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  • 12 minutes ago
ग्वालियर कृषि यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने उगाया बीमारी फ्री आलू, हवा में तैयार किया बीज, एक किलो से मिलेगा 400 किलो पटेटो.

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00:00गौालियर की राजमाता विजया राजे सिंदिया क्रिशिव शुविध्याले ने दो साल पहले रिसर्च के लिए खेती की एक नई तक्नीक शुरू की थी
00:06यह एरोपॉनिक तक्नीक थी जिसके जरीए वैग्यानिकों ने हवा में आलू उगाने का प्रयास शुरू किया था
00:30जो आलू यानि बीज जो मिनी ट्यूबर बनते हैं वे उच गुडवत्ता वाले होते हैं रोग मुक्त होते हैं
01:00जिसका मतलब है खेत में उगने वाले आलू में जो रोग या वायरस का असर फसल कर पड़ता है लेकिन इन आलू में ऐसी कोई बीमारी नहीं होती यह बीमारी फ्री होते हैं यह हेल्दी पौदे होते हैं जिसकी वज़य से भीज अच्छी क्वालिटी का बनता है और प्रो�
01:30जी लेते हैं तो उनके पास ज्यादा विकल्प नहीं होते लेकिन विश्व विध्याल है बीस प्रजातियों के बीच तैयार कर रहा है जिसमें किसानों के उद्देश के अंसार वालू उगाए जा सकेंगे यानि फ्रेंच प्राइज के लिए प्री ओम चिप्स के लिए शि
02:00तो इसमें न्यूट्रियंट्स मिस्ट के फ्रू फॉगिंग के माध्यम से दिया जाता है तो इस टेक्निक की खासियत यह है कि इसमें जो आलू के बीच बनते हैं वो उच्च गुडवत्ता वाले होते हैं रोग मुक्त होते हैं सबसे बड़ी परिशानी इसमें वाइरस की �
02:30किसानों के लिए जैसे हम लोग इसको दो साल तक फिल्ड में मल्टिप्लाई करेंगे एक साल नेट हाउस में लगाएंगे तब तक में इसका साइज नौर्मल आ जाएगा लेकिन क्योंकि बीच हाई क्वालिटी का है कोई बीमारी नहीं है तो इसलिए इससे जो उत्पन प्
03:00पास है तो हम लोग उस चीज में उनकी मदद कर पाएंगे तो इसका कम होता है क्योंकि आलू के बीच है तो इसका साइज बहुत कम होता है दो से तीन ग्राम का होता है
03:28तो लेकिन यह है कि हमने तिछली बार जैसे जी जीरो में एक किलो लगभग पैदा किया था दो साल पहले छोटा सा हमारा डेमोंस्ट्रेशन यूनिट था तो उसमें तो एक किलो से हमें 400 किलो ग्राम या कहें कि चार कुंटलाब का नॉर्मा लालू का साइज प्राप्ट ह�
03:58यूनिट में था एक किलो ही था तो उसमें से चार कुंटल है तो अब उसमें से 25 तक हम लोग उम्मीद कर रहे हैं 25-30 कुंटल तक हमको इस बार मिल जाएगा तो हम कुछ जगह पे उसका अफल्डी वगरा लगा देंगे बाकि आसके अगर हम दो साल बाद की बाद करें कि त
04:28यहां पर पोशक सत्तू को यहां पर टैंक बने हुए हैं दोच उसमें घूलना होता है और उसका इसी ऐलक्टिक कंटिक्टिविटी जिसको कहते हैं हम लोग मेंटेन करते हैं कि किस मात्रा में उसको देना है और यहां टैंक के नीचे बड़े-बड़े पाइप लगे हुए
04:58क्रशी विग्ञानी सुसनतिवारी कहती हैं कि हम किसानों को बीज उपलब्ध कराने वाले हैं क्योंकि पुरानी खेप तैयार है हालनकि यह सीमित है लेकिन अब से दो साल बाद हमारे पास बहुतायात में अलग-अलग वेराइटी के बीज उपलब्ध होंगे और यह किसान
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