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US-Iran तनाव पर बड़ी अपडेट! इस वीडियो में Arvind Singh Tejawat बताते हैं ट्रंप के डर की कहानी और Trump-Khamenei के बीच हाई-स्टेक्स ड्रामा। जानिए कौन से कारणों ने इस टकराव को जन्म दिया और अमेरिका की मध्यपूर्व में रणनीति पर इसका क्या असर पड़ सकता है। हम लाते हैं ताज़ा घटनाक्रम, राजनीतिक विश्लेषण और संभावित परिणाम। सैन्य कदमों से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं तक, हर पहलू की पूरी जानकारी। वीडियो को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करें ताकि आप US-Iran युद्ध से जुड़ी हर अपडेट और विशेषज्ञ राय समय पर पा सकें।

Major update on the US-Iran tensions! In this video, Arvind Singh Tejawat shares the untold story of Trump’s fear and the high-stakes drama between Trump and Khamenei. What triggered this intense showdown, and how could it impact America’s strategy in the Middle East? We break down the latest events, political analysis, and possible outcomes of this crisis. From military moves to international reactions, get an in-depth look at what’s really happening. Watch, like, share, and subscribe for continuous updates on the US-Iran war and expert insights into global conflicts.

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00:00जैसाम तेजाओ साब सुनते हैं कि पचास के दशक से जब वहाँ पर इरान की अमेरिका की कठपुतली सरकार एक
00:05तरीके सा आ गई थी जो उनके कहन सारी सब कुछ करती थी उसके बाद 1989 तक जब तक इसलामिक
00:12करांती नहीं हुई तब तक तो पश्चिम के साथ इरान के रिष्�
00:20अच्छे को अगर सई माइने में देखे जाए तो हमारे जो अंग्रेज थें जो हमारे शाषक हुआ करते थे तो
00:28भारत के राजा
00:50पश्चिम में ऐसे अमीर लोगों के खिलाफ करांतिया हुई, उनके खिलाफ बहुत सारे जो माक्सवादी विचार, अगर कॉल माक्स को
00:57ही देखें तो वो तो जर्मनी का था, और इसी तरीके के बहुत सारे श्रमिक संगवादी थे या समाजवादी लोग
01:04थे, वो पूरे के प
01:18गरीबों को अगर हमने पैसा नहीं दिया, तो ये हमारे खिलाफ उट खड़े होंगे, उन्होंने क्या किया, कि बाकी देशों
01:25से लूट कर एक जो लूट का हिस्सा होता है, वो वहाँ के लोगों को दे दिया, जिससे उनका जीवन
01:31चलने लग गया, और वहाँ पे थोड़ी �
01:33अमिरी आ गई, तो अब सब कुछ ठीक था, अब वहाँ आंत्रिक कलर भी खतम हो गया था, बाकी दुनिया
01:39का शोशन करते थे, और अपने ही देश में उसका फैलाव कर देते थे, पर ये पूरा का पूरा जो
01:44खेल था, वो पुंजीवादी खेल था, और उसमें भी जो बड�
01:48जो पुंजीवादी घराने थे, उन्होंने पूरी ही दुनिया का शोशन किया है, और अभी तक जो व्यवस्था चल रही है,
