00:00मीठे बच्चे, तुम्हारी याद की यात्रा बिल्कुल ही गुप्त है। तुम बच्चे अभी मुक्ती धाम में जाने की यात्रा कर रहे हो।
00:10प्रश्न, स्थूल वतनवासी से सूख्ष्म वतनवासी भरिष्टा बनने का पुर्शार्थ क्या है?
00:17उत्तर, सूख्ष्म वतनवासी भरिष्टा बनना है, तो रूहानी सर्विस में हड़ी हड़ी स्वाहा करो। बिना हड़ी स्वाहा किये भरिष्टा नहीं बन सकते, क्योंकि भरिष्टे बिगर हड़ी मास के होते हैं। इस बेहद की सेवा में दधीची रिशी की तरह हड़ी ह
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01:46Therefore, karma and shakti svaroov ko pratyaksh karo.
01:50Avyakt-
01:51Işaray
01:52इस avyakt maas me
02:12अर्थात- पदार्थों का بंधन अगर अपनी देह का लगाव खatm किया, तो देह के संबन्ध और पदार्थ का बंधन आपे ही खत्म हो जायगा.
02:15ऐसे नहीं कोशिश करेंगे
02:17कोशिश शब्द ही सिद्ध करता है
02:19कि पुरानी दुनिया की कशिश है
02:21इसलिए कोशिश शब्द समाप्त करो
02:24देह भान को छोड़ो
02:26ओम शान्ती
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