00:00मुर्ली का सार
00:02बर्थडे पर फास्ट सो फर्स डिविजन में आने की गिफ्ट लेने के लिए हर श्वास संकल्प समर्थ हो, दिल बड़ी
00:11और सच्ची हो, तो हर जरुरत पूरी होगी.
00:15वर्दान
00:16महमान पन की वृत्ती द्वारा, प्रवृत्ती को स्रेष्ट, स्टेज को उचा बनाने वाले सदा उप्राम भव.
00:26जो स्वयम को महमान समझ कर चलते हैं, वे अपने देह रूपी मकान से भी निर्मोही हो जाते हैं.
00:35महमान का अपना कुछ नहीं होता.
00:38कारे में सब वस्तुएं लगाएंगे, लेकिन अपने पन का भाव नहीं होगा.
00:44वे सब साधनों को अपनाते हुए भी, जितना न्यारे, उतना बाप के प्यारे रहते हैं.
00:51देह, देह के संबंध और वैभवों से सहज उप्राम हो जाते हैं.
00:58जितना महमानपन की वृत्ती रहती, उतनी प्रवृत्ती स्रेष्ट और स्टेज उँची रहती है.
01:07स्लोगन
01:08अपने स्वभाव को निर्मल बना दो, तो हर कदम में सफलता समाई हुई है.
01:43अव्यक्त इशारे
01:45छोटे हो या बड़े हो, बीमार हो या स्वस्थ हो, महरती हो या घोडे सवार, सभी एक मत होकर सहयोगी
01:55बनो, तो सहज सभलता मूर्त बन जाएंगे.
01:59ओम शान्ती
02:01अव्यक्त
02:02अव्यक्त
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