01:55वो वैसी ही चल रही है, क्योंकि जी, बिल्कुल बहुत है, तब बहुतर ही थे, लगब मतलब जिस तरीके से
02:13इरान चाहरा था, वैसा ठीक ही था,
02:14यहां तक कि फिलिस्तिन के अंदर से भी जो इस तरहे जो हमास जिस तरीके से जो उसने उगर रूप
02:21ले लिया है, और आगे उम्मीद है कि आगे आने वाले दशकों में, वहां आंदोलन और जादा हिंसक और उगर
02:27होगा, तो वो नहीं था, शुरुआत में तो फिलिस्तिनी
02:42कहा जाता था, पर वो उस तरीके से हमास की तरह उन्होंने किलिंग्स या किड्नेपिंग्स तो उन्होंने भी नहीं की
02:47थी, जो रास्टर द्यक्ष थे, वो भी उनसे मिला करते थे, इंदराजी और यासर अराफात के भी बहुत सारी जो
02:54प्रसित तश्रीरे हैं, वो हम देख
03:12आपके घर में अगर कोई आ जाता है, जब तक घर में जगह हैं, तब तक तो कोई दिक्कत नहीं
03:16होगी, पर एक ही कमरे में जब पूरे ही परिवार को धकेला जाएगा, तो फिर वो जो एक परिवार वाले
03:22वो है, वो कहेंगे कि हम तो पहले से ही यहां थे, तो हमें एक ही कम
03:40कि सम्बर का महिना होता है 1978 तभी आंदोलन की शुरुवात हो गई थी उस वक्ट जो धार्मिक नेता थे
03:47रोहानी खुमेनी वो तो इरान में थे नहीं वो तो दूसरे देश में थे लेकिन लोग सड़क पर उतर आये
03:53थे और शाह को हटाने की मांग कर रहे थे उस आंदोलन के ब
04:11तरकों के मामले में या इसलामिक जो शिक्षाएं हैं उसके मामले में इतने कटर नहीं होते हैं और वैसे ही
04:18हम हेमेटिक और सेमेटिक रिलीजन्स की बात करते हैं तो जितने भी हेमेटिक रिलीजन्स होते हैं वहाँ पे बादचीत की
04:26और वाद विवाद का या तरक वितर का
04:28scope ज़्यादा रहता है तो मोटी तोर पर अगर देखा जाए तो इरान दरसल
04:32ग्यान विज्ञान का केंदर आज से नहीं पुराने जमाने से रहा है
04:36और ऐसे हालत में ठीक वैसा ही है जैसा कि हम यूरोप के बारे में
04:41कहते हैं कि फ्रांस में वहां से सारे आंदोलन की शुरात होती है
04:45प्रजात अंतर से लेकर विश्व बंदोत्व या जितने भी जो
04:50modern institutions हैं इनकी शुरात भी लगबल लगब प्रांस से होई उत्तर आधुनिक्ता
04:55का जो विचार है वह तक फ्रांस के लोगों का आया वहां पे student movement
05:00वहां 1968 का तो जैसे एरोप में फ्रांस की जो सती है वह की वह सती पश्चिम एशिया में
05:08इरान की है तो नए ग्यान विज्ञान का विस्तार जो है वहां होता है और जो इरानी समाज हैं
05:14वो बाकी पश्चिम एशिया के बाकी मुलकों से काफी आगे हैं और तब जाहिर है कि सबसे पहले आंदोलन भी
05:21वही होना था और ऐसे सामन्तवादी जो पूरा का पूरा जो ढांचा था उसके खिलाफ ही सबसे पहले वहीं स्वार
05:29आए और इसलिए सबसे पहले आंदोलन भी
05:31वहीं हुए है अभी जो अयतुल्लाः खुमाईनी साब है उनके खिलाफ भी अगर आंदोलन कहीं हो रहा है तो वो
05:40इरान में ही हो रहा है पर इसको यह भूलना करें कि यह जो इरानी लोग हैं वो अमेरिका के
05:46समर्थन में आ रहे हैं यह इरानी लोग हैं वो इसलामिक स्टाइ
