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00:00:00हम बार बार किसी और और से पराधीन होए हैं
00:00:04और इस देश को क्या बदलना चाहिए ताकि हम फिर से पराधीन ना हो
00:00:10क्योंकि लोगों को लगता है कि अब हम स्वतंत्र हैं और हम हमेशा स्वतंत्र ही रहेंगे
00:00:15अगर धर्म ऐसा हो गया हो जो बताता हो कि आपके साथ जो कुछ हो रहा है वो किसी आस्मानी ईश्वर ने आपके लिए पहले ही तैकर रखा है
00:00:22तो आप कोई भी विरोध, कोई भी आंदोलन, कोई भी क्रांति करोगे कैसे
00:00:27हमारा काम है बस सर जुखा करके ऐसे खड़े हो जाना कहना पर जो हो रहा है वो तो किसी और ने हमारे भागे में लिख रखा है
00:00:34पर न जाने कैसी खुराफात हुई, न जाने किसका शातिर दिमाग था
00:00:39कि भारत के धर्म से जिग्यासा को बिल्कुल हटा दिया गया, कहा गया जिग्यासा नहीं करना, भारत जानने से बिल्कुल हट गया, बिल्कुल, और बहुत सारे वो कारण जिन्होंने हमको गुलाम बनवाया, उन कारणों को आज सक्रिय रूप से प्रोचसाहित किया जा रहा ह
00:01:09मुझे भी लगा हुआ है तुमने क्यों उस घाव को जाकर के खुरच दिया
00:01:13अब खून तो बहेगा
00:01:15मैं भी जब इतना सा था तभी से मुझे इस बात पर हैरत है और दुख है गहरा
00:01:20कि जिस देश के बाद गीता है उसको गुलाम बनना क्यों पड़ा
00:01:24धीरे धीरे मैं बड़ा हुआ मुझे पता चला इस देश के बाद गीता है ही नहीं
00:01:27यहां कोई नहीं समझता गीता और और ज्यादा रोंग्टे खड़े कर देने लिए बात यह थी कि ज्यादा तर लोग गीता समझना भी नहीं चाहते
00:01:54अच्छी बताई यह थैसे इन इंट्रक्टिव सेश्टने तो अब हम प्रश्न ले सकते हैं बैं स्टार्ट फॉर्टाय विश्चन
00:02:08लिग नमस्टे चारे जी आटारे जी मेरा प्रश्णा जी ए है कि भारत का इतेहास बहुत ही लंबा और बहुत ही संचियर रहा है
00:02:19पर हम बार बार किसी और फॉर्स से पराधीन होए हैं, जाकि वो तुर्क हो या मंगोल हो ब्रिटिश हो और वो चलता ही रहा है, और हम हमेशा उनके सामने जुग जाते हैं, तो हमें, जैसे हम अभी युवा पेड़ी हैं, हमें क्या बदलना चाहिए और इस देश को क्या बद
00:02:49क्या ये निश्चित है और ताकि ये फिर से ना हो और हम असली रूप में स्वतंत्र रहें, उसे उसके लिए हमें क्या करना चाहिए?
00:02:57शुरुआत में ही इतना भारी सवाल, मुझे रहागा शुरुआत हो रही है, तो कुछ खेर खेर यत पुछी जाएगी, कुछ हलका फुलका मामला रहेगा, लेकिन अच्छा है, ठीक है, हम देर चुछु शुरू कर रहे हैं, सो लिट्स स्टार्ट रनिंग
00:03:27ये बहुत बार बहुत बार चर्चा में रहा मुझता है, हर आदमी इस पर विचार करता है, इस चीज़ ने सब को परिशान किया है
00:03:53और कोई नहीं कह सकता कि ये मुद्दा उसके लिए प्रासंगिक नहीं है, रेलेवेंट नहीं है, उसके लिए महत्तो का नहीं है
00:04:06और जब हम बहुत छोटे होते हैं, रक्षा छे, साथ, तभी से ये मुद्दा, हमारी टेक्स्ट बुक्स, हमारे पाठे क्रम में भी हमारे सामने लाही दिया जाता है, है न?
00:04:30इन्वेशन ओफ इंडिया, कॉलोनाइजेशन ओफ इंडिया, फिर हम बड़े होते जाते हैं, कहां गई, इनकी उमरे तक पहुँचते हैं, फिर और, हम प्राड हो जाते हैं, चालिस पचास साल के, फिर हम बुज़र्ग हो जाते हैं, लेकिन ये मुद्दा, हमेशा, रेले�
00:05:00उसके घाव बहुत गहरे हैं, अभी तक पूरी तरह भरे नहीं हैं, जहां घाव लग भी रहा है, कि भरे हैं, उसके निशान, उसके सकार्स, मिट नहीं रहे हैं, और आपने तो दो चार लोगों का नाम लिया, सूची बहुत लंबी है, अफगान, अरब, तुर्क, मंगोल �
00:05:30फिर यूरोप की तरफ निकलो, तो ब्रिटिश तो बाद में आए हैं, पुर्तगाली, डच, फ्रेंच, ब्रिटिश, फिर और एकदम हाल के समय में आओ, तो जापानी भी लगबग घुसी आए थे,
00:05:58है न, और जर्मनी भी घुसी आता अगर हिटलर जीत गया होता तो, ब्रिटेन अगर हारता तो ब्रिटेन की सारी जो कॉलोनीज थी वो जर्मनी के हाथ लगनी थी, तो बड़ी लंबी सूची, ऐसा लगता है जिसके भी हाथ में ताकत रही है, सत्ता रही है, चाहे वो एशि
00:06:28चड़ बैठा है
00:06:29बुरा लगता है
00:06:31है ना
00:06:32आत्म सम्मान को चोट लगती है
00:06:35मैं भी जब
00:06:39आपकी उम्र का था और
00:06:41कम उम्र का था
00:06:43बहुत सोचा करता था इस मुद्दे पर
00:06:45कि यह हुआ
00:06:47क्यों हुआ
00:06:47एक तरफ तो
00:06:50मैं देखता हूँ कि
00:06:52मारे इतिहास में कुछ बहुत
00:06:54गगन चुम्बी मारते हैं
00:06:56आकाश जैसी हुचाई है
00:06:57और दूसरी और
00:07:00इतिहास के जो
00:07:02तत्थे हैं
00:07:03कोई औरी कहानी बयान कर रहे है
00:07:06इतनी लंबी परादहिंता
00:07:08लगबग हजार सालों की
00:07:09यह हुआ कैसे होगा
00:07:11बैठ जो बैठ जो
00:07:14हुआ कैसे होगा
00:07:19तो मेरे लिए यह सवाल
00:07:22बहुत छोटी उमर से
00:07:23छटी साथवी में था
00:07:25यह तभी से
00:07:25यह
00:07:27बड़ा केंद्री हो गया था
00:07:31घर में
00:07:34किताबें थी कुछ पढ़ता रहता था
00:07:36तो उनमें भी
00:07:38बार-बार यह मुद्दा आता था
00:07:40भारत का इतिहास, भारत का वरतमान
00:07:42फिर UPSC आ गया
00:07:47वहां भी
00:07:50जो जनरल स्टेडीज का जो पेपर होता है
00:07:53उसमें हिस्ट्री
00:07:55इंडियन हिस्ट्री
00:07:57एक प्रमुख भाग होता है
00:08:00तो वहां फिर से वो सब पढ़ा
00:08:04अच्छा अब UPSC का नाम आया है
00:08:07तो जो सवाल पूछा है न
00:08:09उसके लिए मैंने एक निमोनिक्स बनाई थी
00:08:14UPSC के दिनों में अपने
00:08:15निमोनिक्स आप जानते हैं
00:08:18किसी लंबी चौड़ी चीज़ को याद रखने का
00:08:21मेमोरी में, समर्तिय में बठाने का
00:08:24आप एक सूत्र फॉर्मूला बना लेते हैं
00:08:28तो वहीं से करूँ
00:08:32बताओं
00:08:33वो बात पुरानी हो गई
00:08:34पच्छी साल पुरानी हो गई
00:08:37पर
00:08:39सूत्र आज भी
00:08:42उन लिखनी यह है
00:08:44उसी का सारा लेकर आगे बढ़ते हैं
00:08:47तो देखते हैं उसमें कोई जोड़ना होगे तो जोड़ देंगे
00:08:49तब मैंने बनाया था
00:08:52इफ कट
00:08:53रिवार्न
00:08:54क्या था सूत्र
00:08:57इफ कट
00:08:59रिवार्न, नेमोनिक्स है यह
00:09:01यह कोई
00:09:02महावा क्यों गयरा नहीं है
00:09:04कुछ याद रखने के लिए बनाया था
00:09:06इफ कट
00:09:08रिवार्न
00:09:10इसमें जितने
00:09:12भी यह लेटर्स हैं
00:09:16वो किसी
00:09:18महत्वपूर्ण शब्द
00:09:20को याद दिलाते हैं
00:09:24इफ कट
00:09:25तो
00:09:26आई
00:09:28से मेरा आशे होता था
00:09:30इन फाइटिंग
00:09:31इन फाइटिंग
00:09:36और हम
00:09:38यह जितने शब्दों की
00:09:41माने जितने
00:09:42पराभव पराजय के कारणों की
00:09:45बात करते जाएंगे
00:09:47अभी आपके उपर है
00:09:49सवाल आपका था
00:09:50कि आप देखो कि कहीं आज भी वो कारण मौजूद तो नहीं है
00:09:53तो पहला
00:09:57इफ कट में क्या आता है सबसे पहले
00:09:59आए
00:10:00इन फाइटिंग
00:10:02इन फाइटिंग ऐसे कि
00:10:06ब्रिटिश तो
00:10:08भारत आए थे
00:10:11वो व्यापारी ही थे
00:10:12जहांगीर के दरवार में गए थे
00:10:14सलाम ठोका था और कहा था
00:10:16लाइसेंस दे दो व्यापार का
00:10:18आपके हाँ पर ये कपड़े
00:10:20और ये मसाले और जो हैं
00:10:21ये बढ़िया होते हैं और यूरोप के
00:10:23बाजारों में बेचेंगे तो हमें मुनाफ़ा होगा
00:10:26आपका माल खरीदेंगे उधर
00:10:28बेचेंगे और उधर से हम
00:10:29कुछ सामान आपके लिए ले आएंगे
00:10:32हमारी इंडस्ट्री और आगे निकल चुकी है
00:10:34तो मैनुफैक्चरड गुड्स हैं कुछ हो ले आएंगे
00:10:36नहीं तो फिर हम आपको पैसा दे देंगे
00:10:39तो व्यापार की बात थी
00:10:41जांगीर और और को जादा
00:10:43उसमें कोई दाउं पेच दिखाई नहीं दिया
00:10:45उन्होंने का ठीक है वही कर लो ट्रेडिंग के लिए आए होगा
00:10:47तो उन्होंने अपनी
00:10:48फैक्टरीज बनाई स्टोरेज के लिए
00:10:51वेर हाउसेज बनाए और ये सब उन्होंने
00:10:53सूरत में बनाया
00:10:55बंबाई में बनाया फिर उधर मदरास
00:10:57में बनाया कलकत्ता में बनाया तो इस तरह से उनकी शुरुआत हुई थी
00:11:02तो ब्रिटेन तो आया भी नहीं था भारत वहांगी तो एक कंपनी आयी थी इस्ट इंडिया
00:11:09कंपनी ब्रिटेन तो आया भी नहीं था ब्रिटेन नहीं आया था तो उनकी
00:11:13कोई फॉज भी नहीं आयी थी तो ब्रिटिश फॉज यहां नहीं आयी थी
00:11:18एक कंपनी आयी थी और कंपनी के पास जो अपने पेड गार्ड्स बोल लीजिये
00:11:26या soldiers बोल लीजिए
00:11:28जितने हो सकते हैं उते नहीं थे
00:11:30क्योंकि company का काम
00:11:32युद्ध लड़ना तो होता नहीं न
00:11:34company का काम क्या है
