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  • 1 day ago
आपके_रुपये_की_गुप्त_कहानी

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00:00नमस्कार! कभी सोचा है कि हमारी जेब में रखा वो नोट वो सिर्फ पैसे से कहीं बढ़कर है? उसकी अपनी एक कहानी है. एक बहुत ही लंबा और दिल्चस्प सफर. तो आज हम उसी सफर की अनकही कहानी को परत-दर-परत खोलेंगे.
00:14जरा एक मिनट के लिए कोई भी नोट हाथ में निकर देखिए. ये कहां बना होगा? हमसे पहले ये कितने लोगों के पास से गुजरा होगा? चलिए, आज इसके पूरे जीवन चकर को समझते हैं. शुरू से लेकर आखिर तक.
00:27तो सबसे पहले एक बहुत ही बुनियादी सवाल. कागस का ये टुकड़ा आखिर पैसा है क्यों? क्योंकि ये लीगल टेंडर, यानि वैद मुद्रा है. इसका सीधा सा मतलब है कि इस पर लिखे मूले की गैरंटी खुद भारत सरकार देती है. RBI जो भी नोट जारी करता है
00:57प्रिंटिंग प्रेस में जहां ये पहली बार बनता है. चलिए इसके जन्म की प्रक्रिया को थोड़ा करीब से दिखते हैं. और यहीं पर हमें पहला सप्राइज मिलता है. भारतिये बैंक नोट असल में कागस के होते ही नहीं है. ये 100% कपास यानि कॉटन से बने होते हैं.
01:27नासिक, देवास, मैसूर और सालबोनी में. और सिक्के ढालने वाली टकसाले भी सिर्फ चार हैं. इन सभी को भारत सरकार और RBI बहुती कड़ी निगरानी में चलाते हैं. वक्त के साथ हमारे नोटों का डिजाइन भी काफी बदला है. आजादी के बाद अशोक स्तंभ वाल
01:57और देश की पहचान भी जलकी है. तो ठीक है, नोट अप छप चुका है. लेकिन प्रिंटिंग प्रेस से निकल कर हम सब की जेब तक पहुँचना. ये अपने आप में एक बहुत बड़ा सफर है. आईए सफर के दूसरे पड़ाओ को समझते हैं. ये एक बहुती जबरदस स
02:27वहां से कैश निकालते हैं और अपनी ब्रांच में लाते हैं. और आखिरकार, ATM या बैंक काउंटर के जरिये वो नोट हम तक पहुँचता है. सच में ये हमारी एकॉनमी की लाइफ लाइफ लाइन है. और ये नेटवर्क कितना विशाल है, इसका अंदाजा इस नमबर से ल
02:57असली और नकली नोट में फर्क पता किया जा सकता है. RBI ने इसे आसान बनाने के लिए एक बहुत सिंपल सा नियम बताया है, C, Feel और Tilt, यानि देखें, महसूस करें और फिर नोट को जुकाएं. चलिए, इन तीनो स्टेप्स को फटा-फट समझ लेते हैं. पहला स्टेप, C
03:27आपको एक सीधी लाइन की तरह दिखाई देगी. दूसरा स्टेप, Feel. अब जरा नोट को उंगलियों से चुईए. 100 रुपे या उससे ज्यादा के नोटों पर गांधी जी का चित्र, RBI की मोहर, ये सब आपको थोड़ा उबरा हुआ महसूस होगा. साथ ही, किनारों पर जो
03:57से बड़े नोटों पर जो उसका नंबर लिखा होता है, उसका रंग हरे से नीला हो जाता है. ये असली नोट की एक बहुत पकी पहचान है. हजारों हाथों से गुजरने के बाद हर नोट का सफर एक दिन तो खत्म होता ही है. जब वो पुराना, मैला या भट जाता है, तब
04:27ना ही उन्हें मोडा तोड़ा जाए, ताकि उनकी उम्र लंबी हो सके. RBI दो तरह के खराब नोटों में फर्क करता है. एक होते हैं soiled note, मतलब गंदे note, जो बहुत ज्यादा इस्तमाल से मैले हो गए हैं. और दूसरे होते हैं mutilated note, यानि कटे-फटे note, जिनका कोई हिस्सा ग
04:57जैसे 50 रुपए से बड़े note के लिए, अगर 80 फीजदी से ज्यादा हिस्सा है, तो आपको पूरी कीमत वापिस मिलेगी, लेकिन अगर 40 फीजदी से भी कम हिस्सा बचा है, तो कुछ नहीं मिलेगी. और जब कोई note चलन के बिलकुल लायक नहीं रहता, तो bank उसे RBI को भेज �
05:27का एक जरिया भर नहीं है, असल में ये उससे कहीं ज्यादा है, ये हमारे पहचान का एक हिस्सा है, हर note पर हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 15 क्षेत्रिय भाशाएं भी होती है, ये हमारे देश की भाशाई विविदता का एक बहुत ही सुन्दर प्रतीक है, जरा नई सीर
05:57हाथ में आए, तो एक पल के लिए रुकिएगा, शायद अब उसमें सिर्फ एक नंबर नहीं, बलकि एक पूरा सफर, एक पहचान और हमारे देश के एक कहानी भी दिखाई देगी, सोचने वाली बात है है न?
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