06:01के लिए मांग कर रहे हैं तो इस विद्रोग को हमें ऐसे ही देखना चाहिए वैवा साथ
06:05असीक दशक में उस वक्त जो सर्वोच चनेता आये थे एक सर्वोच सक्ता स्थापी थी उन्होंने अमेरिका से रिष्टे सुधाने
06:12की कोशिश नहीं की
06:13अद देखिए ये कुछ चीजसे होती गई मतलब सुधा ही होती गई क्योंकि आप जब किसी खास धांचे पर या
06:21खास तरीके के विचारों को वहन करके चलता हैं तो आपके अपने दुश्मन भी बनते चले जाते हैं और दोसी
06:27बने जाते हैं
06:28मतलब आपके समान विचारों वाले लोग आपके आसपास आने लगते हैं और आपके विपरिज सोचने वाले आपके दुश्मन बनते जाते
06:34हैं तो ये एक साधान सी प्रक्रिया है अग क्या हो रहा है कि नहीं तो देखे कि एरान की
06:41न तो इसराइल से सिमाए मिलती है न अमरिक
06:56को शिकायत होने लगती है या अमरिका से इरान को शिकायत होने लगती है इसराइल और जो इरान है वो
07:04दोनों एक दूसरे के कटर दुश्मन हो जाते हैं वैस्ट एशिया में और भी तो मुल्क है उनकी दुश्मनिया इरान
07:10जितनी तेज क्यों नहीं हुई तो इसका एक कार�
07:13जैसा कि हमने पहले चर्चा की कि यहाँ जो ढांचा था जो इरान में बना और जो बाकी देशों के
07:21मुकाबले में अपिक्षाकरत प्रगत्री श्रील किश्म की विवस्था थी जो की जनता के समर्थन या उनके मरजी पे बहुत कुछ
07:29या उनका कहीं न कहीं कोई न कोई रोल थ
07:32और वहां की जनता जो मुस्लिम जो शिया अबादी थी वो एक तरीके की इसलामिक नीतियों पे जैसा कि इस
07:40देश का निर्मान हुआ जैसा कि हमने चर्चा की कि इसलामिक तरीके का वहां पे रिवलेशन हुआ तो उस तरीके
07:47की चीजें जो करने लगे जो नैतिक्ता या जो म
08:02समाज में क्या होना चीए नैतिक था कैसी तो मद्दिकाल धाचे की थी तो जहां जो पश्चिम है वो पूरी
08:10तरीके से
08:10modernize हो चुका है आदुनिक हो चुका है और ये मद्दिकाल नीतियों पे चलने वाले तो दोनों में clash होना
08:15जाहिर था फिर एरान को पूरे के पूरे जो
08:20इसलामिक दुनिया है उसका नित्रत्व करने का था कि वो चाहता था कि पूरी जो इसलामिक वर्ल पे वहर राज
08:28करें और साओधी अरेबिया इन दोनों की बीच में संगश था नित्रत्व को लेकर धीरे धीरे इरान ने अपनी उन
08:36सब चीजों को विस्तार करने के लिए अ�
08:40अज भी हम इरान के प्रोक्सिस को लेकर उसी पर हम आने वाले हैं तेजावस साहब असी के असी में
08:46ही इराक और इरान जंग में आ गए थे उसके बाद फिर असी से नब्बे के दशक के बीच में
08:52बहुत कुछ हुआ है इन दस सालों में आठ साल तो दोनों देशों का युद
08:55हुआ उस दोरान 1982 के आसपास इजबुल्ला के स्थापना हुई लबनान में इसके रावा फिर 1987 में हमास की भी
09:03स्थापना हुई और इन्हें के बारे में कहा जाता है कि इनको इरान का पीछे से समर्थन रहा है तो
09:08इस दशक को आप कैसे देखते हैं असी और नब्बे की बी�
09:24हो गया था तो हमें लग रहा था कि अब दुनिया में एक अलग तरीके की और हम उस पुस्तक