00:11:36trade करना
00:11:37trade करना
00:11:39वो एक trading company थी
00:11:41अब एक trading company
00:11:44forge क्यों रखेगी बहुत बड़ी
00:11:46है न
00:11:48जाहिर सी बात है trading company
00:11:50forge तो रखेगी नहीं
00:11:51और इतना बड़ा देश भारत वो
00:11:53उनके पास अपनी नेवल
00:11:55शक्ती थी तो यहां पहुँच गए
00:11:57तो बहुत सारी कोई
00:11:59forge लेके तो नहीं पहुँच सकते
00:12:01उतनी दूर से आ रहे हैं
00:12:04कितने से निकले आ लेंगे वो भी
00:12:05शुरू में
00:12:06तो यहां पर वो बस कैसे
00:12:09गए बस ऐसे गए कि जब भारत में
00:12:11वो पहुचे हैं तो यहां दरारें पहले ही
00:12:13पड़ी हुई थी
00:12:14दरारें, क्रैक्स
00:12:17यहां पहले ही मौजूद थे
00:12:18उन्होंने बस
00:12:21उन क्रैक्स को क्या किया
00:12:23और चोड़ा कर दिया
00:12:26और चोड़ा
00:12:27जिसको बोलते है
00:12:33driving a wedge
00:12:34wedge कैसा होता है
00:12:36तिकोने आकारगा होता है
00:12:38तो वो अगदम आगे से कैसा होता है
00:12:41narrow, pointed
00:12:43तो अगर एक क्रैक है तो उसमें wedge
00:12:45घुस जाएगा और फिर उस वाप हथोले से मारो
00:12:48तो वो और अंदर हुशता जाएगा
00:12:50और क्रैक क्या होता जाएगा
00:12:51चोड़ा होता जाएगा
00:12:53वो cracks
00:12:56British बना पाते इतनी उनकी हैसियत नहीं थी
00:12:59वो traders थे
00:13:00और यहां बड़ी बड़ी रियासतें थी
00:13:02ठीक है भारत बटा हुआ था
00:13:04लेकिन बटे होने के बावजूद
00:13:07जो यहां बड़े राज्य थे
00:13:09वो आकार में जनसंख्या में
00:13:12ब्रिटेन से बड़े थे
00:13:14और यहां पर आप सैनी कितने ला नहीं सकते
00:13:19इतनी जादा कोई स्वक्ट टेकनोलजी थी नहीं
00:13:21तो ब्रिटेन ने भारत को नहीं जीता
00:13:25भारत पहले ही कई टुकडों में बटा हुआ था
00:13:28और वो सब टुकड़े आपस में लड़ रहे थे
00:13:30उन टुकडों की पहले से जो लड़ाई चल रही थी
00:13:35ब्रिटेन ने उसका फायदा उठाया
00:13:36खास कर जो पोस्ट औरंगजेव एरा था उसमें
00:13:401708 में औरंगजेव की मौत होती है
00:13:44इसका मतलब जो पूरा उत्तरी और मध्य भारत था
00:13:47वो डिसिंटिग्रेट कर गया
00:13:49सेंट्रल पावर वहाँ पर मुगल ही थे
00:13:52और उसके बाद औरंगजेव के बाद जो शासक आए
00:13:55वो सब ऐसे ही थे
00:13:56को उनमें दमदिलासा नहीं था
00:13:58और दखन की तरफ मराठे प्रबल हो रहे थे
00:14:01तो कई टुकडों में बटा हुआ था भारत
00:14:03तो 1708 में औरंगजेव जाता है
00:14:051770 में प्लासी हो जाता है
00:14:07इन फाइटिंग
00:14:09यह सब आपस में लड़ रहे थे
00:14:11और इनको खबर भी नहीं हुई
00:14:13अंदाज भी नहीं लगा कि यह जो
00:14:15गोरे ट्रेडर्स आए हैं यह क्या कर सकते हैं
00:14:18बात आप समझ रहे हो
00:14:21और यह इन फाइटिंग बाहर
00:14:25से देखो तो ऐसा लगेगा
00:14:27कि सिर्फ इस्ट्रक्चरल है
00:14:29पर उस्ट्रक्चरल नहीं है
00:14:31वो इंटर्नल है उसपर आगे आएंगे
00:14:33वो बात यह नहीं थी कि आप
00:14:35बाहर से ही कुछ लोग लड़ रहे हैं
00:14:37बाहर से इसलिए लड़ रहे हैं क्योंकि भीतर से
00:14:39divided थे भीतर ही बटवारा था
00:14:41प्लासी की अभी मैंने बात करी
00:14:45प्लासी नहीं जीत सकते
00:14:47थे अगर
00:14:48सिराजुत दौला
00:14:50के जो
00:14:52सिपाही थे और सिनापती
00:14:55थे उनको
00:14:57मीर जाफर
00:14:59ने अंग्रेजों के
00:15:01हक में बेच न दिया होता
00:15:03तो
00:15:03इसी तरीगे से
00:15:07टीपू सुल्तान को
00:15:09नहीं हराया जा सकता था अगर अंग्रेजों को
00:15:11वहाँ पर
00:15:13स्थानी समर्थन नहीं मिलता
00:15:15तो एक
00:15:15लोकल कंफिडरेस ही बनी थी
00:15:18उसमें हैदराबाद शामिल था
00:15:21उसमें मराठे भी शामिल थे नहीं
00:15:22तो टीपू सुल्तान नहीं हार सकता था
00:15:24बात आ रही है समझवे
00:15:27तो
00:15:30अब ये कारण आज मौजूद है के नहीं मौजूद है
00:15:34ये आप देख लीजिए
00:15:35क्या
00:15:37हम कहते हैं कि हम एक नेशन है
00:15:41पर नेशन होने के लिए
00:15:42साजा मूले होना चाहिए
00:15:44shared values होनी चाहिए
00:15:46क्या हमारे मूले साजे हैं
00:15:49साजा मूले
00:15:51तो सच मुच एक ही हो सकता है
00:15:52जब देश में
00:15:55इतनी ज्यादा diversity हो
00:15:57तो जो common value है
00:15:59वो तो truth ही हो सकती है
00:16:00बाकी कोई भी value आप common करनी पाओगे
00:16:03भाशा अलग-अलग है
00:16:04कपड़ा अलग-अलग है
00:16:05धर्म मजभ अलग-अलग है
00:16:07ethnicity भी अलग-अलग है
00:16:11आप कश्मीर की और निकल जाएं
00:16:14या उत्तरपूर्व की और निकल जाएं
00:16:15आपको लोग
00:16:17शारिरिक दिश्टी से
00:16:19थोड़ा अलग-अलग किसम के दिखाई देंगे
00:16:21आप
00:16:24पंजाब की और निकल जाएं
00:16:26फिर आप तमिल नाडू की और निकल जाएं
00:16:28आपको लोग अलग-अलग तरह के दिखाई देंगे शारिरिक दिश्टी से
00:16:31खाना पीना अलग है
00:16:34पूजा पार्ट के
00:16:36तरीके भी अलग है
00:16:38काफी कुछ है जो अलग है
00:16:39तो इन फाइटिंग की सारी सामगरी तो मौजूद है आज भी
00:16:45जब सब को चला गए तो हम लड़ सकते हैं
00:16:49लड़ सकते न
00:16:50तो शेर्ड वैल्यू क्या हो सकती है जो हमें लड़ने से बचा के रखे
00:16:55क्या हो सकती है
00:16:57तो टृत ही हो सकती है क्योंकि वही एकलوتी
00:16:59human value है
00:17:09जिस हद तक हम दूसरी चीज़ों को अपनी जिंदगी में कीमत देते रहेंगे, मूले देते रहेंगे, उस हद तक वो सब दोहराने का खत्रा बना रहेगा जो हजार साल तक होता रहा हमारे साथ.
00:17:25पहले भी ये, जब राजे महराजे आपस में लड़ते थे, तो कोई वज़ा होती थी ना, वो वज़एं आज भी मौजूद हैं, जो पहला एंगलो मराठा युद्ध हुआ था, उसमें मराठे आपस में ज्यादा तीवरता के साथ और जोश के साथ लड़े थे, उतना जोश �
00:17:55बात समझ में आ रही है, वो कारण आज भी मौजूद है, वो आज भी मौजूद है कारण तो खत्रा भी आज भी मौजूद है, बात समझ में आ रही है, तो हमने कहा था, if cut, then reward, अब आते हैं F पर, F का मैंने अर्थ दिया था, fatalism, भाग्यवाद,
00:18:25किसी भी अनहोनी का विरोध आप तब करोगे न, जब पहले आपको भरोसा हो कि आप में शक्त है विरोध करने की, अगर धर्म ऐसा हो गया, जो बताता हो कि आपके साथ जो कुछ हो रहा है, वो आपके पिछले जन्मों के कर्मों का नतीजा है, और आपके साथ जो कुछ हो �
00:18:55कैसे कर लोगे बताओ,
00:18:57अभी हमने प्लासी की बात करी,
00:18:5917-57, उसके तुरंत बाद,
00:19:01प्लासी में अंग्रेजों ने बंगाल जीत लिया,
00:19:04और उसके तुरंत बाद,
00:19:051770 में,
00:19:08बंगाल में इतना बड़ा आकाल पड़ा,
00:19:11बंगाल से कौन कोन है, आपकोई हैं,
00:19:13कितने लोग मरे थे 17-70 में,
00:19:17कितने,
00:19:21एक करोड,
00:19:24और हम आज की डेड़ सो करोड की आबादी में से
00:19:27एक करोड के मरने की बात नहीं कर रहे हैं,
00:19:30हम उस समय के भारत की बात कर रहे हैं,
00:19:34भारत की आबादी तब थी 15-20 करोड,
00:19:36उसमें से बंगाल की अबादी कितकुल कितनी रही होगी
00:19:40और उसमें से एक करोड मर गए
00:19:43इतना बड़ा
00:19:46और तब तक ब्रिटिश सत्ता पूरी तरह स्थापित भी नहीं हुई थी भारत में
00:19:531757 में बस शुरुवात हुई थी
00:19:56उसके बाद वो तेजी से फैले थे बैटल ऑफ बक्सर और यह सब तमाम हुआ था
00:19:59अगलो मराथा वार्स हुए थे फिर
00:20:02लेकिन अभी अभी वक्त था
00:20:05अभी उन्हें उखाड़ा जा सकता था
00:20:08और इतिहासकारों ने बहुत सोचाए कि ऐसा कैसे हो गया
00:20:11कि एक करोड लोग अकाल से मर गया
00:20:13और उस अकाल के होने में कुछ ऐसा नहीं था
00:20:17बस कि प्राकृतिक शक्तियों का ही हाथ था
00:20:19कि बारिश नहीं हुई या कुछ और हो गया
00:20:22वो बहुत हद तक मानवकृत दुर्भिक्ष था
00:20:27वो man-made famine था
00:20:30लेकिन कोई क्रांती नहीं हुई
00:20:34किसी नहीं कहा कि ये हमारे साथ क्यों हो रहा है
00:20:37क्यों क्यों कि और्थोडॉक्सी का
00:20:41मने पुरातन पंथियों का भी गढ़ था बंगाल
00:20:45और यही वज़ा है कि जितने भी फिर
00:20:50reform movement से वो बंगाल में शुरू हुए
00:20:52बंगाल में शुरू हुए महराष्ट में शुरू हुए
00:20:54फिर आगे चलकर तमिलाडू में हुए केरल में हुए
00:20:57पर बंगाल में शुरू हुए उसकी एक वज़ा ये भी थी
00:21:01कि जो जो पूर्वी हिस्सा था भारत का
00:21:06पूरी उत्तरप्रदेश, बिहार, बंगाल
00:21:08ये सब सबसे ज्यादा कैसा था?
