00:00Border 2 एक ऐसी फिल्म है जो असल में ये कहना चाहती है कि अगर आपने Border 1 देखी थी, तो बस उसी जजबे को और ज्यादा शोर और ज्यादा स्लो मोशन और और और भी भारी देशभक्ती के साथ दोबारा देख लें।
00:12गहानी बहुत सीधी हैं, सिपाही सरहद पर हैं, दुश्मन सामने हैं, बैक ग्राउंड में देशभक्ती म्यूजिक चल रहा हैं और हर कुछ देर बाद ऐसा डायलॉग आता है जो सीधा भाद सेब स्टेट्स बन सकता हैं।
00:26फिल्म में सिपाही गोलियों से कम और डायलॉक्स से ज्यादा लड़ते नजर आते हैं। कोई सिपाही बूरी तरह जखमी होता है, लेकिन जैसे ही माधरती या वतन का नाम सुनता है, तो अचानक उसकी एनरजी फुल हो जाती है। राशन कम दिखाया जाता है, गोलियां भ
00:56को निपटा देते हैं और अगले ही लेपुने पूर हीरो मोड में आ जाते हैं। हर सीन में महसूस होता है कि अगर ना जिर अभी करोन ही तो बैकग्राउंड म्यूजिक और तेज कर दिया जाए। वायलिन और डोल इस शिद्दचत से बज़ते हैं कि इस बात खुद खुद
01:26इस बातिक फिल्म देखने नहीं आई थी। आखिर में ये कहा जा सकता है कि बॉर्डर्डू फिल्म कम और जज़बाती वर्काउट ज्यादा है। कहानी में मंतिक कम है, ड्रामा बहुत ज्यादा, लेकिन अगर आप देशभक्ती स्लो मोशन शौद्स और भारी भरकम डायल
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