09:29का भी पता है जहां हमने यह सोचा था कि अब जो सिवलाइजेशन हैं उनके बीच में क्लैशेज होंगे संस्कृतियों
09:36की लड़ाई है अब यह विचार धारा की लड़ाई नहीं
09:39रही तो ऐसा होने लगा पर ऐसे में इन सब चीजों का तेजी से विस्तार होता है दुनिया भी बदलने
09:45लगती है पर यह सब देखिए जिनका आपने जिक्र किया हिजबुल्ला को वहां की जनता का समर्थन है हमास को
09:53भी जनता का समर्थन है तो यह जितनी भी जो इसलामिक स
10:09शंशे हो सकता है पर हाँ यह है कि जो दुनिया हैं और खासकर
10:14जिस जगह की हम लोग बात कर रहे हैं वहाँ पी भी
10:17असन्तोष था और वो लोग ज़्यादा बहतर समाज आ रहे
10:21थे एक बात और है कि जैसरे जैसे समाज में पैसे
10:26ज़्यादा आने लगते हैं तो वह अपनी बहतरी के लिए कोशिश करता है
10:30जब तक आपको खाने को नहीं मिलेगा आप खाने के लिए कोशिश करेंगे
10:34जब खाने को मिल जाएगा आपको पढ़ने को मिल जाएगा
10:37तो फिर आपकी जो अगला संगश होता है वह आजादी को लेकर होता है
10:41तो यह एक development का यह विकास का या व्यवस्था में परिवर्तन का एक स्वभाविक प्रक्रिया है
10:47और इरान या इरान की जो जितने भी जो प्रॉक्सीज हैं जिनको की वहां का लोकल जन समर्थन भी प्राप्त
10:53है
10:54तो हम उनके development को इसी तरीके से देखना चाहिए और इरान को जैसे मैंने कहा
10:59कि वह अपनी विचारधारा और अपने चीज़ों को कम से कम इस पूरे ही पश्चिम एश्याई की दुनिया में वह
11:05फैलाना चाहरा था
11:06तो इरान को उनको सपोर्ट करना बिल्कुल स्वाभाविक था तो वह उसी को एक पायदान की आगे वो है
11:13तो एक तरीके से यह जो शंस्कृतियों की लड़ाई हैं मुल्यों की लड़ाई हैं यही बड़ा रूप ले लेता है
11:18और उसमें जो नीजी स्वार्थ है वो काम करने लगता है
11:22बिल्कुल तजाव साहब अब 2000 के दशक में आते हैं जब इरान के अंदर परमाड की चाहत विक्सित हुई उसे
11:29लगा कि हमें परमाड शक्ती संपन राष्ट होना चाहिए यह चाहत क्यों विक्सित हुई उसके अंदर आपको क्या लगता है
11:35सीधा सा कारण है असुरक्षा बंदूक वही रखता है या रिवॉल्वर या चाकू वही रखता है जिसको इस चीज का
11:44डर हो कि कोई मेरी जान ले सकता है और परमाणू बंबी वही देश रखता है जिनको असुरक्षा होती है
11:50तो अमेरिका से उनको खत्रा लगने लगा क्य
12:05प्जा किया गया और इराग को बुरी तरह से सदियों मतलब दशकों पीछे ढखेल कर इराग को उसको लूटा जा
12:13रहा है आज भी लूटा जा रहा है तो इरान को पता था कि अगला जो नंबर है वो उसी
12:18का है और वैसे सोहर भी शुरू हो गए थे खासकर अगर ये रिप्लिक
12:34नहीं हुई थी रूस का खत्रा भी पूरी तरीके से टला नहीं था और नई दुनिया किस तरीके की है
12:40ये अमरिका को इस फर्स नहीं था पर आज जब ताक्तों में बहुत जादा फर्क है जब रूस को एक
12:46युक्रेन से लड़ाई में उलजा दिया गया है चीन जो है उसको �
12:51अपने जो सोने के सिक्के हैं वो देख रहे हैं क्योंकि वो अमरिका से मिल सकता है उसका सारा का
