00:00जैसाम तेजाओ साब सुनते हैं कि पचास के दशक से जब वहाँ पर इरान की अमेरिका की कठपुतली सरकार एक
00:05तरीके सा आ गई थी जो उनके कहन सारी सब कुछ करती थी उसके बाद 1989 तक जब तक इसलामिक
00:12करांती नहीं हुई तब तक तो पश्चिम के साथ इरान के रिष्�
00:20अच्छे को अगर सई माइने में देखे जाए तो हमारे जो अंग्रेज थें जो हमारे शाषक हुआ करते थे तो
00:28भारत के राजा
00:50पश्चिम में ऐसे अमीर लोगों के खिलाफ करांतिया हुई, उनके खिलाफ बहुत सारे जो माक्सवादी विचार, अगर कॉल माक्स को
00:57ही देखें तो वो तो जर्मनी का था, और इसी तरीके के बहुत सारे श्रमिक संगवादी थे या समाजवादी लोग
01:04थे, वो पूरे के प
01:18गरीबों को अगर हमने पैसा नहीं दिया, तो ये हमारे खिलाफ उट खड़े होंगे, उन्होंने क्या किया, कि बाकी देशों
01:25से लूट कर एक जो लूट का हिस्सा होता है, वो वहाँ के लोगों को दे दिया, जिससे उनका जीवन
01:31चलने लग गया, और वहाँ पे थोड़ी �
01:33अमिरी आ गई, तो अब सब कुछ ठीक था, अब वहाँ आंत्रिक कलर भी खतम हो गया था, बाकी दुनिया
01:39का शोशन करते थे, और अपने ही देश में उसका फैलाव कर देते थे, पर ये पूरा का पूरा जो
01:44खेल था, वो पुंजीवादी खेल था, और उसमें भी जो बड�
01:48जो पुंजीवादी घराने थे, उन्होंने पूरी ही दुनिया का शोशन किया है, और अभी तक जो व्यवस्था चल रही है,
01:55वो वैसी ही चल रही है, क्योंकि जी, बिल्कुल बहुत है, तब बहुतर ही थे, लगब मतलब जिस तरीके से
02:13इरान चाहरा था, वैसा ठीक ही था,
02:14यहां तक कि फिलिस्तिन के अंदर से भी जो इस तरहे जो हमास जिस तरीके से जो उसने उगर रूप
02:21ले लिया है, और आगे उम्मीद है कि आगे आने वाले दशकों में, वहां आंदोलन और जादा हिंसक और उगर
02:27होगा, तो वो नहीं था, शुरुआत में तो फिलिस्तिनी
02:42कहा जाता था, पर वो उस तरीके से हमास की तरह उन्होंने किलिंग्स या किड्नेपिंग्स तो उन्होंने भी नहीं की
02:47थी, जो रास्टर द्यक्ष थे, वो भी उनसे मिला करते थे, इंदराजी और यासर अराफात के भी बहुत सारी जो
02:54प्रसित तश्रीरे हैं, वो हम देख
03:12आपके घर में अगर कोई आ जाता है, जब तक घर में जगह हैं, तब तक तो कोई दिक्कत नहीं
03:16होगी, पर एक ही कमरे में जब पूरे ही परिवार को धकेला जाएगा, तो फिर वो जो एक परिवार वाले
03:22वो है, वो कहेंगे कि हम तो पहले से ही यहां थे, तो हमें एक ही कम
03:40कि सम्बर का महिना होता है 1978 तभी आंदोलन की शुरुवात हो गई थी उस वक्ट जो धार्मिक नेता थे
03:47रोहानी खुमेनी वो तो इरान में थे नहीं वो तो दूसरे देश में थे लेकिन लोग सड़क पर उतर आये
03:53थे और शाह को हटाने की मांग कर रहे थे उस आंदोलन के ब
04:11तरकों के मामले में या इसलामिक जो शिक्षाएं हैं उसके मामले में इतने कटर नहीं होते हैं और वैसे ही
04:18हम हेमेटिक और सेमेटिक रिलीजन्स की बात करते हैं तो जितने भी हेमेटिक रिलीजन्स होते हैं वहाँ पे बादचीत की
04:26और वाद विवाद का या तरक वितर का
04:28scope ज़्यादा रहता है तो मोटी तोर पर अगर देखा जाए तो इरान दरसल
04:32ग्यान विज्ञान का केंदर आज से नहीं पुराने जमाने से रहा है
04:36और ऐसे हालत में ठीक वैसा ही है जैसा कि हम यूरोप के बारे में
