00:00। जो स्टेट के गवर्मेंट होती है, वो भी बरकास होती है, और फिर इलेक्चन लेना पड़ता है, ऐसा तो अभी तो ये 10-12 साल में नई हुआ, लेकिन मुझे याद है कि कुंचे-कुंचे समय में ये हो गये तो मुझे मैं पढ़ा है,
00:26और मारे स्वर्गे इंदराजी गांधी जब पंतप्रदान थी, तब 50 राज्य सरकारें बरकास कर दी, और आज 50 राज्य सरकारें के इलेक्शन जो हुए, उसमें खर्चा कितना होगा, और ये खर्चा तो भारत सरकार का कर्चा है,
00:56ये खर्चा तो ऐसे जो विकास के काम पे लगना, तो ऐसे इसमें भी बहुत खर्चा होता था, और होता ही,
01:06तो ऐसे में अपने यहां सोच रहें कि अभी सबी के इलेक्शन एक साथ हो जाए, एक साथ हो जाए, तो एक साथ होए तो उसका खर्चा कम होगा,
01:24और वो कर्चा हमारे भारत के विकास में लगेगा, और भारत के विकास में लगना ये बहुत अच्छी बात है,
01:34क्योंकि ऐसा कर्चा भी होता है, वो कम करने की भी अउशकता है, मुझे ये भी लगता है कि हमारे देश पे जो बहुत बार बार चुना होते हैं,
01:54अभी भी अपने राजे सरकार के नगर निगम के उगरे चुना होने वाले या जिल्ला परिश्यत पंचा समिती के भी इलेक्शन होने वाले कही राजों में वो अभी भी चालू है,
02:11तो इससे बार बार चुनाव करना है, ये भी अभी लोगों का पैसा भी खर्च होता है, समय भी खर्च होता है, इसलिए अब भारत सरकार ये सोच रहें कि एक बार चुनाव हो जाए,
02:27लेकिन उसको उनका कई लोगों का विरोध भी है, विरोध तो समझ में नहीं आता क्यों है, लेकिन वो अपने मशिन पे, इवेब पे मद्दान करते हैं,
02:43तो उसके बज़ा बालेट पेपर पे मद्दान करो, ऐसी मांग आती है, बार बार आती है, क्यों, काई के लिए, तो ये इसलिए तब बहुत बार हुआ, बहुत जग्या भी हुआ,
03:06किसी भी क्यों एक कागत देते, और बोलते एक कागत तो पेटी में डाल दे, और वहां की मत्दात्र का जो रही, वो कोरी रही, उसके शिक्का मत मार ये, वो बात विसाजा लेकर, और बहार में आये, तो वो ऐसे मद्दाता को देते, कि जो मद्दाता अपने को ओड नहें �
03:36और ये पत्री का लेके जा, ये शिक्का मार वी, और ये वो पेटी में डाल, और कोरी पत्री का वापिस ला, और तेरा क्या हो लेके जा, ये तो बहुत जेगे था, और ये ये जो शिकायत है, निर्वाचन हादिकारी से, हमारे निर्वाचन आयोक के तरब भी ये शिकायत �
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