12:56सारा जो सामान है वो अमरिका में खपत लेता है तो दोनों के हित अंतर निर्वर हैं तो ऐसी स्तिती
13:03में इरान को पता था कि उसकी रक्षा अगर कोई कर सकता है तो वो पर्मान
13:18पर्मानुबं भी नहीं है भारत में भी पर्मानुबं इसलिए आया क्योंकि चीन का खत्रा था तो चीन के टेस्टिंग के
13:25बाद में भारत के लिए बहुत जरूरी हो गया था पाकिस्तान के पास इसलिए आया क्योंकि पाकिस्तान को भी असुरक्षा
13:32है तो जिन जिन देशों म
13:48क्योंकि इन प्रोजेक्ट्स को चलाने में काफी संसाधन व्याय होते हैं और निश्चित रूप से पार्माणूंबम वहीग चाहेगा अगर हम
13:55महंगी रिवॉल्वर खरीदेंगे तो पैसा तो लाना पड़ेगा पर अगर जान का खत्रा है तो वह भी चाहिए तो यही
14:01हालत है
14:02बिलकुल अब हाल के कुछ सालों में आते हैं 2023 के एक्टूबर महिने में इजराइल पर हमला किया जाता है
14:08हमास के दौरह उसके बाद 2025 में 12 दिनों की जंग होती है एक जिसमें इरान शामिल होता है उसके
14:15बाद फिर अब जाकर इरान में एक बड़ा आन्दोलन होता है जिसमे
14:20कहा ज़ा रहा है कि बहुत साही लोगों की जान भी गईmen by गई है । को every day
14:25हाल की दो-тिन साल को कैसे देख रहे हैं जो भुआ है। और इन दो-ری
14:29सालों को देखने के बाद क्या आप अभी लग रहा है आपको की जंग falei के जा
14:50प्रकृती में ये नहित है कि उसको फैलना है उसको अपने आपको बढ़ाना है क्योंकि वह सामराज जिवाद की मूल
14:56हकीकत है तो ऐसे में यह जंक तो होके रहेगी कब होती है यह एक अलग बात है और अभी
15:03अमरीका के लिए सबसे बैतर समय अमरीका के इसाब से इसलिए है का
15:30यह तो बात यह है कि अगर अमरीका और चिंड दोनों भी मिल जाए तो वह अमरीका नौ सेना का
15:39मुका नहीं कर सकते हैं यह सच है तो ऐसे में दुनिया का अगर सबसे कोई भैनक कोई ताकत वर
15:46देश है तो वह अमरीका
15:48जरूर चाहेगा कि वो पूरी दुनिया पे
15:50कबजा करें और पूरी दुनिया
15:52के संसाधन है उनको रूट
15:54के वहाँ अमेरीका में
15:56उसका उप्योग करें
15:58तो अमेरीका तो बिलकुल चाहेगा और दोनों की
16:00जंग जायज है क्योंकि दोनों की
16:15अमेरिका पर हमला किया है
16:17और तमाम जाहे वो ग्लासको से लेके
16:20अमेरिका के जो तमाम वाशिंटन से लेके
16:23तमाम जहां पर जो अगर आप देखेंगे
16:26तो जो हमले है न्यू आर्क से लेके
16:28तमाम जो अमेरिका के अंदर जिनोंने
16:31जो किया है वो इसलामिक जिहादियों ने किया है
16:34और ये जो लड़ाई है वो चलती रहेगी
16:37और अमेरिका का पूरा जो चरितर है वह भी इन पे कबचा
16:41आप देखेंगे कि अमेरिका हर जगे जितने भी जो मुस्लिम देश है
16:45चाहिए वो अफ़कानिस्तान हो चाहिए वो इराक हो
16:48उन पे अपना पंजा और अपना श्रिकंजा कसे का तो ये लड़ाई ऐसी ही चलते रहेगे
16:53वैबसा बिल्कुल अक्टूबर 23 में जो इराईल पे हमला हुआ था उसे लेकर आप क्या सोचते हैं
