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Ramzan Special: Rozedars के लिए बड़ी चेतावनी! इन 2 नियमों को नहीं माना तो टूट जाएगा सब्र। जानिए रमजान के पाक महीने में वो कौन सी गलतियां हैं जो आपकी इबादत और रोज़े को खंडित कर सकती हैं।
रमजान (Ramadan) का महीना इस्लाम में आत्मशुद्धि और संयम का प्रतीक माना जाता है। लेकिन अक्सर लोग जानकारी के अभाव में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उनका रोज़ा (Roza) सिर्फ भूख और प्यास बनकर रह जाता है। Oneindia Hindi के इस खास वीडियो में जानें कि रोज़ा रखने का सही नज़रिया क्या है।
इस वीडियो में बताया गया है कि रमजान सिर्फ खान-पान से दूरी बनाने का नाम नहीं है, बल्कि यह अनुशासन और धैर्य (Patience) सिखाता है। नमाज़ (Namaz) की पाबंदी, तरावीह (Taraweeh) की रौनक और अच्छे अख़लाक़ (Good Behavior) इस महीने की रूह हैं। इस्लाम के जानकारों के मुताबिक, झगड़े, चुगली (Gossip) और नकारात्मक सोच से रोज़े की रूहानी ताकत कम हो जाती है।
जानिए रमजान के दौरान किन दो बड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है और कैसे आप अपनी इबादत को अल्लाह की नज़र में और बेहतर बना सकते हैं। पूरी जानकारी के लिए वीडियो अंत तक देखें।

This video provides essential guidelines for Ramadan (Ramzan), focusing on the spiritual rules of fasting (Roza). It explains common mistakes people make and emphasizes the importance of self-discipline, prayer (Namaz/Taraweeh), and avoiding negative behaviors like gossiping or fighting during this holy month.

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~PR.514~ED.276~GR.508~HT.96~

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Transcript
00:00सहरी से इफ्तार तक का सफर, रोजा सिर्फ भूक नहीं अनुशासन है।
00:06रोजा कैसे रखें कि सेहत भी साथ दें और इबादत भी मुकमल रहे।
00:11रमजान कभी चुपचाप नहीं आता।
00:14इसके आने से पहले ही फिजा में एक खास ठहराव उतरने लगता है।
00:19दिन धीमे हो जाते हैं, रातें जागती हैं और जिन्दगी का पूरा तालमेल बदल जाता है।
00:25इस साल रमजान दोहजार चब्श की शुरुवात 19 फरवरी से हो चुकी है।
00:30रोजा महज खाने पीने से रुकने का नाम नहीं, बलकि ये नींद, उर्जा, मनोदशा और व्यवहार सब का संतुलन साधने
00:39की ट्रेनिंग है।
00:40इसलिए सहरी से इफतार तक की दिनचर्या को समझना उतना ही जरूरी है जितना रोजा रखना।
00:46रोजा रखने का सही नजरिया। रमजान आत्मशुधी का महीना है। रोजा सच्चे मन से रखा जाए तो ये अनुशासन सिखाता
00:55है। धैर्य, सैयम और बहतर इंसान बनने की आदत। नमाज की पाबंदी, तरावीह की रौनक और अच्छे अखलाक यानि व्यवहार
01:04इस मह
01:16सहरी रोजे का शांत लेकिन सबसे एहम पड़ाव है। फजर से पहले का ये भूजन शरीर को लंबे उपवास के
01:24लिए तयार करता है। सहरी छोड़ना आसान लगता है पर यही गलती दिन भर कमजोरी, सिरदर्द और चिरचिड़ेपन की वजह
01:33बनती है।
01:46पानी परियाप्त पिएं और नमक चीनी संतुलित रखें ताकि प्यास कम लगे। दिन का सैयम क्या करें क्या नहीं। रोजे
01:55के दौरान बहुत ज्यादा निश्क्रिया रहना या पूरा दिन सोते रहना सही नहीं। हलकी गतिविधी रखें। काम को छोटे हिस्सों
02:03में बां
02:15इफ्तार नर्मी से रोजा खोलें। इफ्तार रोजे का भावनात्मक और शारीरिक केंद्र है। सूरज ढलते ही रोजा खोलने की खुशी
02:25के साथ सायम भी जरूरी है।
02:27परंपरा के अनुसार खजूर और पानी से शुरुआत करें। ये शुगर लेवल को धीरे धीरे सामानने करता है। उसके बाद
02:34हलका सूप या फल लें। फिर मुख्य भोजन। बहुत तेजी से या बहुत ज्यादा खाना अपच, सुस्ती और आसिडिटी बढ़ाता
02:42है। �
02:57दही जैसे पानी से भरपूर विकल्प शामिल करें। फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है और रात भर उर्जा बनाए रखता
03:04है। इफ्तार का सामाजिक पहलू। इफ्तार सिर्फ भोजन नहीं, ये मिल बैठने का समय है। परिवार साथ आता है, मस्जिदों
03:13में साम�
03:13इफ्तार होता है, बातचीत लोटती है, यही वो पल है जब दिन भर की खामोशी के बाद रिष्टों में गर्मा
03:20हटाती है। सैयमित इफ्तार रात की इबादत, तरावीह और अगली दिन की सहरी को आसान बनाता है। रमजान में रोजा
03:28एक ले सिखाता है, कम में संतोश, सम
03:42और संतुलन सिखाता है। सहरी की शानती से इफ्तार की रौनक तक रोजा शरीर नहीं तोड़ता, बलकि सवारता है। सही
03:51आदते अपनाई जाएं तो ये महीना सेहत, सब्र और इंसानियत तीनों को मजबूत बनाता है। इस खबर में इतना ही
03:58देश-दुनिया की बाकी खब
04:12कर दोड़ता है।
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