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Makar Sankranti 2026: Why is Makar Sankranti celebrated? Makar Sankranti is celebrated when, during the month of Paush, the Sun moves out of Sagittarius and enters the Capricorn zodiac sign. This transition is the reason it is called Makar Sankranti. It is the only festival in India that is celebrated across the entire country, though with different names and traditions.

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?पौष मास में जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इसी कारण इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। यह भारत का एकमात्र ऐसा त्योहार है, जो पूरे देश में अलग-अलग नाम और परंपराओं के साथ मनाया जाता है।

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00:00हरवार्ष मकर संक्रांती बड़े ही धूमधाम से देश में सुरधा और उत्साह के साथ मनाय जाता है
00:10अब ऐसे मैं आपको आज किस वीडिम बताते क्या किर मकर संक्रांती क्यूं मनाय जाता है और इस देन खुचरी खाने की परंपरा क्यूं है
00:17लेकिन उसे पहले नमशकार मैसे तो शिराबोल्ड स्काई देफ रहे हैं
00:20पोश मास में जब सूर्य धनु राशी को छोड़कर मकर राशी में प्रवेश करता है तब मकर संकरांती का पर्व मनाय जाता है और सूर्य धनु राशी से मकर राशी में प्रवेश करता है इसलिए इसे मकर संकरांती के नाम से जाना जाता है अब एक मात्र ऐसा तहवार है जि
00:50राशी में प्रवेश करने के दिन ही मनाया जाता है
00:53और सूर्य समाननिता 12, 13, 14 या फिर 15 जनवरी में से किसी भी एक दिन ही मकर राशी में प्रवेश करता है
01:00आएब आपको बताते ही कि आकिर मकर संक्रान्ती क्यों मनाते हैं
01:04अब यह माना जाता है कि भगवान सूरे अपने पुत्र शनी से मिलने स्वयम उनके घर जाते हैं और शनी मकर राशी के स्वामी है अब इसलिए इस दिन को मकर संक्रान्ती के नाम से जाना जाता है
01:15महीं पवित्र गंगा नदी का भी इस दिन धर्ती पर अवतरण हुआ था अब इसलिए भी मकर संक्रान्ती का पर्व मनाय जाता है
01:22महीं माभारत में पितामा भेश्म ने सूरे को उत्रायन होने पर ही स्वक्षा से शरीर का परित्वाग्य किया था
01:29अब इसका कारण यह था कि उत्रायन में दे छोड़ने वाली आत्मा या तो कुछ काल के लिए देवलोक में चली जाती है या फिर पुनर जर्म के चक्र से उन आत्माओं को छुटकारा मिल जाता है
01:39जबकि दक्षिनायन में दे छोड़ने पर आत्मा को बहुत काल तबको अंद्वकार का सामना करना पड़ सकता है
01:45सुएम भगवान शुरी कृष्णिंव ने भी उत्रायन का महत्तों बताते वे कहा है कि उत्रायन के छे मास के शुब काल में जब सूरे देव उत्रायन होते हैं और प्रिथवी प्रकाश में रहती है तो इस प्रकाश में शरीर का परित्याग करने से वेक्टी का पुनर जन्म �
02:15खिचडी क्यों खाय जाती है
02:17दरसल धार्मिक कताओं में मकर संगरांती पर खिचडी खाने की परंपरा का संबन्द बाबा गोरकनाथ से जुड़ा जाता है
02:24कहा जाता है कि एक समय कटिन परिस्तितियों और आक्रमणों के कारण योगी और साधू नियमित रूप से भोजन नहीं बना पाते थे
02:31अब ऐसे में बाबा गोरकनाथ ने दाल, चावल और मौसमी सबजीयों को एक साथ पकाने की सला दी
02:36अब यह भोजन कम समय में तयार हो जाता था और लंबे समय तक उरजा देता था
02:41वहीं धीरे-दीरे या सधारण और पौश्टिक भोजन साधू संतों से समाज तक पहुँचा और मकर संक्रान्ती से जुड़ गया
02:47तब इस देन खिचरी बनाना और ग्रहन करना शुब मानना जाने लगा
02:51और दोस्तों इसी तरीके के और भी कई मानने ता है जैसे जोतेश के अनुसार मकर संक्रान्ती पर सूर्य का मकर राशी में प्रवेश एक शुब परिवर्तन माना जाता है
03:00अब इस दिन क्या गया दान विशेस फल देता है
03:03खिचडी में परियुक्त चावल दाल और घी को सात्विक आहार माना गया है
03:07जो सूरे को और पित करने के लिए उप्युक्त समझा जाता है
03:10अब इसलिए भी इस दिने खिचडी का सेवन हम करते हैं
03:14तो दोस्तों फिलाल इस वीडियो में इतना ही आपको जानकारी कैसे लिए हमें कमेंट में लिखकर ज़रू बतेएगा
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