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भारत के रूस से तेल आयात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है, खासकर अमेरिका के साथ नई ट्रेड डील के बाद। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बीच भारत सरकार ने साफ किया है कि देश की ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हित पर आधारित रहेगी। 9 फरवरी 2026 को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट कहा कि भारत 80–85 प्रतिशत ऊर्जा आयात पर निर्भर है, इसलिए सस्ती, पर्याप्त और सुरक्षित आपूर्ति उसकी प्राथमिकता है। सरकार का फोकस तीन बातों पर है—उचित कीमत, पर्याप्त उपलब्धता और सप्लाई की विश्वसनीयता। भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता और ऊर्जा स्रोतों में विविधता बनाए रखेगा। रूस से तेल खरीद का फैसला बाजार की स्थिति और राष्ट्रीय हित के आधार पर होगा, न कि किसी बाहरी दबाव में। ऊर्जा नीति सीधे आम जनता की जेब और महंगाई से जुड़ी है, इसलिए संतुलित और व्यावहारिक रुख अपनाया जाएगा।
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00:00Recent years, the global economy has faced significant uncertainties.
00:30इसके साथ ही ये भी खबराई की भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाये गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ हटा लिया गया है.
00:44इन तमाम दावों और चर्चाओं के बीच भारत सरकार ने आखिरकार अपना रुख साफ कर दिया है.
00:49सोमवार 9 फरवरी 2026 को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मीडिया ब्रीफिंग में साफ शब्दों में कहा कि भारत अपनी उर्जा जरूरतों को राष्ट्रिय हित को ध्यान में रख कर तै करेगा.
01:00उन्होंने कहा कि भारत की प्रात्मिक्ता है भारतिय उपभोक्ताओं को उचित दाम पर पर्याप्त और सुरक्षित उर्जा उपलब्द कराना.
01:07उन्होंने एक एहम बात कही जब हम 80-85 प्रतिशत तक उर्जा आयात पर निर्भर है तो हमें कीमतों के प्रती समवेदन शील रहना ही पड़ेगा.
01:16यानि साफ है कि भारत एक विकासशील अर्थविवस्था है और इतनी बड़ी आबादी की जरूरतों को देखते हुए सस्ती और स्थिर उर्जा आपूर्ती बेहत जरूरी है.
01:24विदेश सचिव ने ये भी सपष्ट किया कि भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता. भारत की रणनीती रही है कि उर्जा की स्रोतों में विविधता यानि डाइवर्सिफिकेशन बनाए रखा जाए. हम कई देशों से तेल खरीदते हैं और आगे भी खरीद
01:54वेश्विक स्तर पर उर्जा बाजार में काफी अस्थिरता देखने को मिली है. रूस यूकरेन युद्ध के बाद दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई. पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए. ऐसे में भारत ने रियायती दरों
02:24वेश्विक उर्जा बाजार में स्थिरता लाने में भी महित्वपून भूमिका निभाता है. भारत की मांग और खरीदारी का असर अंतराष्ट्य कीमतों पर भी पड़ता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक जन्वरी महीने में रूस से भारत के तेल आयात में कुछ गिराव�
02:54नहीं है जिसके कारण भारत अपनी उर्जा नीती पूरी तरह बदल दे. सरकार का फोकस तीन चीजों पर है. पहला परियाप्त उपलब्धता, दूसरा उचित कीमत और तीसरा सप्लाई की विश्वस्नियता और सुरक्षा. जब देश 80-85 प्रतिशत तक आयात पर निर्भर
03:24का स्टैंड साफ है. भारत रूस से तेल खरीदे का या नहीं, ये किसी दावे या दबाव से नहीं, बलकि बाजार की स्थिती और राष्ट्रिय हिट से तै होगा. भारत कई देशों से उर्जा खरीदता है और आगे भी विविधता बनाए रखेगा. तो क्या आने वाले द
03:54आते हैं कर राष्ट है नहीं, बल्सक रखेगा हैं राष्ट में लूस शर खरीदे बाष्टेवन
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