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माघ मेले के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी सरकार के बीच हुआ टकराव अब बड़ा विवाद बन चुका है. मौनी अमावस्या पर पालकी रोकने से शुरू हुआ मामला संत समाज और सरकार के आमने-सामने आने की कहानी बन गया. एक तरफ अविमुक्तेश्वरानंद माफी की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी परंपरा और व्यवस्था की बात कर रहे हैं. इस टकराव ने संतों को दो हिस्सों में बांट दिया है और सरकार को मुश्किल फैसलों के मोड़ पर ला खड़ा किया है. क्या यह विवाद संवाद से सुलझेगा या आंदोलन की राह पकड़ेगा, वीडियो में पूरा विश्लेषण देखें.

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~ED.110~HT.408~

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Transcript
00:00अविमुक तेश्वरानंद बनाम योगी की जंग में संथ समाज दो हिस्सों में बढ़ गया है।
00:30अविमुक तेश्वरानंद पालकी में सनान के लिए निकलते हैं।
01:00बात बढ़ती है, बहस होती है और फिर शिश्वरानंद नाराज होकर शिबिर के बाहर धरने पर बैट जाते हैं।
01:20वो साफ कहते हैं कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगेगा, वो वसंथ पंचमी का सनान नहीं करेंगे।
01:25उनके शब्दों में नाराजगी भी है और तर्क भी। उनका कहना है कि जब मौनी अमावस्या का सनान अभी हुआ ही नहीं है, तो वसंथ पंचमी का सनान कैसे किया जा सकता है।
01:35उनका आरोब है कि प्रशासन समाधान निकालने के बजाएं नोटिस देने में लगा हुआ है। ये बयान सीधे तोर पर सरकार की कारेशही पर सवाल खड़े करता है।
02:05लेकिन संदेश साफ है। सरकार इस पूरे विवाद को अनुशासन और व्यवस्था से जोड़ कर देख रही है, जबकि संथ समाज इसे सम्मान और परंपरा का मुद्दमान रहा है। यहीं से संथ समाज खुल कर दो हिस्सों में बढ़ जाता है।
02:18कुछ संथ अविमुक तेश्वरानंद के समर्थन में खड़े नजर आते हैं, उनका कहना है कि प्रशासन को अहंकार छोड़ कर माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि सत्ता स्थाई नहीं होती है।
02:28वहीं कुछ संथ ऐसे भी हैं, जो मानते हैं कि सरकार व्यवस्था बनाये रखने की कोशिश कर रही है और टकराव की जगा समवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
02:37कोई दिल्ली तक अंदोलन करने की चेताव नहीं देता है, तो कोई भाषा और मर्यादा पर सवाल उठाता है।
02:42अविमुक तेश्वरा नंद बनाम योगी की ये लड़ाई किसी एक स्नान या एक पाल की तक सीमित नहीं रहती है।
02:48ये संत समाज को भी आईना दिखाती है और सरकार को भी। अब सवाल यही रह जाता है कि इस टकराव का समाधान समवाद से निकलेगा या टकराव और गहराएगा।
02:59संगम की लहरे शांत हो जाएंगी लेकिन इस विवाद की गूंज लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी।
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