00:21:15परंपरावादी, रूढ़िवादी
00:21:16तो मर रहे हैं लोग तो मर रहे हैं उसको मान लिया गया कि ये तो
00:21:22दैव प्रकोप है
00:21:25और अगर कोई मरा है तो इसलिए मरा है क्योंकि वो पापी था
00:21:29कोई मरा है तो इसलिए मरा है क्योंकि वो पापी था
00:21:33तेरे साथ जो हो रहा है वो तेरे पाप धुल रहे है
00:21:36पात आ रही है समझ में
00:21:41डॉक्टरिन आफ लैप्स लेके आ गये थे ब्रिटिश
00:21:45वही जिसके खिलाब फिर जहासी के रानी खड़ी हुई थी
00:21:48बहुत सारे रजवाडों ने सर जुका कि उसको मान लिया
00:21:53उसमें एक वज़ा ये भी थी कि देखो अब जब हम संतान हीन हैं
00:21:58और इश्वर नहीं ये तै कर दिया जब इश्वर नहीं नाइंसाफी कर दी हमारे साथ के हमको संतान नहीं दी
00:22:02तो अब ब्रिटिश हमारा राज ये ले ले रहे हैं ये भी इश्वर की ही मनशा होगी
00:22:06ब्रिटिश हमारा राजिल ये ले रहे हैं तो इश्वर की मन्शा होगी
00:22:13हमारा काम है बस सर जुका करके ऐसे खड़े हो जाना कहना
00:22:18पस जो हो रहा है वो तो किसी और ने हमारे भागे में लिख रखा है
00:22:21क्या आज का भारत भी ऐसे ही है बहुत हद तक हम आज भी ऐसे ही है
00:22:26हम ऐसे नहीं होते हैं तो एस्ट्रॉलजी इतनी कैसे चमक रही होती
00:22:33कैसे यहाथ की रेखाई है यह होरोस्कोप है उन सब में यकीन करने का मतलब ही यह है
00:22:42कि तुम्हारी जिन्दगी को संचालित करने वाला कोई और है इसी को भागयवाद बोलते हैं फेटलिज्म
00:22:51तो वह बहुत बड़ा कारण जिससे भारत पराधीन हुआ वह कारण तो आज भी मौजूद ही नहीं है वह और फल फूल रहा है
00:22:59एस्ट्रो स्टार्टप्स को मिलियन्स में डॉलर्स में फंडिंग मिल रही है
00:23:05बात आ रही है समझ में
00:23:14इफ के बाद क्या आता है
00:23:17कट और सी माने वही कट बहुत पुराना कट है
00:23:25बहुत पुराना कट है
00:23:26भरने का नाम नहीं ले रहा है
00:23:28खून क्या उसमें मवाद भहरा है
00:23:30कसी माने कास्त
00:23:32यह घाव ठीक होने का सुखने का नाम ही नहीं ले रहा है
00:23:38हिंदुस्तान की चाती में घुसा हुआ यह घाव
00:23:43हमज़ रहे हैं आप तीसरी जो लड़ाई हुई है पानीपत की
00:23:53उसमें और मदद मिल सकती थी भारतिय ताकतों को
00:24:02मदद नहीं ली गई उसका एक कारण ये भी था कि हम
00:24:05दूसरी जाती वालों से मदद क्यों ले
00:24:08आप अगर पानीपत की तीसरी लड़ाई में भारतियों की
00:24:15मराठों की हार के कारण पढ़ेंगे तो एक कारण आपको
00:24:18ये भी दिखाई देगा वहाँ पर और ये तो खेर चलो
00:24:22मैदान वाला कारण हुआ है
00:24:24मैदान पर तो समाज के ही लोग उतरते हैं न ये समाज ही
00:24:34बुरे तरीके से भीतर से सदियों से जाती प्रथा मानने के कारण
00:24:42सड़ा हुआ था और कमजोर हो चुगा था
00:24:44जैसे कोई पेड़ खड़ा हो पर भीतर से उसको दीमक खा चुकी हो
00:24:48तो पेड़ दिखने में तो विशाल लग रहा है पर बाहर से कोई आता है
00:24:53वो थोड़ा सा भी धक्का देता है और पेड़ चर्मरा कर गिर जाता है
00:24:58जाती की दीमक लगी हुई थी हिंदुस्तान के समाज के व्रक्ष को
00:25:02जाती का अर्थ होता है तुम्हारी किस्मत
00:25:09तुम्हारे जन्म के समय ही तै हो गई निर्धारित हो गई सीमाएं
00:25:15बांध दी गई है तुम इससे आगे जा नहीं सकते
00:25:18जो जहां होने का अधिकारी नहीं है उसको वो जगह मिल जाएगी
00:25:24जिसको जिस काम में कोई रुचि नहीं है उसको वो काम करना पड़ेगा
00:25:30न मेधा के लिए कोई सम्मान है न प्रेम के लिए
00:25:35एक इंसान दो ही काम करता है न पूरे दिन क्या
00:25:43या तो काम नहीं तो जिसको आप होते हैं अब घर आए हो तो हमारी ये परसनल लाइफ शुरू हो रही है
00:25:50ठीक है न? दो ही तो काम होते हैं, ओफिस और घर यही तो होता है, जाजातर समय यही तो चलता है हमारा
00:25:58तो कास्ट का मतलब समझ यह क्या है? कास्ट का मतलब यह होता है उस समय से
00:26:04कि ओफिस, माने काम तुम वो करोगे जो तुम्हारा पहले से ही निर्धारत है
00:26:09लोहार के घर में पैदा हुए हो तो बेटा लोहाई पीटो गया तो आफिस पहले ही टाय हो गया
00:26:18अब घर आते हो घर में कौन उता है घर में पत्नी होती है या पती होता है विवाभी तो मुसी से करोगे जो तुम्हारी जात का ही है
00:26:26एंडोगेमी
00:26:28तो यहां भी तुम्हारे विवेक के लिए
00:26:30और प्रेम के लिए कोई स्थान नहीं है
00:26:32तो माने जी यह जो दो प्रमुख काम होते हैं
00:26:34जिसमें आदमी की जिन्दगी जाती है
00:26:36आजी विका
00:26:39हम
00:26:41और परिवार
00:26:43इन ही तो में तो होता है न
00:26:44प्रोफेशनल लाइफ परसनल लाइफ
00:26:46यह दोनों ही काम जात ने
00:26:48बिलकुल बांध दिये अब इनसान जीएगा
00:26:50कैसे पर जिया
00:26:52कैसे जिया बीतर से
00:26:54खोखला होकर जिया
00:26:55और जब आप ऐसे हो जाते हो
00:26:58तो आप में जीवन
00:27:00के लिए फिर कोई आग
00:27:02कोई उमंग शेश नहीं रहती
00:27:03फिर कोई आकर आपको अगर हरा रहा होता है
00:27:06तो आप कहते हो ठीक है
00:27:08हराई ले वैसे भी जिन्दगी में रखा गया है
00:27:10काम भी वो कर रहे है
00:27:12जो पसंद नहीं है
00:27:13और विवाह भी उससे कर रखा है जो पसंद नहीं है
00:27:16इस जिन्दगी में रखा ही क्या है तू हराई ले तू मुझे पराधीन कर दे कुछ भी कर दे
00:27:20बता क्या करना है तेरे भी आदेशों का पालन कर लूँगा क्योंकि अभी भी जैसे जी रहा हूँ
00:27:26तो किसी और के आदेशों का ही तो पालन कर रहा हूँ
00:27:28जब जीवन में आजादी है ही नहीं
00:27:31और किसी और की आदेशोगा पालन करके जीना है
00:27:34तो बताओ सरकार आप नए मालिक नए राजा बन कर आयो
00:27:37आपके आदेशोगा भी पालन कर लेंगे
00:27:39कट
00:27:41सी
00:27:43खतरनाक
00:27:44आरी बात समझ मैं है
00:27:50यह है आज भी या यह मिट गया
00:27:53है कि मिट गया है
00:27:55मुझे तो पता है नहीं पर आप लोगों ने तो करीबी होगी और
00:28:01मैटरिमूनियल्स और यह सब जो
00:28:03तो उसमें आजकल शादी का कॉलम होता है कि नहीं होता है
00:28:08या वेबसाइट पर आप अपना सब डालते हो
00:28:11तो कास्ट लगने की पूरी सामगरी आज भी मौजूद है
00:28:24कट लगने की
00:28:28पूरी सामगरी आज भी मौजूद है
00:28:30यू
00:28:37अंसाइंटिविक टेमपर
00:28:41साइन्स से कोई लेना देना नहीं क्योंकि विज्ञान कहता है जानों और भारत में धर्म का अर्थ जिग्यासा नहीं रहा भारत में धर्म का अर्थ बन गया मानों यद्यपि धर्म भारत का वैदिक है और वेदों की जान वेदान्त है और वेदान्त का प्राण है जिग्यासा
00:29:11का शातिर दिमाग था
00:29:13कि भारत के धर्म से
00:29:15जिग्यासा को बिलकुल हटा दिया गया
00:29:17कहा गया जिग्यासा नहीं करना
00:29:19जबकि वेदों का अरथी है जिग्यासा जानना
00:29:21वेद माने मानना नहीं होता विद धातु है
00:29:23विद माने जानना होता है
00:29:25वेदान्त में कहीं भी
00:29:41पर भारत में धर्म का अर्थ हो गया, फलानी कहानी है, इसमें विश्वास करो, और जो इनस कहानी को जितना मानेगा, उतना बड़ा भक्त कहलाएगा.
00:29:48अगर भक्ति का अर्थ है प्रेम तो वेदान्त में प्रेम मने होता है
00:30:00मुक्ति के प्रति प्रेम वो है प्रेम मार्ग
00:30:03मैं बंधन में हूँ मुझे मुक्ति चाहिए इसको बोलते हैं प्रेम मार्ग
00:30:07इसी को आप भक्ति भी बोल सकते हो
00:30:10मैं अज्ञानी हूँ मुझे जानना है
00:30:14ये प्रेम है
00:30:17मैं बेचैन हूँ मुझे चैन चाहिए
00:30:20मुझे चैन से प्यार है ये प्रेम है
00:30:22ये हुआ वास्तविक प्रेम मार गया वास्तविक भक्ति मार गया
00:30:25पर उसकी तिखे भारत में भक्ति ज्ञान से बिलकुल विहीन होकर अंदभक्ति बन गई
00:30:32और जब ऐसा हो जाता है तो विज्ञान के लिए कोई जगह नहीं रहा जाती
00:30:37क्योंकि विज्ञान में मानने से काम चले गई नहीं
00:30:40विज्ञान में तो प्रश्ण पूछने पढ़ते हैं प्रयोक करने पढ़ते हैं जानना पढ़ता है भारत जानने से बिलकुल हट गया बिलकुल आपको एक उधारन देता हूं सन अठारा सौ में जब ब्रिटेश अभी भारत पर चाही रहे थे पूरे तरीके दे चाही भी नह
00:31:10इसे नदियों पर पुल डाला जाता है और उन पुलों को पार करके राज्य जीते जाते हैं वही लोहा वही लोहा कितना छोटा सा इंग्लेंड उसमें कितनी फाउंड्रीज थी सौ अब पताईए भारत में कितनी रहे होंगी बोलिये बोलिये अरे गैस तो गरिये जल्दी �
00:31:40भारत की आबादी यह इस पर निर्भर करता है कि आप भारत मने क्या है भारत को आप पूरा गिनोगे बर्मा से लेके अफगानिस्तान तक तो एक आकड़ा आएगा वैसे लोगे जो आज का तो पर भारत की आबादी उस समय के लेंड की आबादी थे 25 से 50 गुना ज्यादा �
00:32:10तुम लड़ कैसे लोगे और इधर उधर जाकर के विंती चरोरी करने से पूजा प्रार्थना भजन कीर्थन करने से लोहा नहीं तैयार हो जाता लोहे के लिए तो विज्ञान चाहिए
00:32:28लोहे के लिए विज्ञान चाहिए लेकिन जब धर्म और संस्कृत ही ऐसे हो जाएं जिसमें जिग्यासा और विज्ञान के लिए कोई जगह न हो तो उस देश का प्राभाव होगा की नहीं होगा बोलो
00:32:43ब्रिटिश वहाँ से हाँ इसलिए आपाए क्योंकि उनकी जो जो निवी थी उनके जो जहाज होते थे उनका जो हल था वो स्टील का बना होता था
00:33:06भारत का पाज भी जहाज थे पर वो अंग्रेजों की टकर के थे ही नहीं
00:33:10क्योंकि ब्रिटेन से यहां आने भर में आपको पहले तो उधर ट्रेड विंड्स का सामना करना है
00:33:18फिर उधर मॉंसून सर्गेट में घुसना है
00:33:21नजाने क्या-क्या जहलना इंजिन और गयरा है नहीं आपके जहाज में
00:33:28तो आप हवाओं का ही भरोसे आ रहे हो
00:33:30बहुत कुछ जहल के आना है
00:33:35भारती ये नेवल टेकनोलोजी ब्रिटिश नेवल टेकनोलोजी से बहुत बहुत पीछे थी
00:33:40देखिए हमें भी पता है कि ये सब जो लोग आये थे ये महाँ धूर्त थे
00:33:44हम जानते हैं हम जानते हैं लूटे रहे थे हम ये भी जानते हैं इन्होंने कितना खून भाया है भारत का और कितने हमारे पैसे लूटे हैं हम सब जानते हैं
00:33:53मैं उनकी तारीफ नहीं कर रहा हूँ
00:33:55चुकि वो धूर्त थे इसलिए मुझे और बुरा लग रहा है कि क्या हम धूर्तों से भी हार गए
00:33:59और और ज़्यादा आशंका इस बात से होती है
00:34:05कि हम जिस राह चल रहे है वो रहा हमें लेका जा रही है
00:34:10अगर राह पुराने जैसी है तो राह का अंजाम भी कहीं पुराने वाला ही न हो जाए
00:34:21भारतिये जहाजों में तोपे नहीं लगी होती थी
00:34:28बिटिज जहाज होते थे कैनन फिटेड
00:34:30चल किस से रहे कौन से पावर रहे विंट पावर
00:34:36पर फिर भी वो तोप लागे चल रहे है जहाज बर
00:34:38हमारी जितनी भी टेकनोलोजीज हो सकती थी उस समय पर
00:34:47वो यूरोप से खासकर इंग्लेंड से बहुत पीछे की थी
00:34:52अब आज मैं आपसे पूछ रहा हूँ AI में भारत का है
00:34:56जल्दी बोलिए उस समय पर जो cutting edge बात थी वो यही थी
00:35:02navigation उस समय पर navigation और astronomy cutting edge sciences थी
00:35:10आज की cutting edge sciences कौन सी है
00:35:13उसमें हम कहां पर है
00:35:16तो क्या आज भी वही स्थितिया हमने नहीं बना रखी जो तब थी
00:35:21हाँ पस इतना है कि तब हम राजनातिक रूप से भारतिये स्वत्मत्रता सेनानियों की कृपा से आज राजनातिक रूप से भारत एक है
00:35:31ये advantage जरूर है हमें आज कि आज हम कह सकते हैं कि ये इतना बड़ा जो नक्षे पर हमें दिखाई दे रहा है
00:35:39ये हमारा एकी करत भारत देश है हम ही कह सकते हैं ऐसा उस वक नहीं था
00:35:43पर इस एक बात के अलावा जो मानवी सामाजिक और सांस्कृतिक स्थितियां हैं वो बहुत हद तक वैसी ही हैं बदली नहीं है
00:35:56और बहुत सारे वो कारण जिन्होंने हमको गुलाम बनवाया उन कारणों को आज सक्रिय रूप से प्रोच्साहित किया जा रहा है
00:36:05हम जानते हैं कौन सी ताकते हैं जो लगी हुई है यह करने में बात आ रही है समझ में आपको
00:36:17जब घर में यह महाल होगा कि बेटा चुपचा आप मान लो
00:36:20बच्चा सवाल नहीं पूछ सकता है कि मैं फलाने के पाउं के उच्छी हूँ फलाने की शादी में इस तरह का क्यों हो रहा है
00:36:30नहीं नहीं यह सब मत करो यह करोगे तो गलत हो जाएगा यह नहीं करते हैं पाप लग जाएगा
00:36:36तो ऐसे समाज में फिर क्या विज्ञान आगे बढ़ सकता है जल्दी बोलिए जहां कहा जा रहा हो कि कोई चीज ठीक सर्फ इसलिए क्योंकि ऐसा ही तो चलता रहा है
00:36:47क्या उस समाज विज्ञान आगे बढ़ेगा अब बताइए कि दुनिया भर में जो रिसर्च होती है जो पेपर्स लिखे जाते हैं जो पेटेंट्स होते हैं उसमें आज भारत का कितना योगदान है बोलिए
00:37:00क्या इस्थितियां वास्तों में बदली है क्या आज भी हमारा साइंटिफिक टेंपर हो पाया है जबकि हमारा सम्विधान इसे हमारी फंडमेंटल ड्यूटी बताता है आप में साइंटिफिक टेंपर होना चाहिए नहीं तो आप एक अच्छे नागरिक भी नहीं है भारत क
00:37:30जिस पर मुझे भी बहुत नाज है
00:38:00तेजस दुरघटना ग्रस्त हो गया, उससे मुझे मालू में क्या याद आया, मुझे मारूत याद आया
00:38:04आप जानते हैं मारूत क्या था?
