00:00अब तो पृष्ण पूरा हो गया लगन इसनान नहीं करने दिया है ये तो
00:05ठिपने ये बात प्रशाशन की नुक्ती होती है अन्ववी अधिकारियों की नुक्ती होती है
00:10उनको ब्याय के लिए धन दिया जाता है कोई अन्याय करता है
00:15उसके लिए पहले से कानून विद्धमान है अब ये मुक्ते सुरा नंद जी की बात कर रहा है
00:20रहे होना आप उन्हीं की बात कर रहे होना तो वो संक्राचार जी के सस्थ हैं और
00:25स्रंगेरी के संक्राचार जी ने उनका अभिशेक किया है और हमने भी अभिशेक किया है
00:30तो हो गया ना आप क्या चाहिए क्या प्रमान चाहिए
00:35प्रमान आप तो इसारी आज वहा गई भी थे और वापिस दोड़ना पड़ा हो
00:38अब तो वापिस
00:40वापिस लॉट गए ना अब तो वापिस ने पूरा हो गया लेकिन इसना
00:45नहीं करने दिया है यह तो ठिपने यह बात गंगाश ना
00:50करने से किसी को नहीं रोका जा सकता यह प्रसाथन का काम नहीं है
00:55प्रसाथन की नुक्ती गंगाश इसना कराने के लिए हुए जितनी भी प्रसाथन का
01:00जाए जाए जब आप ये कहते हो कि करुणों लोग गए वहाँ इसनान करने ये कहते हैं कि नहीं
01:05कहते हैं कि नहीं तो महराज के साथ कितने लोग थे सो तो करोड़ों में सो शाम
01:10नहीं कर सकते थे क्या दवस्था बनाने के लिए प्रशाशन
01:15होता है शाशन प्रशाशन वहाँ जम्रशाशन
01:20दारी पूरवक प्रशाशन की निक्ति होती है अनभवी
01:25अधिकारियों की निक्ति होती है उनको ब्याय के लिए धन दिया जाता है
01:30दन सामगरी दी जाती है ताकि सादू संतों को इसना नार्थियों को
01:35गंगागी जिनके प्रथी वक्ति है उन सब को वहाँ शुविधा प्राप्त हो शुविधा में के
01:40क्या चाहिए कोई यहां रोटी कपड़ा मकान तो मांगता नहीं है के बलेगे
01:45जाकर के त्रवेणी में डुक्ति लगाना है और शहर से बाहर नकलना है बस इतनी ही सुविधा चाहिए
01:50तो इसकी जुम्मेदारी उनकी होती है अगर
01:55आचारी ये संक्राचारी अखाड़े वहां इसना नहीं कर पाएंगे तो माग में
02:00माग मेला का महत्तु ही क्या रह जाएगा गंगा तो गंगा था है
02:05गंगो त्रीशे गंगा सागर तक जाती हैं कहीं भी नहा लेंगे किसी भी घाट
02:10में इसनान करने में पुन्य जनक्ता प्राप्त है लेकिन त्रवेणी में
02:15किसनान करने का विशेश महत्त तो है ना उसका सास्त्रों में बरणन है
02:20इसलिए हम लोग सास्त्रों की आग्या का पालन करने वाले हैं
02:25प्रिशासन का काम है कि प्रजा के हित में उन्हें कारी करना चाहिए
02:30यूजी सी को लेकर ही बड़ा दरूर है यूजी सी में तमाम सास्त्रों की लोग सड़कों पड़ा रहे हैं
02:35कोई अन्याय करता है उसके लिए पहले से कानून
02:40विद्धमान है अलग से कानून बनाने की क्या वसकता है
02:45देश और बढ़ेगा आपस में रागत देश बढ़ेगा जगड़े बढ़ेंगे
02:50तो इस कानून को लाने की आवसकता ही नहीं थी
02:52पहले से ही कानून बिद्धमान जो भी अपरार आदेश