16:59और एक गेश के रूप में आप इसराईल कभविस से कैसे दिख पा रहे हैं अभी
17:02देखे इसराईल ने तो अपने आपको काफी मस्बूत किया है
17:05पर इसराईल जब तक है वहाँ पे
17:08तब तक फिलिस्तिनियों और उनके बीच में लड़ाई होती रहेगी
17:11भारत जो चाहता है वो द्वी रास्ट्रों में अलग-अलग माट दी जाए
17:22तो पहले तो फिलिस्तिनियों इसके लिए तयार नहीं था
17:24अब इसराईल इसके लिए तयार नहीं है
17:27तो यह पूरी ताकत का खेल है
17:28क्योंकि पहले जो ताकत या जो विश्व के देशों का जो समर्थन था वो फिलिस्तिनी लोगों के साथ था
17:35पर धीरे धीरे जो पूरा इसराइल है उसने सतारे ही फिलिस्तिनियों को बे दखल करके पूरे ही इसराइल पे पूरी
17:45तरीके से फिलिस्तिनियों को वहां से हटा दिया है तो अब जो पूरी तरीके से जो फिलिस्तिनियों को वहां से
17:51हटा दिया है तो अब जो पूरी तरीके स
18:05वो वापस उसको स्थापित करना चाहते हैं जो वहां के कटरपंथी लोग हैं और अभी जो विन्यामिन नितन्याउ है वो
18:13उन्ही कटरपंथी लोगों में से एक हैं तो वो ऐसा चाहते हैं तो यह तो फिलिस्तिन और यह जो दोनों
18:19मसला है वो नहीं कभी हलोने वाला है जब त
18:35कहां तक होता और वहां पे पूरे ही इस क्षित्र में अगर विकास की बैयार आ रहे होती और फिलिस्थिनी
18:42अपने आपको सम्रिद्ध मेहसूस कर रहे होते तो वो तो उसे सौबागी साली मानते हैं कि एक नई दुनिया एक
18:48नई लोग आए जिन्नोंने हमारे यहां पर बहुत
19:05उन्होंने भारत में सिलाई कड़ाई चूना इत्यादी तमाम चीज़ा आर्किटेक्चर से लेकर योगदान दिया और यही कारण था कि भारत
19:15मद्यकाल में दुनिया का सबसे ताकतवर और अमीर देश था और यही कारण है कि भारत के लोगों में वह
19:21समस्या नहीं थी पूर
19:34साथ में रह रहे थे फिर बाद में जो उपनिवेश के काल में दोनों को यह समझाया गया कि दोनों
19:40की हित अलग अलग है है ना हम आपको नौकरी देए थे हैं हम इनको नहीं देंगे हम आपको जागे
19:46दे देंगे इनको नहीं देंगे आप दोनों अलग अलग हो फिर सक्षा
19:50विवस्था के माद्यम से ये समझाया गया
19:52तो ये सारी चीज़ें हुई
19:53पर अगर कोई भी देश
19:56अगर आपके लिए
19:57या कोई भी व्यक्ति अगर आपका विकास करता है
20:00तो आपको उससे समस्या नहीं होती है
20:02दिक्कत तब होती है
20:03जब वह आपके हको खाना शुरू करता है
20:06तो इसका समधान वही है
20:08कि वही लोग आपस में समझें
20:11किसी के हको मारना बन करें
20:13और आपस में सहस्तितों के साथ रहे
20:15यही इस समस्या का समधान है
20:17अगर ऐसा संभब नहीं है
20:19तो दोनों एक अलग-अलग मुलकों में चले जाए
20:23और जो मुलकों का जो विभाजन हो
20:26वो भी ठीक तरह से हो
20:28ऐसा नहीं कि West Bank को एक तरह से
20:30एक किनारे में डाल दिया
20:31सभी के साथ ने आये हो
20:33सभी के साथ ने आये हो
20:34जो कि अभी हो नहीं रहा है
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