00:38:08मारूत भारत का पहला इंडेजेनस फाइटर प्लेन प्रोजेक्ट था
00:38:12और उसके लिए भारत ने
00:38:20World War II
00:38:22World War II के कई
00:38:23खतरनाक German fighter planes
00:38:26आप उनमें नाम में आप देखेंगे
00:38:28TA लिखा होता है
00:38:30क्यों लिखा होता है
00:38:32क्योंकि जर्मनी में
00:38:34कन्वेंशन थी कि जो उनका डिजाइनर होता था
00:38:36उसी के नाम पे plane का नाम भी रख दिया जाता था
00:38:39कुर्ट टैंक
00:38:40भारत सरकार ने उस व्यक्ति को भारत बुलवाया
00:38:44क्योंकि World War II के बाद जर्मनी से भाग गया था
00:38:47तो उसको बुलवाया गया कि
00:38:48नहीं तुम यहां आजाओ भारत आया
00:38:50जानते हैं कहा रहा आपके ही शहर मेरा यहीं बैंगलोर में
00:38:53उसने बहुत बहुत अच्छा
00:38:59एक एर फ्रेम बनागर के दे दिया
00:39:02और बोला इस तिंग
00:39:07विल रेज थ्रू एनी वार
00:39:09वैसा डिजाइन
00:39:11उस वत पाकिस्तान होगा रहा तो छोड़िए
00:39:13चीन क्या जापान के पास भी नहीं था
00:39:15उस मारूत को सही इंजन नहीं मिल पाया
00:39:20क्योंकि हम
00:39:22हमने इंजन में इंवेस्ट ही नहीं किया
00:39:24हमने उसकी जगे कहा हम मिक 21 ले लेंगे
00:39:27रूस से
00:39:28वो मारूत चुप चाप
00:39:31रिटायर हो गया
00:39:32मैं तेजस की बात क्यों कर रहा हूँ
00:39:35क्योंकि आज भी तेजस के पास
00:39:37इंडिजनस इंजन नहीं है
00:39:39मारूत 1960s की बात थी
00:39:43कितने साल बीच चुके हैं
00:39:46कितने साल बीच चुके हैं
00:39:47आप कह रहे हो चीजें बदल रही है
00:39:51मैं भी मानता हूँ चीजें बदल रही है
00:39:53मुझे बहुत खुशी है चीजें बदल रही है
00:39:54पर मैं पूछ रहा हूँ किस स्पेस से किस गते से
00:39:56मारूत को भी इंजन नहीं मिला
00:40:00तेजस को भी नहीं मिल रहा है
00:40:02और आप कैसे
00:40:06बड़ी लडाईया जीतोगे अगर आपके फाइटर प्लेन के पास एक सौदेशी इंजन ही नहीं है तो
00:40:12एर फ्रेम तो हमने इंडिजनेस अपना सौदेशी 1960s में ही बना लिया था और वो एक वर्ल्ड बीटिंग एर फ्रेम था
00:40:19लेकिन उसको हमने इंजन कौन से दिया बहुत अंडर पावर्ड इंपोर्टेड इंजन दिया
00:40:26उसके कारण वो लो लेवल पर तो अच्छा उड लेता था 1971 वार में मारूत में पार्टिसिपेट किया है
00:40:36हम लोग सुचते हैं कि तेजस हमारा पहला इंडिजनस प्रोजेक्टर नहीं नहीं नाइटीन सिक्स्टी में बना चुके थे इंडिजनस
00:40:411971 वार में हमारे प्लेन ने पार्टिसिपेट भी किया और जो लो अल्टिचूड थे उस पर अच्छा परफॉर्म भी किया
00:40:48लिकनो क्लाइब भी नहीं कर सकता उसे जो क्लाइब करने के लिए जो पावर चाहिए उसके इंजन में थी नहीं
00:40:54इंपोर्टे इंजन था लिए हवी इंजन कोल्ड वार एरा था किसी भी देश ने आपको देने से मना कर दिये
00:41:00कोई क्यों देगा खुद बनाने थे खुद हमने बनाने में का नहीं हमें नहीं बनाने हम मिग 21 इंपोर्ट कर लेंगे वही मिग 21 जो अभी रिटायर हुआ है
00:41:07यह स्थिंग आर इंप्रोविंग और वी नहीं है इस थोड़ी है कि जब अंग्रेज भारत आए तो भारत के पास साइंस टेक्नोलजी विल्कुल थी ही नहीं
00:41:23पर अगर इतना सा भी गैप है 10-20 परसंट का भी गैप है तो 10-20 परसंट के गैप में तो विनर टेक्स ओल
00:41:30एक वार का मतलब आप समझते हो वार का मतलब यह नहीं होता कि आपकी मेरी आपकी लडाई हो आपकी 80 उनिट्स की ताकत है मेरी 75 उनिट्स की ताकत है
00:41:42और जो trophy है वो 100 units की है
00:41:46कि आप और मैं अगर लड़ेंगे तो जो 100 units की trophy है वो जीतेगा
00:41:50तो आपको क्या लग रहा है आप 80 units की हो और मैं 75 units का हूँ
00:41:54तो trophy 80 to 75 ratio में बाटी जाएगी
00:41:56नहीं winner takes all
00:41:58ये जो 5 unit का gap है न ये fatal हो जाएगा ये प्राण घातक हो जाना है
00:42:03तो science technology हमारे पास तब भी थे जब हमारे ऊपर European चढ़ने के लिए आ गए तब भी थे
00:42:11जब अफगान आये थे और मुगल आये थे
00:42:15तब भी हमारे पास science और technology सुदेशी था ही था
00:42:18लेकिन gap था
00:42:20तो जितना है उस पर फक्र करना बंद करिये
00:42:24छोड़ दीजिए ये कि हमारे पास भी तो कुछ है
00:42:27कुछ से बात नहीं बनेगी ये देखिए कि gap कितना है
00:42:30because winner takes all
00:42:31आप 80 क में 75 का है थोड़ा सा ही gap है
00:42:34थोड़ा सा ही gap है लेकिन वो trophy पूरी की पूरी आप लेके जाओगे
00:42:39मुझे कुछ नहीं मिलेगा मुझे 200 साल की गुलामी मिलेगी
00:42:41मुझे 200 साल की गुलामी मिलेगी फिर मैं वैसे ही जैसे चुनावों में होता है
00:42:47आपको मिले 100 वोट और मुझे मिले 99
00:42:51आप MP बनो के मैं क्या बनूँगा
00:42:55मैं कुछ नहीं बनूँगा winner takes all
00:42:58तो यह मत बोलो कि मेरे पास भी तो 99 है यह देखो कि gap अभी है
00:43:02in a war situation the winner takes all
00:43:07so be very very alert that there is a significant gap even after all these years of independence
00:43:13और इतना ही नहीं क्यों gap है
00:43:16उस gap के पीछे
00:43:18जो कारण है वो कारण आज भी मस्बूत है बलकि और कुछ कारण तो और जादा मस्बूत होते जा रहे है
00:43:25cut
00:43:33tea
00:43:35tradition
00:43:36जो चल रहा है वो ठीकी चल रहा है
00:43:39जो चल रहा है वो ठीकी चल रहा है
00:43:41artillery fire power लेके आये थे अंग्रेज
00:43:45हमारी सेना है
00:43:49अभी भी close combat की formations में लड़ रही है
00:43:53जी close combat क्या होता है
00:43:54तलवार चे तलवार लड़ेगी
00:43:57जहां पर बंदूकिया चल रही है
00:44:00वहाँ close combat का कोई अर्थ हुआ
00:44:02हम अभी भी हाथियों का इस्तिमाल कर रहे थे
00:44:06हम अभी भी हमला करने के लिए
00:44:12मुहूर्थ देख रहे थे
00:44:13astrology का इस्तिमाल कर रहे थे
00:44:15बहुत सारी लड़ाईया हमने हा रही है
00:44:20यही astrology मुहूर्थ बाजी के चक्कर में
00:44:23भी कुछ पहले से हो रहा है तो गलत कैसे हो सकता है
00:44:31सुनो हो सकता है कि आप किसी बहुत अच्छी और उची
00:44:37tradition की बात कर रहे हो बिलकुल लेकिन भूलना नहीं
00:44:41कि आज की हर tradition कभी का innovation होती है
00:44:45कोई भी tradition बिग बैंग के साथ तो नहीं शुरू हुई थी न
00:44:51हर tradition किसी समय का बहुत जबरदस सुन्दर नायाब
00:44:58innovation था तो आप tradition को नहीं पूज रहे हो आप किसी
00:45:03समय के innovation को पूज रहे हो तो अगर पूज नहीं है तो फिर
00:45:07innovation को पूजो ना ट्रेडिशन के नाम पे भी पूजा तो
00:45:10innovation की ही कर रहे हो ना तो क्यों ना आज भी
00:45:13वेट करो खो क्यों कहरें हो कि जो चलता रहा है वही चलने देंगे जो चलता रहा है वही चलने
00:45:38कुछ भी ऐसा है जो आपने स्वयम करा है अपने विवेक से यह सब कुछ वही है जो आपने करा है क्योंकि करना ही होता है
00:45:47हटाईए वो सब कुछ जो करना ही होता है बताईए क्या बचा जिंदगी में और कुछ नहीं बचा जिंदगी में तो क्या हम भी हैं अपनी जिंदगी में
00:45:56वही सब कुछ तो करा है
00:45:59जो करना ही होता है
00:46:00क्या खा रहे हो जो सब खा रहे है
00:46:05क्या पहन रहे हो जो सब पहन रहे है
00:46:06कहा जा रहे हो जहां सब जाते हैं
00:46:08कैसे जी रहे हो जैसे सब जीते हैं
00:46:10जिन्दगी के बड़े फैसले कैसे की है
00:46:12वैसे ही जैसे सब करते हैं
00:46:13क्या पढ़ा जो सब पढ़ते हैं क्या मानते हो जो सब मानते हैं तो फिर तुम हो भी इंडिविजूल का तो मतलब होता है वो जिसकी अपनी कोई निजी सत्ता है हस्ती है अगर तुम हो ही नहीं
00:46:36तुमारी जगह बस एक भीड़ है पुरानी बहुत तो फिर ये वो कारण है जन्होंने भारत को गुलाम रखा और अगर हमें राष्ट्र प्रेम है तो हमें बहुत सतर्क रहना चाहिए कहीं ये कारण आज भी मौजूद तो नहीं और मैं जहां से देखता हूँ
00:47:00मुझे यही दिखाई देता है ये कारण आज भी मौजूद है कुछ इन में से कारण है जिनका उपचार हमने कर दिया है लेकिन इन में से बहुत से कारण है जो यथावत हैं और कुछ तो ऐसे हैं
00:47:11जो और बढ़ रहे हैं, रोग गहरा रहा है
00:47:16आ रही है बात समझ में
00:47:22इफ कट रिवॉर्न
00:47:25रिनन्सियेशन
00:47:30अधर वर्लिनेस
00:47:34ये दुनिया तो सराय है, तुम यहां बस ऐसे ही आए हो समय काटने के लिए
00:47:39यहां आए हो कुछ सालों के लिए
00:47:44अनंत जीवन तो तुम्हें किसी और लोक में बिताना है
00:47:47तो इस लोक पर बहुत ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है
00:47:51त्याग करो त्याग, वैराग्य रखो, ये वैराग्य का अर्थ है ही नहीं
00:47:54लोक धर्म ने वैराग्य को
00:47:58नजा ने क्या बना डाला
00:48:04वैराग्य माने मुझे इस दुणिया से कोई लेना देना नहीं
00:48:08एरे भईया, तुम्हें जिस दुणिया से कोई लेना ही देना नहीं
00:48:10उस दुनिया की लड़ाई� stripes अब जीतो के कैसे ये बताओ
00:48:12जिस दुनिया के तथियों को तुम समझते ही नहीं क्योंकि तुम ने कह दिया मैं तो वेरागी हूँ मुझे इस दुनिया दे बहुत लेना देना नहीं
00:48:19जिस दुनिया के तथियों को तुम समझते ही नहीं उस दुनिया की लड़ाईयां क्या तुम जीट सकते हो अब बोलो
00:48:42कोई आस्मानी कृपा हुई थी, क्या गी न्यूटन के बगल में सेव गिरेगा,
00:48:48सेव नहीं तो अंगूर, नहीं तो कटहल, नहीं तो नारियल, भारत में भी खूब गिरते रहे हैं,
00:48:55गिरे होंगे कि नहीं गिरे होंगे,
00:48:56पर बात क्या है? लेना देना क्या है? क्या फरक पड़ता है? किसी ने गिराया होगा? कोई बात होगी? किसी राक्षस का दाव होगा? हमें लेना देना क्या है इतना? दुनिया में आए हैं दो चार दिन को?
