00:00पिछले अध्याय में हमने अर्जुन को युद्ध भूमी में निराशा और असमंजस में डूबा हुआ देखा
00:24अध्याय दो में भगवान कृष्ण अर्जुन के मार्ग दर्शक बनते हैं और उसे ज्ञान कर्तव्य और आत्म साक्षातकार का मार्ग दिखाते हैं
00:34यह शिक्षा हम सभी के लिए प्रेनादायट है कि कैसे हम जीवन की चुनोतियों का सामना करें अपने उद्देश को पहचाने और सच्ची शान्ती प्राप्त करें
00:46चैप्टर स्टांड आप एंड फाइट फॉर यॉर ड्यूटी भगवान कृष्ण अर्जुन की निराशा को दूर करने के लिए प्रेरक शब्दों से शुरुवात करते हैं वे उसे भय और दुहक छोड़कर अपने कर्तव्य की याद दिलाते हैं
01:02संस्कृत श्लोक लैब्या मास्म गमह पार्थ नैतत्व वयुक पद्यते शुद्रन हृद्य दौर बल्य त्यक्त्वोतिष्ट परंतप अनुवात है पार्थ इस प्रकार की कायरता को प्राप्त मत हो यह तुझ में शोभा नहीं देती तुझ हृदय की दुरबलता को त्या
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