04:41कहते हैं कि फ्रांस में वहां से सारे आंदोलन की शुरात होती है
04:45प्रजात अंतर से लेकर विश्व बंदोत्व या जितने भी जो
04:50modern institutions हैं इनकी शुरात भी लगबल लगब प्रांस से होई उत्तर आधुनिक्ता
04:55का जो विचार है वह तक फ्रांस के लोगों का आया वहां पे student movement
05:00वहां 1968 का तो जैसे एरोप में फ्रांस की जो सती है वह की वह सती पश्चिम एशिया में
05:08इरान की है तो नए ग्यान विज्ञान का विस्तार जो है वहां होता है और जो इरानी समाज हैं
05:14वो बाकी पश्चिम एशिया के बाकी मुलकों से काफी आगे हैं और तब जाहिर है कि सबसे पहले आंदोलन भी
05:21वही होना था और ऐसे सामन्तवादी जो पूरा का पूरा जो ढांचा था उसके खिलाफ ही सबसे पहले वहीं स्वार
05:29आए और इसलिए सबसे पहले आंदोलन भी
05:31वहीं हुए है अभी जो अयतुल्लाः खुमाईनी साब है उनके खिलाफ भी अगर आंदोलन कहीं हो रहा है तो वो
05:40इरान में ही हो रहा है पर इसको यह भूलना करें कि यह जो इरानी लोग हैं वो अमेरिका के
05:46समर्थन में आ रहे हैं यह इरानी लोग हैं वो इसलामिक स्टाइ
06:01के लिए मांग कर रहे हैं तो इस विद्रोग को हमें ऐसे ही देखना चाहिए वैवा साथ
06:05असीक दशक में उस वक्त जो सर्वोच चनेता आये थे एक सर्वोच सक्ता स्थापी थी उन्होंने अमेरिका से रिष्टे सुधाने
06:12की कोशिश नहीं की
06:13अद देखिए ये कुछ चीजसे होती गई मतलब सुधा ही होती गई क्योंकि आप जब किसी खास धांचे पर या
06:21खास तरीके के विचारों को वहन करके चलता हैं तो आपके अपने दुश्मन भी बनते चले जाते हैं और दोसी
06:27बने जाते हैं
06:28मतलब आपके समान विचारों वाले लोग आपके आसपास आने लगते हैं और आपके विपरिज सोचने वाले आपके दुश्मन बनते जाते
06:34हैं तो ये एक साधान सी प्रक्रिया है अग क्या हो रहा है कि नहीं तो देखे कि एरान की
06:41न तो इसराइल से सिमाए मिलती है न अमरिक
06:56को शिकायत होने लगती है या अमरिका से इरान को शिकायत होने लगती है इसराइल और जो इरान है वो
07:04दोनों एक दूसरे के कटर दुश्मन हो जाते हैं वैस्ट एशिया में और भी तो मुल्क है उनकी दुश्मनिया इरान
07:10जितनी तेज क्यों नहीं हुई तो इसका एक कार�
07:13जैसा कि हमने पहले चर्चा की कि यहाँ जो ढांचा था जो इरान में बना और जो बाकी देशों के
07:21मुकाबले में अपिक्षाकरत प्रगत्री श्रील किश्म की विवस्था थी जो की जनता के समर्थन या उनके मरजी पे बहुत कुछ
07:29या उनका कहीं न कहीं कोई न कोई रोल थ
07:32और वहां की जनता जो मुस्लिम जो शिया अबादी थी वो एक तरीके की इसलामिक नीतियों पे जैसा कि इस
07:40देश का निर्मान हुआ जैसा कि हमने चर्चा की कि इसलामिक तरीके का वहां पे रिवलेशन हुआ तो उस तरीके
07:47की चीजें जो करने लगे जो नैतिक्ता या जो म
08:02समाज में क्या होना चीए नैतिक था कैसी तो मद्दिकाल धाचे की थी तो जहां जो पश्चिम है वो पूरी
08:10तरीके से
08:10modernize हो चुका है आदुनिक हो चुका है और ये मद्दिकाल नीतियों पे चलने वाले तो दोनों में clash होना
08:15जाहिर था फिर एरान को पूरे के पूरे जो
08:20इसलामिक दुनिया है उसका नित्रत्व करने का था कि वो चाहता था कि पूरी जो इसलामिक वर्ल पे वहर राज