00:49:13क्या बहुत किसी दूसरे के घर में ताक जाक करनी
00:49:17हमारा ये घर ही नहीं हमारा घर कोई और है
00:49:19ये किसी और का घर है
00:49:20हम इसमें क्यों बहुत दखल अंदाजी करें
00:49:22बहुत सवाल जवाब क्यों करें
00:49:24कट हल गिरा सर पे ही गिरा
00:49:26सर फट गया कोई बात
00:49:28पाप कटे
00:49:29आता आ रही है सो मुझ में
00:49:42वैराग्य का मतलब
00:49:44मिटीरियल से दूरी नहीं होता
00:49:47वैराग्य का मतलब
00:49:49स्टुपिडिटी से दूरी होता है
00:49:51नासमझी से दूरी होता है
00:49:56वैराग्य का मतलब यह नहीं होता
00:49:57अरे अरे फलानी वस्तु तो भौतिक है
00:49:59हम भौतिक वस्तुओं को छूते नहीं
00:50:01हम बाबा जी के चेले है
00:50:02वैराग्य का मतलब होता है
00:50:07जो कुछ भी भौतिक है मैं उसको जानूँगा
00:50:09समझूँगा उसके प्रतिय अंधा नहीं रहूँगा
00:50:11वेराग्य का मतलब होता है मेरे भीतर भी जो बैठा है राग करने वाला मैं उसको जानू
00:50:21वेराग्य के केंद्र में राग से मुक्ते है और राग है तो रागी भी होगा कौन है वो रागी उसका नाम है हंकार
00:50:28वेराग्य का अर्थ होता है हंकार को जानना आत्म ग्यान
00:50:32मात्र आत्म ग्यानी ही वेरागी हो सकता है
00:50:36पर जब धर्म का अर्थी आपने बना दिया होगी
00:50:38ग्यान को तो छूना भी मत
00:50:40और आत्म ग्यान की जरूरत क्या है
00:50:43क्योंकि परम सत्ता तो बाहर आसमान पर बैठी है
00:50:45खुद को जान कर क्या करोगे
00:50:47तुम्हारा तो जन्म इसलिए है ताकि तुम आस्मान की और सीडियां लगा सको
00:50:52मृत्यू के बाद
00:50:53यह जीवन तो बेकार की चीज़ है असली घटना तो मौत के बाद घटनी है
00:50:57तुम्हारी रूह निकलेगी जीवात्मा
00:51:00सुपरसॉनिक भागेगी
00:51:04सुपरसॉनिक कम बोल दिया
00:51:05एस्केप वेलोस्टी से भागेगी
00:51:07यही नहीं करेगी कि
00:51:12प्रथ्वी का एट्मोस्फियर पार करेगी
00:51:16वो पूरा यूनिवर्स पार कर जाएगी
00:51:19ब्रहमांड पार कर जाएगी
00:51:20वो किसी और लोक में पहुँच जाएगी
00:51:21कितनी दूर जाना है तुमें
00:51:30तुम इस प्रथ्वीप को जानकर क्या करोगे
00:51:32तुम समुद्रों को पार करके
00:51:34क्या करोगे
00:51:36वरना अगर अगर अंग्रेजोंने समुद्र पार किया
00:51:38तो समुद्र तो हम भी पार कर सकते थे
00:51:39two way street है भाई
00:51:44कोई चालान कटता हमारे जहास का
00:51:46जैसे वो आये थे वैसे हम भी जा सकते थे
00:51:49और हम बहुत बढ़े थे
00:51:50हम भी जाके कह सकते थे हाँ हम आये है
00:51:52ट्रेडिंग हमें करनी है
00:51:53और हमारे पास तुम से कहीं ज्यादा माल है
00:51:56हम आयें ट्रेडिंग करने, हम क्यों नहीं गए
00:51:59ऐसा नहीं कि हम ट्रेडिंग नहीं करते थे
00:52:01हम भी करते थे, हम कहां से करते थे
00:52:03हम आसपास से करते थे
00:52:04बहुत हुआ तो अरब तक पहुच जाते थे
00:52:09इरान, अरब
00:52:10यह दक्षण के राज्य थे
00:52:14विशेशकर जो चोल राज्य थे
00:52:16उन्होंने जो दक्षिन पूर्व में
00:52:18मलेशिया हो गया ये सब बाली तक
00:52:21वहाँ पर जाकर के टेडिंग करी थी
00:52:22यूरोप में रेनेसा के बाद से
00:52:32कोई और ही लहर चल रही थी
00:52:33वो कह रहे थे हमें पूरी दुनिया खोज नहीं है
00:52:35हालनकि इसमें ऐसा नहीं कि वो परमार्थी हो गए थे
00:52:37कि बड़े साधू लोग थे वो
00:52:39उन्हें दुनिया इसलिए खोज नहीं थी
00:52:41ताकि दुनिया पर कबजा कर सकें
00:52:42पर जो भी वज़य थी उनके पास
00:52:45उन्होंने दुनिया खोजी
00:52:47और कुछ खोजने के चकर में कुछ और भी खोज डाला
00:52:52वो क्या निकला था खोजने कोलमबस
00:52:54और क्या खोज दिया उसने
00:52:57हमने क्या का हमें लेना देना क्या है
00:53:02क्या करना है कुछ होगा
00:53:06लीला है
00:53:07नियम है भाई नियम है हर चीज के नियम है
00:53:11वहाँ न्यूटन और केपलर बैठ करके
00:53:14हर चीज के नियम खोज रहे थे
00:53:16और हम क्या बोल रहे थे
00:53:17कुछ होगा
00:53:20क्या करना है
00:53:20क्या बज़ा है
00:53:22वो आस्मान का नाप ले रहे थे
00:53:26वो देख रहे थे एक तारा दूसरा तारा
00:53:28हम आस्मानों की और मूँ करके
00:53:30बस ऐसे हाँ जोड की प्रार्थन अगर रहे थे
00:53:32जो आस्मान का नाप लेगा वो जीतेगा
00:53:36या जो बस आस्मान को नमन करेगा वो जीतेगा
00:53:39उन्हों तो नाप लिया थे पूरा आस्मान
00:53:41आस्मानों को नाप ये बिना
00:53:43समुद्री आत रहे हैं
00:53:44नविगेशन हो नहीं सकता था
00:54:01कुछ आ रही है बात समझ में
00:54:03अभी लंदन में बात हो रही थी किसी से
00:54:16स्याद उधर की और जाना हो
00:54:20लोने का यहां पर हिंदी समझने वाले
00:54:23इतने लाख लोग हैं लंदन के अंदर
00:54:25और बहुत लोग सुनते हैं आ जाईए
00:54:30मैंने का हिंदी समझने आ ले बले हैं
00:54:33हिंदी माने हिंदी उर्दू सम्मिला जुला के
00:54:35मैंने का भारती है कितने है
00:54:36अच्छा भारत की आबादी पाकिस्तान से
00:54:40साथ गुना जादा है ठीक
00:54:41कितनी जादा है साथ गुना जादा है
00:54:44लेकिन लंदन की आबादी में
00:54:47भारतियों का और पाकिस्तानीयों का
00:54:49अनुपात
00:54:51साथ से
00:54:52बहुत-бहुत कम है
00:54:53ऐसा क्यों हुआ
00:54:56हम आज भी
00:54:58समुद्रपार नहीं करना चाहते
00:55:00ठीक वैसे
00:55:02जैसे तब हमने कहा करना क्या है
00:55:03यह दुनिया है हमें क्या करना है
00:55:05क्यों जाना इधर उधर
00:55:06वैसे ही भारतिया आज भी
00:55:08reluctant travelers है
00:55:09हमारी पहली इच्छा यही होती है
00:55:14मेरा गाउं मेरी मा का आचल
00:55:16मेरी मिट्टी की सोंदी-सोंदी
00:55:20खुश्बू
00:55:20मुझे ना बहार निकलना
00:55:23लंदन की अबादी में
00:55:31जैसे पाकिस्तान और बांगलादेश की अबादी लगभग बरावर है
00:55:33बांगलादेशियों और भारतियों का अनुपात भी होना चाहिए फिर लंदन की अबादी में एक और साथ का नहीं है
00:55:41यही बात ज्यादातर आप देखोगे तो विदेशी देशों पर लागव होती है
00:55:47केनडा पर भी लागव होती है
00:55:49विशेशकर जो उत्तर भारतिये मन है
00:55:54वो कहीं नहीं निकलना चाहता
00:55:56यहीं पड़े हैं क्या करना है? मरना ही तो है
00:56:01मरना ही तो है
00:56:03और जो ज्यादा खोजोज करें
00:56:06उसको क्या बोलेंगे
00:56:07बहुत ये
00:56:08materialistic है
00:56:10materialism न हुआ गाली हो गई
00:56:14क्या material है
00:56:15शरीर भी तो material है
00:56:17ये भी तो बहुत तिक है
00:56:18अगर वहराग्य का अर्थ होता है
00:56:20material का त्याग
00:56:22तो तुम सबसे पहले तो शरीर त्याग हो
00:56:23क्योंकि पहला material तो ये ही है
00:56:26ये पकड़काय को बैठे हो
00:56:28वैराग्य माहने होता है
00:56:33अविवेक का त्याग
00:56:34वैराग्य का अर्थ होता है
00:56:37आत्म अग्यान का त्याग
00:56:39वैराग्य माहने ये नहीं होता है
00:56:40मुझे तो कुछ क्या करना है
00:56:42और सुनो
00:56:44लडाईयां
00:56:48बहादुरी से नहीं जीती जाती
00:56:50ये भी हमने बहुत एक
00:56:52मिथ पाल रखी है
00:56:54कि शौर्रे है तो विजय मिलेगी
00:56:57नहीं ऐसा नहीं होता
00:56:59लडाईयां जीती जाती हैं
00:57:00पैसे के दम पर
00:57:01Second World War
00:57:06हिटलर उसी दिन हार गया था
00:57:08जिसे नहीं उसने शुरू करा था
00:57:09क्यों? क्योंकि जर्मनी का
00:57:14GDP
00:57:14उन देशों के GDP के मुकाबले कहीं नहीं ठहरता था
00:57:18जिनसे जर्मनी ने
00:57:20एक साथ पंगा ले लिया था
00:57:221941 के मद्धे में अगर हिटलर
00:57:26ने रोक दिया होता विश्व युद्ध तो शाहिद फिर भी जीत लेता जिसको आज हम European Union बोलते हैं वो उतना पूरा लगभग हिटलर ने जीत लिया था 1941 तक
00:57:34पर 1941 के बाद
00:57:38युद्ध में आ जाते हैं USSR और USA एक साथ
