी सागर द्यले के निवासी थे इस सुर्खी थे और बाकि सागर
01:19नगर के तिकिस्व लोगों का हम �
01:22foreign
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