00:00क्रिश्न अर्जुन से कहते हैं कि हृदय की इस दुर्बलता को छोड़ कर अपने वास्तविक योध्धा स्वरूप को पहचानू
00:07उसे याद दिलाते हैं कि वह एक योध्धा है और उसका कर्तव्य धर्म की रक्षा करना है
00:14अर्जुन के प्रिजनों के प्रती भाय को दूर करने के लिए प्रिश्न आत्मा के अमर स्वरूप का ज्यान देते हैं
00:27वे बताते हैं कि आत्मा अमर है और इसे कोई नश्ट नहीं कर सकता
00:32संस्कृत श्लोग
00:34वासांसी जीर्नानी यथा विहाय नवानी ग्रेनाती नरोकराणी
00:39तथा शरीरानी विहाय जीर्नान यानी सन्याती नवानी देही
00:44अनुवाद
00:46जैसे मनुष्य पुराने बस्त्रों को त्याग कर नए बस्त्र धारन करता है
00:51वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीर को त्याग कर नए शरीर को धारण करता है
00:56व्याख्या
00:58भगवान आत्मा की तुलना एक व्यक्ति के वस्त्र बदलने से करते हैं
01:04जैसे हम पुराने कपडे छोड़ कर नए कपडे पहनते हैं
01:09वैसे ही आत्मा भी पुराने शरीर को त्याग कर नए शरीर में प्रवेश करती है।
01:15यह ग्रिश्टान्थ हमें अपनी शारिरिक सनलगनता से उपर उठने की प्रेणा देता है।
01:22चैप्टर परफॉर्म यॉर ड्यूटी विदाउट अट्टैच्मेंट।
01:25इसके बाद कृष्ण हमें अपनी शारिए।
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