00:57:45अब जीत की कोई संभावना नहीं थी क्योंकि उनका GDP और इंडस्ट्रियल बेस बहुत बहुत बढ़ा था
00:57:53जो लडाईया होती हैं वो शौरे से नहीं होती हैं वो इंडस्ट्रियल प्रोड़क्ट से होती हैं
00:57:58fighter plane, tanks, submarines ये इंडस्ट्रियल प्रोड़क्ट से हैं
00:58:04कोई तलवार थोड़ी पहलवानी करनी है जाकर के कि हमाएं बहादरी बहुत है हम जान दे देंगे जान दे दो
00:58:10अभी दे दो तुमारे जान देने से कोई लडाई नहीं जीती जाएगी
00:58:13लडाई जीती जाती है material से लडाई जीती जाती है economy से और economy कहां से आगे बढ़ेगी अगर तुम बैरागी हो
00:58:21तुम कहा रहे हो मुझे मटीरल से कुछ ले नहीं देना नहीं
00:58:25पैसा कमाना तो गंदी बात है छिच्छी
00:58:27यह छिच्छी छिच्छी गंदी गंदी चीज़ें
00:58:29जहां एकनॉमी ही नहीं होगी
00:58:33वहां हथियार कहां से आएंगे
00:58:36बात आ रही है समझ पर
00:58:42तो आज की एक दिन दुनिया ऐसी हो
00:58:44कि लड़ने भिढने की जरूरत ही न पड़े
00:58:48वो अलग बात है
00:58:51आप बुद्ध हो जाओ
00:58:54आप कहा रहे हो मुझे सच मुझ कुछ नहीं चाहिए
00:58:57मैंने महल राज्य सब त्याग दिया
00:58:59वो भी अलग बात है
00:59:00हो तो आप वो जिसको सब कुछ चाहिए
00:59:02लेकिन उसके बात बोलते हो
00:59:04नहीं मुझे मटीरियल के लिए
00:59:06न प्रयोग करना
00:59:08न अन्वेशन करना न श्रम करना
00:59:10तो फिर तो पिटाई मिलेगी बस
00:59:11लोग सहमात है मुझ से
00:59:20कम से कम भावी पीड़ी
00:59:22आरे ये बात समझने
00:59:29इमोशनलिटी, reborn
00:59:40हम तो एमोशनल लोग हैं
00:59:43हम तो एमोशनल लोग हैं
00:59:46तो तुमारे एमोशन से लड़ाया नहीं जीती है
00:59:48तुमारे एमोशन से दुनिया में कोई उचा काम नहीं हुओ आज तक
00:59:51हाँ, फिल्में जरू सुपरिट हो जाती हैं
00:59:54एमोशन दिखा दिखा के आंसू बहा बहा के
00:59:56दो तरह के एमोशन्स में हम बहुत प्रवीड हैं
01:00:08एक आंसू बहाने में एक वीरे बहाने में
01:00:11हमारी जो पूरी फैमिली और कल्चरल लाइफ है
01:00:20वो इन ही दोनों चीज़ों पर चलती है
01:00:22आपको किसी को बस में करना हो
01:00:25तो इन दो में से एक बहा दीजिए और बस में आ जाएगा
01:00:28और किसी फिल्में अगर इन दोनों ही बह रहे हैं
01:00:30तो वो मेगा हिट हो गई, यह खजार करोड
01:00:32यही तो है
01:00:38फिल्म में एक हीरो दिखा दो
01:00:41उसकी मा है और दिन रात आंसू भाती है
01:00:44और उसकी हीरोईन है और सुपर सेक्सी है
01:00:46कभी खुशी कभी कम
01:00:50चलेगी भाई, पूरी चलेगी
01:00:54तीपू सल्दान के अमने बात करी थी
01:01:04वह बहुत नहीं मेरे
01:01:06मेरे ओनर की बात है
01:01:09मैं अलाइंसेज नहीं बनाऊँगा
01:01:10मैं नहीं बनाऊँगा
01:01:12मेरा इमोशन है, हर्ट हुआ है
01:01:14strategy और rationality बोलते थे
01:01:19कि इस वक्त अंग्रेजों को हराने के लिए
01:01:22अगर दुश्मन से भी
01:01:24संदी करके अलाइंस बनानी पड़े
01:01:26तो बना ले, नहीं बनाई
01:01:38और टिपू सल्दान को कितना दोश दे लें
01:01:40क्योंकि वो भी कहां से आ रहा है
01:01:41हमारी ही सांस्कृतिक मिट्टी से
01:01:44खड़ा हुआ है वो
01:01:44और हमारी सांस्कृतिक मिट्टी में
01:01:48emotion माने भावना इतनी बड़ी चीज
01:01:49क्यों हो गई, वो इसलिए हो गई क्योंकि
01:01:51हमने धर्म कोई भावना बना दिया
01:01:53कहते नहीं हो आप लोग भगवान तो भाव के
01:01:55भूखे हैं
01:01:56जहां भाव को भगवान के इस्तर पर उठा दिया गया हो
01:02:02वहाँ
01:02:03emotionality
01:02:05बिल्कुल सर चड़कर बोलेगी ही न
01:02:08हम ये बार-बार कहते रहते हैं
01:02:12Indians are very emotional, Indians are very emotional
01:02:15आप कभी पूछते नहीं क्यों
01:02:16क्या, क्या genetic है कुछ ऐसा
01:02:19कि हम emotional है
01:02:19कुछ genetic है हम में
01:02:21तो इतने emotional क्यों है
01:02:24और यही जो हमारे
01:02:27migrants है
01:02:28जो मान लिजे second generation migrants है
01:02:31कि किसी के
01:02:33माबाप ने 60s, 70s में
01:02:35US वगएरा migrate करा
01:02:36उसके बाद वहाँ उनकी एक पीड़ी पैदा हुई
01:02:39अब उनकी दूसरी पीड़ी पैदा हुई है
01:02:40वह आप जो दूसरी पीड़ी है
01:02:41आप उससे मिलेंगे
01:02:42वह आपको कदई emotional नहीं मिलेंगे
01:02:44उनके jeans बिलकुल भारती हैं
01:02:46पर वह emotional नहीं मिलेंगे
01:02:48इसका मतलब क्या है
01:02:48यह सारी emotionality क्या है
01:02:50यह cultural है
01:02:50और हमारे culture कहां से आ रहा है
01:02:52लोगधर्म से आ रहा है
01:02:53जहां बोले गयाे
01:02:55भावना ही सब कुछ है
01:02:58भावना ही असली चीज़ है
01:03:00अतरक को मारो लात
01:03:03और बुद्धी को मारो दंडा
01:03:04असली चीज़ है emotion
01:03:06असली चीज़ है emotion
01:03:11किसी को आपका दिल जीतना हो
01:03:15और वो आप से खुव तारकिक बाते करे
01:03:18आप बहुत
01:03:20उसको महत तो दोगे नहीं
01:03:22और यही मैं आपके सामने खड़ा हो करके
01:03:24दो-चार आसू गिरा दूँ
01:03:25इधर मेरी शट गिली होगी
01:03:28उधर ये सारी जितनी सीट से
01:03:30सब गिली हो जाएंगी
01:03:31किसी को बेवकूफ बनाना हो
01:03:42तो उसे तर्क देते हो या आसू बहाते हो
01:03:44जल्दी बता हो
01:03:45देख दीदी जानती है
01:03:48कुछ नहीं करना है
01:03:54ना लॉजिक चाहिए ना प्रूफ चाहिए
01:03:56क्या चाहिए
01:03:57ऐसे कर दो जो चाहिए मिल जाएगा
01:04:00और इसको हमने
01:04:02रिलीजन बना लिया है बाकाइदा
01:04:04कहीं पर
01:04:06दो विद्वान बैठकर ग्यान की बात कर रहे हो
01:04:09आपको लगे गई नहीं ये धर्म है
01:04:10पर कहीं पर कोई बैठकर के ऐसे
01:04:12आस्मान की और देखके
01:04:14मूँ फाड़के आसू बहारा हो
01:04:15आपको गई ये है
01:04:16असली धर्म ये है
01:04:18वो धर्म नहीं है उपागलपन है
01:04:20और इस पागलपन की भारत ने बहुत बहुत
01:04:22बड़ी कीमत चुकाई है
01:04:24कारण क्या है
01:04:36आत्मग्यान के अभाव में हम जानते ही नहीं
01:04:38कि भावना क्या चीज है
01:04:40हम जानते ही नहीं कि जिसको आप भाव बोलते हो
01:04:45तो जानवरों में भी होते है
01:04:46मनुष्य और जानवर के बीच का अंतर भाव नहीं है
01:04:49भाव जानवर में भी है
01:04:50मनुष्य और जानवर के बीच का अंतर है बुद्ध और तर्क
01:04:53ये हैं जो आपकी छेतना को उठाते हैं
01:05:00जानना, समझना
01:05:01जानवर ना जानने की कोशिश करता ना समझने की कोशिश करता
01:05:16वाव हैं, emotions हैं, तो आप जानवर बना रहे हो अपने आपको, और खुद को जानवर बनाना धर्म कैसे हो सकता है, धर्म तो है अंतिम दैवियता तक पहुचना, या निम्नतम पशुता तक पहुचने को धर्म बोलते हैं, बोलो, तो ये क्या भावना भावना का खेल लगा र�
01:05:46बिना आत्म ग्यान के भावना तो पाशविक ही रहती है, भावना को भी निर्मल ग्यान ही करता है, बिना ग्यान के आपकी भावना वैसे ही है, जैसे किसी पागल की होती है, पागलों में भी भावना होती है, जानुरों में भी होती है, हम कही रहे हैं, बात कुछ आ रही है
01:06:16रिवार्न रॉंग इलीट्स
01:06:21दरॉंग काइंड ओफ अरिस्टोक्रेसी डब्ल्यू ए
01:06:27तो प्लासी सी आज हमने बाद शुरू करीती वहां सिराजुद दौला के दर्बार में कौन बैठा हुआ है
01:06:36साजिश करने वाले
01:06:38यह मूरख है यह नवाब है बंगाल का
01:06:41इसको पता ही निये क्या चल रहा है
01:06:46वहाँ वह कंपनी के सिपही जिनको ब्रिटिश सोल्जर्थ भी नहीं वोला सकता
01:06:53वह कंपनी के पेट गार्ड हैं बस जैसे आपके घरों के आगे वह सेकेरीटी खड़ी रहती है उस तरीके के लोग है
01:06:59मुठी भर लोग उन्होंने आकर के बंगाल जो भ्हारत का सबसे बड़ा हिस्सा था जानतें बंगालमानि क्या होता था था? आज का वेस्ट बंगाल नहीं होता है