08:28करें और साओधी अरेबिया इन दोनों की बीच में संगश था नित्रत्व को लेकर धीरे धीरे इरान ने अपनी उन
08:36सब चीजों को विस्तार करने के लिए अ�
08:40अज भी हम इरान के प्रोक्सिस को लेकर उसी पर हम आने वाले हैं तेजावस साहब असी के असी में
08:46ही इराक और इरान जंग में आ गए थे उसके बाद फिर असी से नब्बे के दशक के बीच में
08:52बहुत कुछ हुआ है इन दस सालों में आठ साल तो दोनों देशों का युद
08:55हुआ उस दोरान 1982 के आसपास इजबुल्ला के स्थापना हुई लबनान में इसके रावा फिर 1987 में हमास की भी
09:03स्थापना हुई और इन्हें के बारे में कहा जाता है कि इनको इरान का पीछे से समर्थन रहा है तो
09:08इस दशक को आप कैसे देखते हैं असी और नब्बे की बी�
09:24हो गया था तो हमें लग रहा था कि अब दुनिया में एक अलग तरीके की और हम उस पुस्तक
09:29का भी पता है जहां हमने यह सोचा था कि अब जो सिवलाइजेशन हैं उनके बीच में क्लैशेज होंगे संस्कृतियों
09:36की लड़ाई है अब यह विचार धारा की लड़ाई नहीं
09:39रही तो ऐसा होने लगा पर ऐसे में इन सब चीजों का तेजी से विस्तार होता है दुनिया भी बदलने
09:45लगती है पर यह सब देखिए जिनका आपने जिक्र किया हिजबुल्ला को वहां की जनता का समर्थन है हमास को
09:53भी जनता का समर्थन है तो यह जितनी भी जो इसलामिक स
10:09शंशे हो सकता है पर हाँ यह है कि जो दुनिया हैं और खासकर
10:14जिस जगह की हम लोग बात कर रहे हैं वहाँ पी भी
10:17असन्तोष था और वो लोग ज़्यादा बहतर समाज आ रहे
10:21थे एक बात और है कि जैसरे जैसे समाज में पैसे
10:26ज़्यादा आने लगते हैं तो वह अपनी बहतरी के लिए कोशिश करता है
10:30जब तक आपको खाने को नहीं मिलेगा आप खाने के लिए कोशिश करेंगे
10:34जब खाने को मिल जाएगा आपको पढ़ने को मिल जाएगा
10:37तो फिर आपकी जो अगला संगश होता है वह आजादी को लेकर होता है
10:41तो यह एक development का यह विकास का या व्यवस्था में परिवर्तन का एक स्वभाविक प्रक्रिया है
10:47और इरान या इरान की जो जितने भी जो प्रॉक्सीज हैं जिनको की वहां का लोकल जन समर्थन भी प्राप्त
10:53है
10:54तो हम उनके development को इसी तरीके से देखना चाहिए और इरान को जैसे मैंने कहा
10:59कि वह अपनी विचारधारा और अपने चीज़ों को कम से कम इस पूरे ही पश्चिम एश्याई की दुनिया में वह
11:05फैलाना चाहरा था
11:06तो इरान को उनको सपोर्ट करना बिल्कुल स्वाभाविक था तो वह उसी को एक पायदान की आगे वो है
11:13तो एक तरीके से यह जो शंस्कृतियों की लड़ाई हैं मुल्यों की लड़ाई हैं यही बड़ा रूप ले लेता है
11:18और उसमें जो नीजी स्वार्थ है वो काम करने लगता है
11:22बिल्कुल तजाव साहब अब 2000 के दशक में आते हैं जब इरान के अंदर परमाड की चाहत विक्सित हुई उसे
11:29लगा कि हमें परमाड शक्ती संपन राष्ट होना चाहिए यह चाहत क्यों विक्सित हुई उसके अंदर आपको क्या लगता है
11:35सीधा सा कारण है असुरक्षा बंदूक वही रखता है या रिवॉल्वर या चाकू वही रखता है जिसको इस चीज का
11:44डर हो कि कोई मेरी जान ले सकता है और परमाणू बंबी वही देश रखता है जिनको असुरक्षा होती है
11:50तो अमेरिका से उनको खत्रा लगने लगा क्य
12:05प्जा किया गया और इराग को बुरी तरह से सदियों मतलब दशकों पीछे ढखेल कर इराग को उसको लूटा जा
