00:00आज यह वो शंकराचार्यावी मुक्तेश्वर जी वो तो पालकी से उतर कर सनान करने को तयार नहीं और उनके जो अन्युआई है जिनको आमीन जो प्रशासन को 15-20 मिर तक उनको समझा रही थी कि आप नीचे उतर एक नियम है नियम सबको एक समान होना चाहिए राजाओ या �
00:30स्ट्रीट के अंदर तो आपको कहा है कि इस बार पालकी नहीं को लास्टाइम विसी मौनी अमावासे के समय काफी लोग मर गए थे और यह होता है विकोज रथे होती है महामंडिले शोरों की रथ होती है पालकीया होते है उससे क्या होता है सब तीतर भितर हो जाते है कोई �
01:00हम गंपती के जंब का उट्शा करते हैं बसंद पंचमी हम माता सरस्वती के जन्म कउठसा करते हैं और इसमें गुप नवरात्र जो मैं कर रही थी इसले मैं मौनियमावासे के वक्त उखाने कि लेकिन आपको स्नान का इंपोर्टेंश होना है अमरेत अमरेत आइन शरीर के �
01:30लेकिन इतना भी नहीं कि आप अंदर को भूल जाओ और बाहर के शनान में आप बीजी हो जाओगे।
01:36यह इस्नान का मतलब हो नी होता है। अपकी शरीर के दोशों को दूर करता है अपकी अंतर आतमा का नहीं उसे ध्यान धार्णा समाधी द्वारा ही शुद्ध किया जासकता है।
01:46तो यह ब्रह्मी मत रहना कि अगर मैं इस वस्त्रों को उतार देती हूँ
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