01:07:07उसमें बांग्लाजेश भी आता था था Latersa भी आता था था बिहार भी आता था जारकंड भी आता है
01:07:11बंगाल अपने आप में आधा भारत था
01:07:14तभी फिर अंग्रेजों को बंगाल का विभाजन करना पड़ा था
01:07:21कि इसका तो एडमिनिस्ट्रेशन करना ही असंभव है यह इतना बड़ा हाथी है
01:07:25इतना बड़ा बंगाल और उस बंगाल का नवाब
01:07:30और किस से हार रहा है
01:07:32वो कमपनी है उसके कुल कितने सिपाही ते पता है
01:07:36तीन हजार
01:07:38कमपनी के सिपाही
01:07:41बंबलिंग फंबलिंग इडियट्स जिनको कुछ नहीं आता
01:07:45क्यों क्योंकि वो नवाब ऐसा था
01:07:48और इलीट सिर्फ नवाब ही नहीं होता
01:07:55इलीट वो लोग भी होते हैं जो उसके दर्बारी होते हैं
01:07:57उनको भी तो अब इलीट ही बोलते हो ना
01:07:58वहां बैठे कौन हों साजिश मार रहे हैं
01:08:01ये इस तरह के लोग मीर जाफर जैसे लोग
01:08:03अब अंगाल से थोड़ा सा पश्रिम की और चलें
01:08:09तो हमारा आता है अवद
01:08:10वहां लखनव में कौन बेड़ा वाजिश अलीशा
01:08:12उसके पूरे दर्बार में कौन मौजूद है
01:08:15चाटुकार चापलूस
01:08:17वो उसको बता रहे हैं
01:08:19क्या फबर हैं और क्या बात है
01:08:21इतना मोटा है वाजिश अलीशा
01:08:23इतना
01:08:23और उसके लिए नजमे लिखी जा रही है
01:08:28कितना खुबसूरत है
01:08:29क्या हैंडसम है
01:08:30उचे से उचे का
01:08:32ये कोर्ट की एक्टिविटी चल रही है उसके
01:08:34बड़े से बड़े कारीगर बुलाए जा रहे हैं
01:08:36कि इनके लिए कपड़ा कैसे बनेगा
01:08:38और जो बेस्ट टैलेंट है
01:08:39पूरे राज्य का वो लाया गया ये तया करने के लिए
01:08:43कि कैसे
01:08:44नवाप साहब बिलको लगदम
01:08:46चा जाएं
01:08:50और नवाप साहब ऐसे हैं कि अंग्रेदों से लड़े भी नहीं
01:08:56तो जानते हो ना कहानी
01:08:58जब अंग्रेज आय तो
01:08:59आठी है
01:09:01और जोने भी गानी हम तुमें तकलीफ देंगे ही नहीं
01:09:04उनको एक पिंजरडे में रखा और बोले चलो ले चलो इनको
01:09:07ये हमारे इलीट्स थे
01:09:14ये हमारे इलीट्स थे
01:09:18हम कहते हैं ये था राजा तथा प्रजा
01:09:28उल्टा भी सही है
01:09:30यथा प्रजा तथा राजा
01:09:32हमने क्यों ऐसे लोगों को
01:09:36अपना राजा, अपना प्रतेनिधी, अपना नवाब बना रहने दिया
01:09:40अपनी सारी कमजोरियों के बाद भी भारत इतनी आसानी से नहीं हारता
01:09:47ये हमारे राजे और नवाब महा नालायक निकले
01:09:53इनके शुद्र स्वार्थ
01:09:56इनकी निजी संकीन्ड़ता हैं
01:10:00इसके लिए इनोंने पूरा देश बेश डाला
01:10:02कितने तो इसी वाते बहुत खुश थे
01:10:08कि हमें अंग्रेजों से राय बहादूर की मिल गई पदवी
01:10:10अब वो राय बहादूर बनके घूम रहे है
01:10:12और नजाने कितने और तरीके
01:10:16कि ऐसी उपाधियां थी जो अंग्रेजों ने बक्षी
01:10:19उनको ये भी कह दिया कि तुमको अभी राजा ही कहा जाएगा
01:10:23और राजा कुछ नहीं है वो
01:10:24वो ब्रिटिश एजेंट बन गया डिफैक्टो
01:10:27क्या आज भी हमें अपने रिप्रेजेंटेटिव चुनना आता है
01:10:38बोलो अगर उस समय रॉंग इलीट्स थे
01:10:42क्या आज भी हमको पता है गदी पर किसको बैठाना है
01:10:47बोलो
01:10:48नहीं तो बंगाल नहीं गिरता इतनी असानी से नहीं गिरने वाला था बंगाल
01:10:53और बंगाल का गिरना ही अंग्रेजों
01:11:00को फुट होल्ड दे गया भारत में
01:11:04जिसके पास बंगाल है वो भारत को अब जीत लेगा
01:11:07हम 1857 की ज्यादा बात किया करते हैं
01:11:17जो हमारी जो कलेक्टिव मेमुरी है जो फोक इमेजिनेशन है
01:11:20वो बार-बार 1857 के गदर करांते पर आ जाती है
01:11:23मंगल पंडे और ये सब बाते करते हैं
01:11:25जासी गिरानी और ये नाम हमारे लिए बड़े आदर्णी है बहुत अच्छी बात है
01:11:30लेकिन ज्यादा महत उठाव सत्तावन से सत्तावन का है
01:11:341857 से ज्यादा महत उठाव सत्तावन का है
01:11:39क्योंकि 1757 जब एक बार हो गया अब 1857 जीता नहीं जा सकता था
01:11:43बहुत वीर्ता पूर्वक क्रांते करी थी सिपाहियों ने 1857 में
01:11:50लेकिन कुछ बचा नहीं था तब तक केंदर पर कौन बैठा हुआ था
01:11:54जिसकी रियासत दिल्ली से शुरू हो कि दिल्ली में ही खतम हो जाती थी
01:11:59उसको जाकर के आप अगर भारत का बाच्छा गोशित कर रहे हो तो लड़ाई जीती नहीं जा सकती थी
01:12:031857 तक देर हो चुकी थी पहले ही बहुत
01:12:06वो लोग जिनको अपना प्रतिनिधी अपना नेता अपना राजा चुनना नहीं आता
01:12:21वो फिर शिकायत न करें
01:12:25अगर कोई भी फिर शोशक कुरूर ताकत आकर उनका राजा बन बैठे तो
01:12:37हमने सही राजा चुना होता तो अंग्रेज हमारे राजा नहीं बन पाते
01:12:42पर चुनने की बात तो तब आई की न जब लोग तंत्रो
01:12:48यहां तो था राजा का बेठा राजा और लोग तंत्र की बात तो तब आईगी न जब आत्मसम्मान हो गरिमा हो
01:12:58और आदमी यह कह पाये कि मेरी तकदीर मैं खुद तैय करूँगा आपकी तकदीर तो आप कहते हो चांस सितारों ने तैय कर रखी है
01:13:10अभी community पर गिता community से कितने लोग हैं काफी लोग हैं अरे वाह अभी community पर हमने शुरू करा है कि चलो आओ
01:13:19इतना ही पर्याप्त नहीं था कि
01:13:22पचास रुपए में हमने कर दिया मुफ्त में ही आ जाओ
01:13:25आप देखते हैं कुछ लोगे नाम गाए गिफ्ट लिखा रहता है
01:13:27गिफ्ट
01:13:29तो वो लोग भी आते हैं उन्होंने सतर गरा सुने नहीं वो आ गए
01:13:32उनको एकसेस मिल गई है
01:13:33आप जानते हो लगातार वो सवाल क्या पूछ रहे हैं
01:13:37उनके दस में से आठ या नौ सवाल क्या होते हैं
01:13:39मेरी शादी कब होगी
01:13:40नबे प्रतिशत अगर वो महिला है तो सिर्फ यही पूछ रही है
01:13:44मेरी शादी कब होगी
01:13:46अरे मैं कैसे बताऊं कब होगी
01:13:48पर उनके लिए आचारे का मतलब ही वही है तो चांद सितारों से पूछ के तुमारी शादी करवा देगा
01:13:53मेरी दुकान कब चलेगी
01:13:57मेरी नौकरी कब लगेगी
01:14:02मेरा पती पडोसन कोई घूरना कब बंद करेगा
01:14:08जब हमने यह मान रखा है कि हमारी तकदीर किसी आचारे के पास होती है
01:14:18किसी कुंडली में लिखी होती है
01:14:22कहीं दूर कोई ग्रह कहीं कोई उपर बैठी आस्मानी शक्ति हमारी दिंदेगी चला रही है
01:14:29तो फिर लोकतंतर कैसा लोकतंतर का तो क्या मतलब होता है
01:14:33मैं जानता हूँ, मैं चुनूंगा
01:14:36अपना प्रतिनिधी मैं बनूंगा
01:14:39है नहीं, और लोगतंतर नहीं तो फिर तो जो डेबल्यू ए है
01:14:44राउंग इलीट्स, राउंग अरिस्टोक्रसी
01:14:47वो आपकी नियती बन जाएगी
01:14:49आरी बात साँज में
01:14:57रिचुलिज्म, रिवार्न, रिचुलिज्म
01:15:02धर्म माने बहुत अच्छे से रट लो
01:15:07जितने शलोक मंत्रें सब रट लो
01:15:10और जितना कर्म कांड है वो भी रट लो
01:15:13समझने कोई मतलब नहीं, न गणित न फिलोसफी
01:15:16न गणित न फिलोसफी
01:15:19गई बार तक्षिला नालंदा बहुत पीछे छूट गए थे
01:15:22बहुत पीछे छूट चुके थे
01:15:23क्या बचा था? रटा
01:15:25कौन विद्वान है?
01:15:28जिसने फलाने गरंद के इतने शलोक रट लिये
01:15:30वो विद्वान हो गया
01:15:32वो इतना विद्वान हो गया और राजा जी भी उसे अपने दर्वारें बुलाएंगे और केंगे हाँ हाँ हाँ यही तो निकला एक महाग्यानी
01:15:39न गणित है न फिलोसफी है
01:15:46सारा जोर बस रटने पर है
01:15:49क्या होगा उस देश का?
01:15:51क्या होगा?
01:15:56चल रहा है, रिचूल है, रिचूल
01:16:07पुरी जिंदगी ही एक बहुत बड़ी रिचूल है
01:16:11तोड़ देर पहले पूछा था फिर पूछ रहा हूँ
01:16:13रिचूल न होती तो आप करते क्या?
01:16:17रिचूल न हो तो आप परिशान हो जाएंगे, आपको सौझ में नहीं आएगा जी हैं कैसे?
01:16:20क्योंकि सब कुछ तो एक रिचूल है
01:16:24चार दिन बाद बेटे का जनम दिन आ रहा है, जनम दिन मनाना है, यह क्या है? रिचूल है, और क्या है?
