Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर सूर्य क्यों बदलता है अपनी चाल? क्या है इसके पीछे का खगोलीय विज्ञान और पौराणिक रहस्य? जानिए आखिर क्यों भीष्म पितामह ने प्राण त्यागने के लिए इसी दिन का इंतजार किया था.
Makar Sankranti marks the transition of the Sun into the zodiac sign of Capricorn (Makar). This video explains the astronomical significance of Uttarayan, the mythological stories of Sun and Saturn, and why Bhishma Pitamah chose this auspicious day to leave his mortal body. Explore the cultural diversity of India through festivals like Pongal, Lohri, and Bihu.
00:00जब कड़ाके की ठंड में पूरी धर्ती ठिटोर रही होती है और धुन की जादर चारो और लिप्टी होती है तबाकाश के समराट अगवान सुर्या अपनी दिशा वदल कर एक नए युग का सूत्र पात करते हैं
00:20ये केवल कलेंडर की एक तारीख नहीं बलकि अंदकार से प्रकाश और जड़ता से गती की और बढ़ने वाली वो एक अच्छी घड़ी है एक महामूरत है जिसे हम मकर संगरांती के नाम से जानते हैं
00:33क्या आपने कभी सोचा कि एक ही दिन पूरे भारत में कहीं पतंगे उड़ती है तो कहीं आग जलाई जाती है कहीं नदियों में आस्था की डुग्की लगाई जाती है तो कहीं दिल के लड़्डू आय जाती है
00:44इस विविदता के पीछे चिपा है वो खगूलिय विज्ञान और पौराणे के रहस्या जो की हजारों सालों से भारतिय संस्कृती की रीड बना है
00:52बगर संक्रांती नाम के बीचे एक बहुती रूचक अर्थ छिपा है जो तिशास्त्र में संक्रांती का अर्थ होता है संक्रमन या एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना
01:02जब नौ ग्रहों के राजा सूर्य देव भनु राशी की अपनी यात्रा पूरी कर अपने पुत्र शनी के राशी मकर में प्रवेश करते हैं तो इस विशेश घड़ी को मकर संक्रांती कहा जाता है
01:13ये समय इसलिए भी खास है क्योंकि इसे दिन सूर्य दक्षनायन से उत्रायन की और मुड़ जाते हैं
01:19धर्मिक मान्यताओं में उत्रायन को देवताओं का दिन कहा गया जिसका अर्थ है कि अब सकारात्मा कूचा और शुपकार्यों का समय शुरू हो गया
01:27इस पर्व की सबसे खूट सूरत बात है इसकी विविधता उत्तर भारत खासकर बिहार और उत्र प्रदेश में इससे खुचोडी के नाम से जाना जाता है जहां जावल और डाल का मेल जीवन की साधगी और एठा को दर्शाता है
01:40पंजाब में ये लोडी की अगनी में एक नई फसल की आहूती बनकर धदकती नजर आती है तो दक्षन भारत में पूंगल के रूप में समरिधी का संदेश लाती है असम में इसे भोगली विहू कहते हैं और गुचरात के आसमान में रंग बेरंगी पतंगे उत्तरायन का च
02:10कड़वाहड भूल कर रिष्टों में मिठा स्कूलने का आएक का बड़ा पसटी का प्रतीक है और आनिक कथाओं की गहराई में उतने तो मकर संक्रान्ती का नाता मूख्ष और पारिवारिक मिलन से जोड़ता है कहा जाता है कि सुर्यदेव और उनके पुत्रशनी के बीच स
02:40अपने प्राणत त्यागने के लिए इसे दिन का चुनाव किया था क्योंकि उत्रायन में देहत्यागने से मूख्ष की प्राप्ति होती है मगर संक्रान्ती के साथ एक महीने से चला रहा खर्मास का अशुप समय भी समाब्त हुआ और समाज में फिर से शादियों की शहनाई
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