00:00Chapter Rise Above Desires and Fears
00:03कृष्ण कहते हैं कि जो व्यक्ति इच्छाओं और क्रोध से मुक्थ हो जाता है, वह सच्चा संतोश और खुशी प्राप्त करता है.
00:14यह निरलिप्तता हमें आत्मसाक्षात्कार की ओर ले जाती है.
00:19संस्कृत श्लोक
00:20अभितो ब्रह्म निर्वान वर्थते विदितात्मना
00:27अनुवात
00:29जिनके मन इच्छाओं और क्रोध से मुक्थ हो चुके हैं और जो आत्म ज्यानी हैं, उनके चारों और ब्रह्म निर्वान अर्थात परम शान्ती सदा रहती है.
00:41व्याख्या
00:42क्रिश्न अर्जुन को बताते हैं कि जो व्यक्ति इच्छाओं और क्रोध से मुक्थ होकर आत्म साक्षाकार प्राप्थ कर लेता है, उसके चारों और ब्रह्मा निर्वान यानि शाश्वत शान्ती का सामराज्य होता है.
00:57कंक्लूजन अर्जुनास वेकनि
00:59अध्याए दो के अंत में प्रिश्न के मार्ग गर्शन से अर्जुन को एक नया द्रिष्टिकों प्राप्थ होता है.
01:07वह अब समझता है कि अपने कर्तव्य को निभाने आत्म सन्यम और ज्यान के पत पर चलने में ही सच्चा बल और शान्ती है.
01:15संकर्षन योग का यही सार है ज्यान और विबेग का मार्ग अंतिम शलोग एशा ते भी हिता सांखे बुद्धिर योगे क्विमा श्रेणू
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