12:13रहा है आज भी लूटा जा रहा है तो इरान को पता था कि अगला जो नंबर है वो उसी
12:18का है और वैसे सोहर भी शुरू हो गए थे खासकर अगर ये रिप्लिक
12:34नहीं हुई थी रूस का खत्रा भी पूरी तरीके से टला नहीं था और नई दुनिया किस तरीके की है
12:40ये अमरिका को इस फर्स नहीं था पर आज जब ताक्तों में बहुत जादा फर्क है जब रूस को एक
12:46युक्रेन से लड़ाई में उलजा दिया गया है चीन जो है उसको �
12:51अपने जो सोने के सिक्के हैं वो देख रहे हैं क्योंकि वो अमरिका से मिल सकता है उसका सारा का
12:56सारा जो सामान है वो अमरिका में खपत लेता है तो दोनों के हित अंतर निर्वर हैं तो ऐसी स्तिती
13:03में इरान को पता था कि उसकी रक्षा अगर कोई कर सकता है तो वो पर्मान
13:18पर्मानुबं भी नहीं है भारत में भी पर्मानुबं इसलिए आया क्योंकि चीन का खत्रा था तो चीन के टेस्टिंग के
13:25बाद में भारत के लिए बहुत जरूरी हो गया था पाकिस्तान के पास इसलिए आया क्योंकि पाकिस्तान को भी असुरक्षा
13:32है तो जिन जिन देशों म
13:48क्योंकि इन प्रोजेक्ट्स को चलाने में काफी संसाधन व्याय होते हैं और निश्चित रूप से पार्माणूंबम वहीग चाहेगा अगर हम
13:55महंगी रिवॉल्वर खरीदेंगे तो पैसा तो लाना पड़ेगा पर अगर जान का खत्रा है तो वह भी चाहिए तो यही
14:01हालत है
14:02बिलकुल अब हाल के कुछ सालों में आते हैं 2023 के एक्टूबर महिने में इजराइल पर हमला किया जाता है
14:08हमास के दौरह उसके बाद 2025 में 12 दिनों की जंग होती है एक जिसमें इरान शामिल होता है उसके
14:15बाद फिर अब जाकर इरान में एक बड़ा आन्दोलन होता है जिसमे
14:20कहा ज़ा रहा है कि बहुत साही लोगों की जान भी गईmen by गई है । को every day
14:25हाल की दो-тिन साल को कैसे देख रहे हैं जो भुआ है। और इन दो-ری
14:29सालों को देखने के बाद क्या आप अभी लग रहा है आपको की जंग falei के जा
14:50प्रकृती में ये नहित है कि उसको फैलना है उसको अपने आपको बढ़ाना है क्योंकि वह सामराज जिवाद की मूल
14:56हकीकत है तो ऐसे में यह जंक तो होके रहेगी कब होती है यह एक अलग बात है और अभी
15:03अमरीका के लिए सबसे बैतर समय अमरीका के इसाब से इसलिए है का
15:30यह तो बात यह है कि अगर अमरीका और चिंड दोनों भी मिल जाए तो वह अमरीका नौ सेना का
15:39मुका नहीं कर सकते हैं यह सच है तो ऐसे में दुनिया का अगर सबसे कोई भैनक कोई ताकत वर
15:46देश है तो वह अमरीका
15:48जरूर चाहेगा कि वो पूरी दुनिया पे
15:50कबजा करें और पूरी दुनिया
15:52के संसाधन है उनको रूट
15:54के वहाँ अमेरीका में
15:56उसका उप्योग करें
15:58तो अमेरीका तो बिलकुल चाहेगा और दोनों की
16:00जंग जायज है क्योंकि दोनों की
16:15अमेरिका पर हमला किया है
16:17और तमाम जाहे वो ग्लासको से लेके
16:20अमेरिका के जो तमाम वाशिंटन से लेके
16:23तमाम जहां पर जो अगर आप देखेंगे
16:26तो जो हमले है न्यू आर्क से लेके
16:28तमाम जो अमेरिका के अंदर जिनोंने
16:31जो किया है वो इसलामिक जिहादियों ने किया है
16:34और ये जो लड़ाई है वो चलती रहेगी
16:37और अमेरिका का पूरा जो चरितर है वह भी इन पे कबचा