02:55करता है आपके गौलियर में अपराधी के लिए अलग कानून है क्या
03:00अब बताइए गौलियर में किसी अपराधी के लिए के ब्रामण अपराधी
03:05जिसके लिए कानून अलग है चत्री अपराधी जिसके लिए कानून अलग है वैश्य अपराधी
03:10अपराधी है तो कानून अलग है इस्तरी है तो कानून अलग है पुरुष है तो कानून अलग है
03:15बेटा है तो कानून अपराधी तो अपराधी ही है
03:20चाहिए वो किसी भी जाती का हो जो अपराध करे उसको दंड दीजिए अलग है
03:25से जाती के आधार पर कानून बनाने की बाक्तियों कर रहे हैं आप क्या कारण है
03:30जगड़ा कराने की बात है ना आपस में
03:35पर जगड़ा को जारे को जाती के लिए जित्विए ना इसे शुड़ा को जाती की जाती की जड़ा है
03:40संक्राचार जी शिताब में जलब की हमने इस तरह से जना आप किसी की जक्ति कर टुपड़ी हमने
03:45करते हैं
03:46संक्राचार कुली के हम इससे तरह से लिए कि कावम इस थावा है
03:50संकराचार कौन है क्या है सुप्रीम कोर्ट को भी साम में लाना पड़ रहा है कि अब
03:55संकराचार कौन बनाता है सरकार
04:00बनाती है क्या सरकार को अधिकार है संकराचारिकन बनाने का
04:05अगाड़े का अचारी बनाने का सरकार को अधिकार है
04:10किसी भी अखाड़े का आचारी महामंडलेस्वर बनाने का सरकार को अधिकार है क्या आप
04:15परशाथन को अधिकार है क्या जो संकराचार बनाने का अधिकार उन्हें प्राप्त होगा
04:20शंकराचारी का सची ही शंकराचारी होगा एक दूसरा दूसरा दूसरा अधिकार बनाने का अधिकार है
04:25दूसरे शंकराचारी उसका समर्थन कर दें तो और श्रण में सुगंध हो जाएगी
04:30यह तो उत्राधिकार आता है ना पिता की संपत्ती पुत्र को स्वाभाविक रूप
04:35से प्राप्त होती है जीवे तयो मुक्ति पदे सदाय भाग इसको
04:40इसे दाय भाग कहते हैं ठीक है ना इसी तरह से जो शंकराचारी है
04:45जो शंकराचार जी थे जगत गुरु शंकराचारी जो यहां आते थे हमारे
04:50गुरुदेव भगवान थे पीठद्वयाध हीश्वर उनके दो ही दंदी सन्यासी सिस्थ
04:55आते हैं शुष्ची तो उनके हजार हो थे गरस्तास्रम वाले लाख हो थे बर्मचारी ओर्यवेश्व
05:00सेक्ड़ों हैं उनके लेकिन सन्यासी सिस्स दो ही थे जिनको उन्होंने गंड दिया
05:05तो दूसरा उत्रा अधिकार कहीं जाहीं नहीं सकता तो एक तो वो इसलिए अधिकार
05:10कारी हैं कि संक्राचार जी के सिस्से हैं स्वामी अभी मुक्तिफरा नंद जी की बात कर रहे हो ना
05:15उन्हीं की बात कर रहे हो ना तो वो संक्राचार जी के सिस्से हैं और स्रिंग
05:20संगेरी के संक्राचार जी ने उनका अभिशेक किया है और हमने भी अभिशेक किया है तो होगे
05:25क्या ना आप क्या चाहिए क्या प्रमान चाहिए विजय सिंग्ग
05:30करे रहे हैं कि देसे माउल खराव रहा है यह हम यह सवराजने तक बात हम नहीं करते बस हो गया
05:35कि रहे हैं यह हम इनका चाहिए आप यहिए
05:40झाल झाल
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