01:16:28यह तो प्यार तो 365 दिन होता है, रिचूल न होती तो आप में से आधे लोग तो शादी बया भी न करते, पर है तो करना ही है, ऐसा करना होता है, इस अपोस्ट तो बी दन दिस वे, सपोस्ट तो बी दन दिस वे, इस मेंट तो बी दन दिस वे, इस मेंट तो बी दन दिस वे
01:16:58गरिमाहीन बात क्या हो सकती है
01:17:00कोई आपने सम्मान है की नहीं है
01:17:01तुम जिन रिचुल्स का पालन कर रहे हो
01:17:05तुम जानते भी नहीं हो
01:17:06रिचुल्स कहां से आ रही है
01:17:07उनका अर्थ क्या है किसने बनाई क्यों बनाई
01:17:09कुछ नहीं जानते पर उनका पालन किये जा रहे हो
01:17:11इस से ज्यादा इंडिक्निफाइट बात कोई हो सकती ही
01:17:14हम क्या जरा भी अपनी इज़त नहीं करते
01:17:17कोई कह रहा है ऐसे करो ऐसे जी हो
01:17:18ऐसे बोलो ऐसे खाओ ऐसे पी हो ऐसे चलो
01:17:21हम कहते हैं ठीक है हम सर जुका देंगे
01:17:23मान लेंगे हम क्या है हम गुलाम है
01:17:25हम क्या है
01:17:27हम सवाल नहीं कर सकते
01:17:29ऐसे ही तो होता है
01:17:30ऐसी तो करना होता है
01:17:32common sense है ना सभी करते हैं
01:17:34यह कोई जवाब है
01:17:35यह कोई जवाब है
01:17:39narrow identities
01:17:46N
01:17:47मैं कौन हूँ
01:17:51मैं ब्रामन हूँ कि ठाकर हूँ
01:17:55कि नाई हूँ
01:17:57मला हूँ
01:17:59जाटव हूँ
01:18:00कुछ हूँ
01:18:01मनुष्य थोड़ी हूँ
01:18:05मनुष्य थोड़ी हूँ
01:18:09बिहारी हूँ
01:18:11तिलगू हूँ
01:18:12तमिल हूँ
01:18:13मनुष्य थोड़ी हूँ
01:18:14और ये तो मैंने
01:18:18बहुत बड़े-बड़े वर्ण बोल दिये
01:18:21अगर मैं बोल रहा हूँ
01:18:22ब्राह्मनक्षत्रिय व्याज इत्यादितो
01:18:24इनके भीतर तो हजारों
01:18:27सब किटेगरीज होती है
01:18:28जाती, उप जाती
01:18:30उप उप उप उप उप उप उप उप
01:18:33जाती, फिर उसमें भी गोत्र और
01:18:35अब मैं ये सब कुछ हूँ
01:18:39ये मेरी आइडेंटिटी है
01:18:40और कोई किसी को अपना नहीं मानता
01:18:50उपर-उपर से काम चलाओ, वेभारी कृष्टे भले ही रख लो
01:18:53बीतर-बीतर दरार बनी रहती है
01:18:54और अभी मैंने हिंदू, मुस्लिम वो सब तो बात करी ही नहीं
01:18:58वो तो बाती और आगे की है
01:19:01आप जिनको हिंदू बोलते हो, वही आपके अपने नहीं हैं
01:19:05तो आप मुसल्मानों को, इसाईयों को, बॉद्धों को, किसी और को अपना क्या मानोगे
01:19:09आपके ही जो राष्टर के लोग है, आप उन्हें ही अपना नहीं मानते है
01:19:17तो आप इरान या आफरीका वालों को, या रूसियों को, या जर्मनों को अपना क्या मानोगे
01:19:23नेरो आइडेंटिटीज
01:19:31और जहाँ नेरो आइडेंटिटीज होती हैं, वहाँ पर कोई चालाक, शातिर आ जाता है
01:19:40अंग्रेजों जैसा, उन नेरो आइडेंटिटीज को, कैपिटलाइज करके, लिवरेज करके
01:19:48उनका इस्तेमाल करके, अपना उल्लू सीधा कर जाता है
01:19:53अंग्रेज धूर्त थे, शातिर थे, निश्चित रूप से
01:20:00लेकिन ये बात क्या हमारी अपॉलजी बन सकती है, डिफेंस बन सकती है
01:20:06या ये बात हमारे लिए और शर्म की होनी चाहिए, कि
01:20:09अरे किसी अच्छे आदमी के आगे सर जुक गया होता, तो भी कोई बात नहीं होती, अच्छे आदमी ये सर जुका दिया
01:20:15नहायद गिरे हुए लोग आए ये यूरोप से
01:20:18पैसे के लोभी हिंसक लोग आए ये यूरोप से
01:20:23और हमने उनके आगे सर जुका दिया
01:20:25और जिन कारणों से सर जुका दिया वो कारण
01:20:29वो कारण आज भी मौजूद है
01:20:33भारत ने उपनिशद पढ़े होते भारत नहीं हारता
01:20:49भारत ने श्री कृष्ण को गोपियों तक ही नहीं सीमित कर दिया होता
01:20:53गीता भी गुनी होती तो भारत नहीं हारता
01:20:56भारत ने जितना निवेश करा कर्मकांड में
01:21:06तमाम तरीके के धार्मिक आयोजनों में
01:21:09उसका आधा निवेश भी विश्वद्यालेयों में कर दिया होता भारत नहीं हारता
01:21:14भारत की हार उस दिन शुरू हो गई थी जिस दिन भारत ने ग्यान का अपमान करना शुरू किया था वो अपमान आज भी हो रहा है
01:21:28ग्यान शब्द को लेके ही नजाने कितनी गालियां चल रही है
01:21:31और मनुष्य को मनुष्य ग्यान ही बनाता है
01:21:39मनुष्य की पहचान है चेतना और चेतना मानने जानना चेतना मानने मानना नहीं होता
01:21:46चेतना मानने भावना भी नहीं होता चेतना मानने होता है जानना
01:21:49मनुष्य को मनुष्य ही ग्यान बनाता है
01:21:52consciousness माने belief तो नहीं होता न
01:21:56आप जिन्दा तभी माने जाते हो न जो आप conscious हो
01:21:59consciousness माने belief या emotion नहीं होता
01:22:02consciousness माने क्या होता है
01:22:03knowing
01:22:04और जो लोग जो समुदा है
01:22:07जो राष्ट्र ग्यान को
01:22:09चेतना को knowing को
01:22:11सम्मान देना बंद कर देगा
01:22:13उसके साथ कुछ अच्छा नहीं होगा
01:22:15जहां रट्टे वाजी बहुत बड़ी बात
01:22:21मान ली जाएगी क्या रे इसने इतना रट लिया
01:22:23अब ये board topper हो गया
01:22:25मैं दस्वी में आये से असी टॉपर था
01:22:31बढ़ियां उस समय इतने
01:22:35नंबर नहीं आते थे मेरे पिच्चानर प्रदिशात आये थे
01:22:37धूम
01:22:3811 वी में आया मुझे पहली बात ये बोली गई
01:22:42कि बेटा ये दस्वी और भूल जाओ
01:22:43अगर ITJ लिखने जा रहे हो
01:22:47तो उसमें और
01:22:51जो ISC तुमारा board है उसमें
01:22:53बहुत समानता नहीं है
01:22:54बिल्कुल हो सकता है
01:22:56कि तुम board topper हो
01:22:57और जब तुमारे सामने तगड़े सवाल आएं
01:23:02जेए के दूसरे entrances के
01:23:04तो तुमारे छक्ये छूट जाएं बिल्कुल हो सकता है
01:23:06बलकि ज़्यादा तर toppers के साथ होता है
01:23:08क्योंकि रट्टा मार के काम चल जाता है
01:23:12भाई
01:23:13memorization पर
01:23:19और memorization में बुरा ही नहीं है
01:23:21memory भी अच्छी faculty हो सकती है
01:23:23the problem is
01:23:24memorization without understanding
01:23:26memorization without understanding
01:23:30समझते हैं कुछ नहीं है
01:23:32रट सब कुछ रखा है
01:23:33अभी आपके सामने आपे कोई आकर खड़ा हो जाए
01:23:37और आपको दस लोग दंदना के सुना दे
01:23:39वेदों के
01:23:40आप कोगे अचारे तु नीचे उतर ये दे
01:23:43प्रचंड गया नहीं आ गया
01:23:45और खासकर अगर उसने पारम पर एक परिधान पहन रखे हो
01:23:50वेशभूशा बिलकुल डाल रखे हो
01:23:52जैसे अभी बिलकुल बारवी शताबदी से उठके आया है
01:23:55और मैं उतर हूँ नहीं तो आप ही आओगे खीच के मुझे नीचे उतार दो को
01:24:02देवता आ उतर इतुए हैं
01:24:04किस बात को सम्मान दे रहे हो आप रट्टे को
01:24:11किस बात को दे रहे हो रिचूल को
01:24:13किस बात को दे रहे हो एक्स्टरनल अपिरेंस को
01:24:15होना तो यह चाहिए
01:24:25कि अगर कोई अतीत में बैठा हुआ है तो तो तुम उसको अतीत में
01:24:29डिस्पैश कर दो भेज दो
01:24:31जब तुझे अतीत में ही रहना है
01:24:35अतीत के कपड़े पहन रहा है
01:24:38अतीत जैसी बाते कर रहा है
01:24:40अतीत के रस्मों रिवाज में घुसा हुआ है
01:24:42तो तेरी टाइम ट्रवैली करा देते हैं
01:24:46तुझे भेजी देते हैं ना पौरानिक काल में सीधे
01:24:49क्योंकि तू वहीं से आया हूँ अलग रहा है बिल्कुल नमुना
01:24:52तो तो 21 शताबदी में है ये क्यों
01:24:55सांस तो 21 शताबदी की हवा में ले रहा है
01:24:59इस्तिमाल तो 21 शताबदी के विज्ञान का और सुविधाओं का कर रहा है
01:25:03और बनके तू बैठा हुआ है बारवीश थापदी का नमूना तो तुझे बारवीश थापदी में वापस भेज देते हैं
01:25:09होना तो ये चाहिए पर होगा इसका बिलकुल उल्टा
01:25:12आज भी हमारे संस्कृतिक मन में
01:25:17बहुत इज़त है उन सब चीजों की जिनको हम जानते समझते नहीं है
01:25:23और उनकी इज़त हम इसलिए करते क्योंकि हम उनको समझते नहीं है
01:25:26तब ही तक करते हैं उनकी इज़त जब तक हम उनको समझते नहीं है
01:25:29संस्कृत में वो वेक्ति जो कुछ बोल रहा है बहुत संभब आपको बता दिया जाए उसका अर्थ क्या है तो इज़त ओदर जाए
01:25:36अब बोले इतनी सधरन सी बात थी पर उस संस्कृत नहीं बोलेगा आपसे वो ऐसे बोलेगा
01:25:41तो आप ऐसे इंप्रेस हो जाओ गे
01:25:45आपनी को गे
01:25:48ठैर जै इंसान ब�yn जा
01:25:49अब आज की भाशा ही बता दे
01:25:52बोल के रहा है
01:25:54और तेरी जो बात है उसमें कुछ दम होगा
01:25:56तो तुझे लगना तेरी बात
01:26:00आज की जन्दगी जिंदग्य किसी काम की होगी
01:26:02तो तुझे लगना तुझे लगना तेरी बात
01:26:05आज की जो हमारी समस्या हैं उनको सुलजाती होगी
01:26:07तो तुझे सम्मान दे देंगे
01:26:09हम यह नहीं कहते
01:26:12जवान से बुढ़ा लड़ेगा तो जवानी जीतेगा
01:26:24भारत आज भी मन से बहुत बुढ़ा है क्योंकि अतीत में जी रहा है
01:26:30हजार साल, दो हजार साल पीछे जी रहा है, बहुत बुढ़ा है भारत
01:26:34भारत को जवान होना पड़ेगा
01:26:36और जवानी का अक्षे स्रोत
01:26:47जो काला तीत है, जिसको आप नहीं कह सकते कि इतिहासिक है
01:26:52इतिहासिक काल होता है, वो काल से परे है
01:26:55वो हमारे पास था, आज भी है, पर हमारे पास उसके लिए सम्मान नहीं
01:27:00बलकि हमने साजिश करी है वेदानत के खिलाफ
01:27:02हमने वेदानत के इतने विक्रत, इतने गंदे अर्थ करे है
01:27:07सच तो यह है कि आम आदमी जिसको अपना धर्म बोलता है
01:27:12उसका वेदान से कोई लेना ही देना नहीं है
01:27:14आप कहते हो आप सनातनी हो, सनातियों का धर्म तो वैदिक हुआ
01:27:18सनातनी का धर्म तो वैदिक हुआ
01:27:21पर आप जिसको अपना धर्म बोल रहे हो, आप जिस धर्म का विवहार करते हो, उसमें तो कुछ भी वेदान सम्मत नहीं है, बलकि आप वेदान से बिल्कुल उल्टा चलते हो, इसलिए मैंने एक बार कहा था कि भारत में तो सौ हिंदू भी नहीं है, बात आ रही है समझ में,
01:27:51था ही नहीं, हमारा कोलोनाईज होना, अंग्रेज हम पर छा गए, हमें कोलोनाईज कर गए, हमारा कोलोनाईज होना, ज्यादा बड़ी तरा सदी है, क्योंकि हमारे पास ग्यान था, पर हमने उस ग्यान को जूता मार दिया, हमने का ग्यान नहीं चाहिए, अंधभक्ती चाहि
01:28:21ये बहुत पुराना घाव है, मुझे भी लगा हुआ है, तुमने क्यों उस घाव को जाकर के खुरच दिया, अब खून तो बहेगा, मैं भी जब इतना सा था, तभी से मुझे इस बात पर हैरत है, और दुख है गहरा,
01:28:39कि जिस देश के बास गीता है, उसको गुलाम बनना क्यों पड़ा, फिर धीरे धीरे में बढ़ा हुआ, मुझे पता चला, इस देश के बास गीता है ही नहीं, यहां कोई नहीं समझता गीता, और और ज्यादा, रोंग्टे खड़े कर देने लिए बात ये थी, कि ज्यादा तर
01:29:09गीता, युद्ध जिताने वाली है गीता, जो गीता जानता है, वो कोई भी युद्ध कैसे हर सकता है, मैं कहता हूँ, वो मर जाएगा, बिल्कुल संभव है, ये भी संभव है, कि अर्जुन की भी मृत्ति हो जाती ही युद्ध में, लेकिन ये नहीं हो सकता था, कि अर्ज
01:29:39तो ताजुब क्या?
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