00:00दिल्ली की चकाचौन के पीछे एक ऐसा इलाका है, जहां रात के बाद सिर्फ खामोशी नहीं, चीखे गूंचती हैं, उस जगे का नाम है संजयवैन।
00:30ये जंगल एक दूसरी ही दुनिया में बदल जाता है, लोग कहते हैं, यहां किसी जमाने में प्राचीन साधू और तांतरिक साधना किया करते थे, कुछ तो मोक्ष पा गए, लेकिन कुछ, मृत्यू के बाद भी नहीं गए, और अब वही आत्माए, इस वन के अंधेरे में भ
01:00एक दिन उसे अपने फॉलोर से एक मेसेज मिला, सर, आप संजय वैन जाईए, वहां कुछ ऐसा है, जो आपके कैमरा में कभी कैप्चर नहीं हुआ होगा, राघव को ये चैलेंज पसंद आया, उसने अपनी दोस्त काव्य को साथ लिया, जो दिल्ली की एक डॉकिमेंटरी �
01:30कुछ है, पर क्यूरियोसिटी उन पर भारी बढ़ गई, रात के ग्यारकर दस मिनिट पर दोनों ने अपनी गाड़ी जंगल के गेट पर रोकी, हवा ठंडी थी, पर भीतर कुछ दमगूंटू था, जैसे जंगल खुद उन्हें अंदर नहीं आने देना चाहता, हर कदम पर
02:00तो आज वो खुद को जरूर दिखाएगा, कुछ दूर जाने पर एक टूटा हुआ मंदिर दिखा, दीवारों पर पुराने तंत्र मंत्र के निशान थे, राघव ने टोर्च उस पर डाली तो देखा, किसी ने हाली में वहां तांत्रिक पूजा की थी, सड़े हुए निम्
02:30काव्य के कैमरे ने कुछ रिकॉर्ड किया, एक धुंधला सा आकार, जो एक साधू की परचाई जैसा था, राघव ने धीरे से कहा, क्या तुमने देखाए, काव्य का चेहरा सफेद पड़ गया, वो बोली, हाँ, लेकिन ये आदमी नहीं था, और तभी, किसी ने पीछे से
03:00कोई नहीं था, राघव के कैमरे का फोकस अपनिया ब्लर होने लगा, और बैग्राउंड में सिर्फ एक गहरी परचाई दिखाई दी, धीरे धीरे दोनों जंगल के अंदर और गहराई में बढ़ते गए, पेडों की जड़े किसी सर्ब की तरह जमीन से बाहर निकली थी, हर
03:30जाते हैं, जवाब में सिर्फ एक जोरदार चीक सुनाई दी, काव्य डर कर गिर पड़ी, उसके कैमरे ने रिकॉर्ड किया, एक सफेद कपड़ों में लिप्टी महिला, जो पेड के पीछे खड़ी थी, और धीरे धीरे धुन्द में विलीन हो गई, कहते हैं संजय वैंड क
04:00यहां रुक जाओ, वापस मैट जाओ, पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया, अचानक दरगाह के अंदर से दर्वाजा अपने आप बंध हो गया, अंधिरा इतना गहरा की हाथ तक नजर नहीं आ रहा था, और फिर एक धीमी सी महिला की आवाज, तुम्हें यहां नहीं आना च
04:30और भारी होने लगी, राघव को ऐसा लगा, जैसे कोई उसके पीछे चल रहा हो, काव यह रोने लगी, चलो यहां से, प्लीज, पर राघव के कैमरे ने कुछ कैप्चर किया, एक कंकाल जैसा चेहरा, जो कुछ सेकंड के लिए लेंस के सामने आया, और फिर गाया, अचानक
05:00गूंचने लगी, काव्य ने भागनी की कोशिश की, लेकिन उसके पाव किसी जड में फस गए, राघव ने उसे चुड़ाया, पर उसी वक्त एक भयन कर हवा का जोंका आया, और दोनों के कैमरे बंध हो गए, सुबद छे बजे, जंगल के पास के गार्ड को एक छोटा कैम
05:30वो जिन्दा थी, पर कुछ बोल नहीं पा रही थी, उसकी आखे बार-बार सिर्फ एक ही दिशा में देखती, उस मंदिर की तरफ जहां साधू की परचाई दिखी थी, राघव का अब तक कोई पता नहीं चला, लोग कहते हैं, कुछ रातों में वो खुद अपनी आवाज म
06:00पर किसी की कहानी अधूरी रह गई है, संजय वैन अब भी वही है, सुबह की शांती में डूबा, पर रात में चीखों से गूंचता, अगर कभी जाना चाहो, तो दिन में जाओ, क्योंकि रात में वहाँ सिर्फ खामोशी नहीं, सजा भी है
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