00:00सहरी से इफ्तार तक का सफर, रोजा सिर्फ भूक नहीं अनुशासन है।
00:06रोजा कैसे रखें कि सेहत भी साथ दें और इबादत भी मुकमल रहे।
00:11रमजान कभी चुपचाप नहीं आता।
00:14इसके आने से पहले ही फिजा में एक खास ठहराव उतरने लगता है।
00:19दिन धीमे हो जाते हैं, रातें जागती हैं और जिन्दगी का पूरा तालमेल बदल जाता है।
00:25इस साल रमजान दोहजार चब्श की शुरुवात 19 फरवरी से हो चुकी है।
00:30रोजा महज खाने पीने से रुकने का नाम नहीं, बलकि ये नींद, उर्जा, मनोदशा और व्यवहार सब का संतुलन साधने
00:39की ट्रेनिंग है।
00:40इसलिए सहरी से इफतार तक की दिनचर्या को समझना उतना ही जरूरी है जितना रोजा रखना।
00:46रोजा रखने का सही नजरिया। रमजान आत्मशुधी का महीना है। रोजा सच्चे मन से रखा जाए तो ये अनुशासन सिखाता
00:55है। धैर्य, सैयम और बहतर इंसान बनने की आदत। नमाज की पाबंदी, तरावीह की रौनक और अच्छे अखलाक यानि व्यवहार
01:04इस मह
01:16सहरी रोजे का शांत लेकिन सबसे एहम पड़ाव है। फजर से पहले का ये भूजन शरीर को लंबे उपवास के
01:24लिए तयार करता है। सहरी छोड़ना आसान लगता है पर यही गलती दिन भर कमजोरी, सिरदर्द और चिरचिड़ेपन की वजह
01:33बनती है।
01:46पानी परियाप्त पिएं और नमक चीनी संतुलित रखें ताकि प्यास कम लगे। दिन का सैयम क्या करें क्या नहीं। रोजे
01:55के दौरान बहुत ज्यादा निश्क्रिया रहना या पूरा दिन सोते रहना सही नहीं। हलकी गतिविधी रखें। काम को छोटे हिस्सों
02:03में बां
02:15इफ्तार नर्मी से रोजा खोलें। इफ्तार रोजे का भावनात्मक और शारीरिक केंद्र है। सूरज ढलते ही रोजा खोलने की खुशी
02:25के साथ सायम भी जरूरी है।
02:27परंपरा के अनुसार खजूर और पानी से शुरुआत करें। ये शुगर लेवल को धीरे धीरे सामानने करता है। उसके बाद
02:34हलका सूप या फल लें। फिर मुख्य भोजन। बहुत तेजी से या बहुत ज्यादा खाना अपच, सुस्ती और आसिडिटी बढ़ाता
02:42है। �
02:57दही जैसे पानी से भरपूर विकल्प शामिल करें। फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है और रात भर उर्जा बनाए रखता
03:04है। इफ्तार का सामाजिक पहलू। इफ्तार सिर्फ भोजन नहीं, ये मिल बैठने का समय है। परिवार साथ आता है, मस्जिदों
03:13में साम�
03:13इफ्तार होता है, बातचीत लोटती है, यही वो पल है जब दिन भर की खामोशी के बाद रिष्टों में गर्मा
03:20हटाती है। सैयमित इफ्तार रात की इबादत, तरावीह और अगली दिन की सहरी को आसान बनाता है। रमजान में रोजा
03:28एक ले सिखाता है, कम में संतोश, सम
03:42और संतुलन सिखाता है। सहरी की शानती से इफ्तार की रौनक तक रोजा शरीर नहीं तोड़ता, बलकि सवारता है। सही
03:51आदते अपनाई जाएं तो ये महीना सेहत, सब्र और इंसानियत तीनों को मजबूत बनाता है। इस खबर में इतना ही
03:58देश-दुनिया की बाकी खब
04:12कर दोड़ता है।
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