00:00कहते हैं दिल्ली में दो तरह की कहानिया है एक जो लोगों ने सुनी है और एक जो अभी मिट्टी में दबी है मैं राघव महता एक डॉक्युमेंटरी रिसर्चर हूँ और इस बार मेरी खोज मुझे ले आई दिल्ली के दिल में बसे एक पुराने ब्रिटिश कब्रिस्तान मे
00:30जहाँ जिन्दा और मरे हुए के बीच की दीवार बहुत पत्ली हो चुकी थी राघव ने गेट खोला चरर की आवाज हुई अंदर हवा कुछ अलग थी ठंडी भारी और गीली मिट्टी की खुश्बू से भरी सामने पुरानी कब्रों की कतारे थी
00:48कुछ के नाम मिट चुके थे कुछ पर जंग लगी क्रॉस जूल रही थी एक बुढ़ा चौकीदार दिखा लाल्टेन लिए सफेद दाढ़ी वाला उसने बस एक वाक्य कहा शाम के बाद यहां कोई नहीं रुकता बाबू रात में आवाजे आती हैं राघव मुस्कुराया
01:18लेकिन शायद लौट नहीं पाओगे कबरों पर नाम थे कैप्टन जॉन निकॉलसन मेजर विल्फ्रेड एंड रॉबर्ट्स राघव ने अपने कैमरे से सब रिकॉर्ड किया उसकी रिसर्च नोट में लिखा था
01:321857 की लड़ाई में मारे गए सेकडों ब्रिटिश सैनिक यही दफन है कईयों की मौत इतनी अचानक हुई कि उनकी आत्माएं आज तक चैन से नहीं सोई
01:43राध का अंधेरा गहराने लगा लाल्टेन की लौक काप रही थी राघव ने ठंडी हवा में एक हलकी फुस फुस साहट सुनी
01:53वाई डिद यू कम बैक वो पल्टा कोई नहीं था बस एक पुरानी कबर के पास सूखी पत्तिया हिल रही थी
02:02जैसे कोई धीरे धीरे चल रहा हो राघव ने रात में तंबु लगाया कैमरा ओन किया और आवाजे रिकॉर्ड करने लगा
02:12करीब ग्यारव बजे रिकॉर्डिंग में एक अंजान हसी आई भारी गूंचती हुई वो पले करके सुनता रहा पर उसके आसपास कोई नहीं था
02:23रात के बारबजे कैमरे की स्क्रीम पर हलकी रोशनी दिखी जैसे किसी ने सफेद कपड़े में चलती परचाई कैद की हो
02:32वो खुद से बोला हैल्यूजनेशन होगा शायद हवा में मूवमेंट लेकिन स्क्रीन पर हल्प मी के अक्षर उभर आए खुद बखुद अब उसका चेहरा पीला पड़ चुका था
02:46अगली सुबह उसने चौकीदार से पूछा ग्रेव नंबर 37 पर कुछ अजीब दिखा कौन है वहाँ बूढ़ा बोला वो कैप्टन विल्फ्रेड की कबर है जिसने 1857 में अपने ही सैनिकों को गोली मार दी थी
03:02लोग कहते हैं उसकी आत्मा आज भी सजा काट रही है रात में वो किसी भी अकेले आदमी को अपने साथ ले जाता है राघव ने ठंडी सांस ली मैं डरने नहीं आया जानने आया हूँ
03:17शाम को उसने वही कबर ढूंग ली नंबर 37 कबर के पास खड़े होकर बोला विल्फ्रेड अगर तुम सच में यहां हो तो बस एक निशानी दे दो कुछ पल सन्नाटा फिर लाल्टेन बुझ गई हवा रुख गई और पीछे से किसी ने कहा राघव रन राघव पल्टा एक
03:47सेरा धुंद में छिपा पाव जमीन को छू भी नहीं रहे थे उसकी आखों से आसु गिर रहे थे जैसे सदियों से कोई दर्द बांटने आयो वो बोली तुम्हें यहां नहीं होना चाहिए यह जगे जिन्दा लोगों की नहीं है राघव बोला तुम कौन हो एंड रॉबर
04:17रोक कर रखा है अचानक हवा तेज चली लाल्टेन की लॉब उजी और वो गायब हो गई कबरों के पीछे राघव को एक पुरानी लेधर डायरी मिली कवर पर लिखा था कैप्ट विल्फ्रेड एगराट सो सत्तावन डायरी के अंदर लिखा था
04:35पन्ने पर ताजा खून के निशान थे जैसे अभी अभी किसी ने चुआ हो राघव का हाथ काप गया अचानक दूर वही औरत फिर दिखी अब रो नहीं रही थी बस घूर रही थी
04:58रात एक बजे पूरे कबरिस्तान में एक अजीब सरसराहट थी हर कबर के नीचे से जैसे कोई करवट ले रहा था
05:07राघव की लाल्टेन अपने आप गिर गई हवा में मिट्टी और राख उड़ रही थी
05:13अचानक कबर नंबर 37 की मिट्टी हिलने लगी उसमें से विल्फरेड का साया निकला आधा सड़ा हुआ चेहरा ब्रिटिश यूनिफॉर्म में
05:24वो बोला तुमने हमारी नीन तोड़ी है अब तुमें भी यहां रहना होगा
05:29राखव पीछे हटा पर चारों तरफ कबरे खुलने लगी हर कबर से एक परचाई उठ रही थी वो भागते हुए पुरानी चैपल में पहुँचा वही दीवार पर लिखा था
05:42विल्फ्रेड एन को छोड़ दो उसकी आत्मा निर्दोश है अचानक एन की आवाज आई उसने मेरा जीवन लिया पर मैं माफ करती हूँ
05:58रोश्नी फैल गए विल्फ्रेड का चहरा शान्थ हो गया और वो राक बनकर उड़ गया कबरिस्तान एकदम खामोश हो गया एन मुस्कुराई और हवा में गायब हो गए
06:11सुबह सूरज की पहली किरन कबरों पर पड़ी राघव बाहर निकला ठका हुआ लेकिन जिन्दा चौकीदार ने पूछा बाबू रात कैसे गुजरी राघव बस इतना बोला आज किसी की आत्मा को शान्ति मिली शायद मेरी भी वो कबरिस्तान से निकला पीछे मुड कर द
06:41कैमरे में आखरी फुटेज में कुछ और था एंडरोबर्ट्स खड़ी थी हलकी मुस्कान के साथ और पीछे लिखा था थैंक यू राघव राघव ने आत्माओं की मुक्ति देखी लेकिन उसके कैमरे में अब भी कोई अद्रिश्यत ताकत मौजूद थी कबरिस्तान शान
Be the first to comment