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क्या आप जानते हैं कि भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व यानी गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर कभी कोई ऐसा मुख्य अतिथि (Chief Guest) भी आया था, जिसका नाम सुनकर आज की पीढ़ी हैरान रह जाएगी? आज जब हम अपना 77वां गणतंत्र दिवस (77th Republic Day) मना रहे हैं, तब इतिहास के पन्नों से निकलकर आया यह सच हर किसी को चौंका देता है।
क्या आप जानते हैं कि भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व यानी गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर कभी कोई ऐसा मुख्य अतिथि (Chief Guest) भी आया था, जिसका नाम सुनकर आज की पीढ़ी हैरान रह जाएगी? आज जब हम अपना 77वां गणतंत्र दिवस (77th Republic Day) मना रहे हैं, तब इतिहास के पन्नों से निकलकर आया यह सच हर किसी को चौंका देता है।

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00:00क्या भारत के सबसे बड़े राष्ट्रे पर्व यानि की गणतंत्र दिवस पर कोई एक ऐसा मुख्याती थी आ सकता है जिसका नाम सुनकर आज की पीड़ी के माथे पर बल बढ़ जाए
00:20आज जब हम अपना सत्तरवां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं और सरहत पर तनाव की खबरें रूस का हिस्सा है तब इतिहास के पन्नों से निकल कर आया एक ऐसा सच जिसने सभी को हैरान कर दिया
00:32ये सच साल 1955 का है जब भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़वारी की कड़वाहट और कश्मीर का विवाद अपने शुरुवाती और सबसे समवेदन शीम दौर में था
00:41इसके बावचूद नई दिल्ली के राजपत पर आयोजेत भावे परेड में पाकिस्तान के ततकाली इंदवर्न जनरल मलिक गुलाम मुहमद मुख्या थिती के रूप में मौजूद रहे
00:51यह वाक्या आज के दौर में ना केवल अकल्पनी अलगता है बलकि दोनों देशों के ऊटनीती की दिहास में एक ऐसी पहेली है जिसे समझना बेहत दल्चस्प है
01:01वीडियो में बात करेंगे इसी पहेली पर बात करेंगे उस चीफ केस्ट पर जो की एक पाकिस्तानी नागरिक था पाकिस्तानी अधिकारी था
01:10मीडिय रिपूर्ट्स के मुताबिक साल 1955 का वो समय भारत के लिए अपनी लोगतांत्रिक जड़ों को सीचने का काल था
01:16विभाजन को हुए अभी मुश्कल से 7 से 8 साल पीते थे और दोनों देशों के रिष्टों में जबरदस्त खिचाफ था
01:23इसके बावजूद तक कालिन भारत सरकार ने एक सासी फैसला लिया और पाकिस्तान के सर्वोच्च समय धानिक पद अधिकारी को आमंधृत किया
01:31अब सहीं उग देखे
01:321955 ही वो साल था जब पहली बार गंतंद रिवस की परीड का आयोजन स्थाई रूप से राशपत पर शुरू किया गया
01:39जिसे आज हम कर्तव विपत के नाम से जानते हैं लेकिन यहां पर दिल्चस्प मोड था और दिल्चस्प इंसान था वो पाकिस्तानी अधिकारी जिसके बारे में सोचना भी आज भारत की लोग कत्राएंगे भारत की लोग कलपना नहीं कर पाएंगे
01:54अब 1955 की उस परेड में पाकिस्तानी गवर्नर जनरल का शामिल होना दुनिया को इस संदीश देनी की कोशिश थी कि भारत अपने पड़ासियों के साथ शांती और सहस्तित्व की रहा पर चलना चाहता है
02:05मलिक गुलाम मुहम्मद का व्यक्तित्व और उनका इतिहास भारत से इतना गहरा जोड़ा था कि उन्हें विदेशी कहना भी तकनी की तोर पर सही नहीं लगता
02:14उन्होंने अपनी शिक्षा अलेगर्ड मुस्लिम विश्विद्याले से कूरी की और ब्रटिश काल के दौरान वे भारती रेलवे लेखा सेवा में एक प्रतिष्टित पद पर कायना थे
02:22उन्होंने हाइदरबाद निजाम के विद्व सल्हकार के रूप में लंबे वक्त तक काम किया यानि कि जिस राजपत पर वे सलामी ले रहे थे उस देश की विवस्थां और मिट्टी को वे बख्भू भी जानते थे
02:33हलाकि पाकिस्तान जाने के बाद उन्होंने वहां की राजनीदी में जो भूमी का निभाई वो काफी विवाधित रही
02:39पाकिस्तान के पहले विद्मंत्री के रूप में करियर शुरू करने वाले मलिक उलाम मुहमद
02:431951 में गवर्नर जनरल बने उनका कारिकाल पाकिस्तान के लूप तंत्र के लिए किसी बुरे सपने जैसा सावित होता नजर आया
02:51उन्होंने 1903 में प्रधान मंत्री ख्वाजा निजाम उद्दीन की चुनी हुई सर्कार को औस समविधानिक तरीके से बरखास कर दिया
02:58और 1954 में पाकिस्तान के समविधान को ही भंग कर दिया
03:02उनके इनफैसलों को पाकिस्तान में सैन्यताना शाही की नीव भी माना गया
03:06क्योंकि उन्हें इस दोरान जनरल आयूप खान का पूरा समर्थन प्राप्त हुआ
03:10ये एक विरूधा भास ही था कि भारत जिस दिन अपनी लोकतंत्र और समविधान का जश्न मना रहा था
03:16उसके सामने मुख्य अतीति के रूप में एक ऐसा व्यक्ति बैठा था
03:20जिसने अपने देश में लोकतंत्र की जड़ों पर कड़ा प्रहार किया था
03:24आज के बदलते हुए दोर में जब हम 77 वा गणतंत्र दिवस पना रहे हैं उसकी चमक देख रहे हैं
03:30तो 1955 की ये घटना हमें कूट नीती के एक अलग युग की याद दिलाती है
03:35वो एक ऐसा दौर था जब विवादों की बावजूद समवाद के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए थे
03:40हाला कि आज की सुरक्षा चुनोतियों और सीमा पार्ट से जारी तनाव के बीच ऐसी किसी भी घटना का दोहराव संभव तो बिलकुल नहीं है
03:48लेकिन इतिहास का ये चौकाने वाला अध्याय हमें ये जरूर बताता है
03:52कि वक्त के साथ राश्तों के संबंधों और प्रात्मिक काउं में कितनी तबदीली आती है
03:57राश्पत पर पाकिस्तानी महमान की वो मौजूद की आज एक महज धुंदली याद है
04:01और इतिहास का एक ऐसा सवाल बनकर रहे गई
04:04जिसका जवाब आज के बदलते वैश्विक का समीकर्णों में ढूंदना नामकिन है
04:09क्या आपको इस चीफ गेस्ट के बारे में पहले पता था
04:11क्या पाकिस्तानी चीफ गेस्ट को सुनकर आपने भी हैरानी महसूस की
04:16अपनी राय कॉमेंट बॉक्स में दीजेगा मेरा नाम है मुकुंदा पने रहे
04:20वन इंडिया के साथ शुक्रिया
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