00:00इस दिवाली एक ऐसा महल खुलेगा जहां कामरों से ज्यादा गल्तियां है ये है वो आदमी जो अपनी जिन्दागी में कभी अकेला नहीं रहा क्यूंकि उसकी किस्मात में हमेशा हाउसफुल लिखा था
00:19एक थरफ बिवी नमबर एक
00:20लेकिन कहानी में आता है एक नाया हीरो जिसको लगता था उसकी लाइफ सिंपल है पर यहां थो प्यार भी डबल और कन्फूजन भी डबल
00:32चार जोडे एक महल और इतनी उलजी हुई शादियां के पांदित भी बोले मैं रिजाइन करता हूँ
00:40राज को या रवी या रोहान जहां नाम मिलते नहीं रिष्टों के लिष्ट हाई
00:47पर ये महाल सिर्फ प्यार से नहीं कुछ और भी चुपाता है यहां सिर्फ रिष्टों की अताके लिया नहीं
00:56जब प्यार, शादी, तलाक और भोल्ट सब एक ही कॉरिडॉर में मिल जाएं तो भागना तो बनता है
01:04जहां कमरे गलत, बातरूम गलत और आदमी
01:12यहां रिष्टों का बैलिंस भी इस बैलकनी की रेलिंग जैसा है
01:16कभी भी हाथ जोट सकता है, पर नीचे गिरने से पहले
01:20एक तरफ सासूर जी का गुस्सा, दौसरी तरफ सास का द्रामा
01:26बीच में बचारा दमाद, इस बार सिर्फ घर नहीं
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