16:41आप देखेंगे कि अमेरिका हर जगे जितने भी जो मुस्लिम देश है
16:45चाहिए वो अफ़कानिस्तान हो चाहिए वो इराक हो
16:48उन पे अपना पंजा और अपना श्रिकंजा कसे का तो ये लड़ाई ऐसी ही चलते रहेगे
16:53वैबसा बिल्कुल अक्टूबर 23 में जो इराईल पे हमला हुआ था उसे लेकर आप क्या सोचते हैं
16:59और एक गेश के रूप में आप इसराईल कभविस से कैसे दिख पा रहे हैं अभी
17:02देखे इसराईल ने तो अपने आपको काफी मस्बूत किया है
17:05पर इसराईल जब तक है वहाँ पे
17:08तब तक फिलिस्तिनियों और उनके बीच में लड़ाई होती रहेगी
17:11भारत जो चाहता है वो द्वी रास्ट्रों में अलग-अलग माट दी जाए
17:22तो पहले तो फिलिस्तिनियों इसके लिए तयार नहीं था
17:24अब इसराईल इसके लिए तयार नहीं है
17:27तो यह पूरी ताकत का खेल है
17:28क्योंकि पहले जो ताकत या जो विश्व के देशों का जो समर्थन था वो फिलिस्तिनी लोगों के साथ था
17:35पर धीरे धीरे जो पूरा इसराइल है उसने सतारे ही फिलिस्तिनियों को बे दखल करके पूरे ही इसराइल पे पूरी
17:45तरीके से फिलिस्तिनियों को वहां से हटा दिया है तो अब जो पूरी तरीके से जो फिलिस्तिनियों को वहां से
17:51हटा दिया है तो अब जो पूरी तरीके स
18:05वो वापस उसको स्थापित करना चाहते हैं जो वहां के कटरपंथी लोग हैं और अभी जो विन्यामिन नितन्याउ है वो
18:13उन्ही कटरपंथी लोगों में से एक हैं तो वो ऐसा चाहते हैं तो यह तो फिलिस्तिन और यह जो दोनों
18:19मसला है वो नहीं कभी हलोने वाला है जब त
18:35कहां तक होता और वहां पे पूरे ही इस क्षित्र में अगर विकास की बैयार आ रहे होती और फिलिस्थिनी
18:42अपने आपको सम्रिद्ध मेहसूस कर रहे होते तो वो तो उसे सौबागी साली मानते हैं कि एक नई दुनिया एक
18:48नई लोग आए जिन्नोंने हमारे यहां पर बहुत
19:05उन्होंने भारत में सिलाई कड़ाई चूना इत्यादी तमाम चीज़ा आर्किटेक्चर से लेकर योगदान दिया और यही कारण था कि भारत
19:15मद्यकाल में दुनिया का सबसे ताकतवर और अमीर देश था और यही कारण है कि भारत के लोगों में वह
19:21समस्या नहीं थी पूर
19:34साथ में रह रहे थे फिर बाद में जो उपनिवेश के काल में दोनों को यह समझाया गया कि दोनों
19:40की हित अलग अलग है है ना हम आपको नौकरी देए थे हैं हम इनको नहीं देंगे हम आपको जागे
19:46दे देंगे इनको नहीं देंगे आप दोनों अलग अलग हो फिर सक्षा
19:50विवस्था के माद्यम से ये समझाया गया
19:52तो ये सारी चीज़ें हुई
19:53पर अगर कोई भी देश
19:56अगर आपके लिए
19:57या कोई भी व्यक्ति अगर आपका विकास करता है
20:00तो आपको उससे समस्या नहीं होती है
20:02दिक्कत तब होती है
20:03जब वह आपके हको खाना शुरू करता है
20:06तो इसका समधान वही है
20:08कि वही लोग आपस में समझें
20:11किसी के हको मारना बन करें
20:13और आपस में सहस्तितों के साथ रहे
20:15यही इस समस्या का समधान है
20:17अगर ऐसा संभब नहीं है
20:19तो दोनों एक अलग-अलग मुलकों में चले जाए
20:23और जो मुलकों का जो विभाजन हो
20:26वो भी ठीक तरह से हो
20:28ऐसा नहीं कि West Bank को एक तरह से
20:30एक किनारे में डाल दिया
20:31सभी के साथ ने आये हो
20:33सभी के साथ ने आये हो
20:34जो कि अभी हो नहीं रहा है
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