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Kanch Mahal–Sheesho Mein Band Aatma
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Fun
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00:00भारत के राजस्थान के सूने इलाके में एक जगे है जहां हवा भी फुस फुस आती है।
00:30भी देख सके। रात को जब दीपों की रोशनी उन शीशों से टकराती, पूरा महल सितारों साथ जगमगाता था। पर कहते हैं, जितना सुन्दर ये महल था, उतना ही अंधकार उसमें छिपा था। और एक रात, सब कुछ बदल गया।
01:00निकला था। और किसी स्थानिय ब्लॉग पर उसे कांच महल की कहानी मिली। गाव वालों ने उसे बहुत समझाया।
01:08बाबुजी, वहां मत जाईए। जो अंदर गया, वो कभी वापस नहीं आया।
01:14आरव ने मुस्कुरा कर कहा, मैं डरता नहीं, मैं कैमरे से सच दिखाता हूं।
01:21वो अपनी जीप लेकर रेगिस्तान के बीच उस पुराने रास्ते पर निकल पड़ा।
01:26जहां पेडों की शाखाएं जैसे आकाश को चीर रही थी।
01:31सूरज धल रहा था, हवा में धूल थी। और दूर से एक पुरानी हवेली का धांचा नजर आने लगा।
01:38तूटी दिवारें, जुके जूमर और फटे परदों की परचाईया।
01:44जैसे ही आरव ने भारी लकडी का दर्वाजा खोला।
01:48एक ठंडी हवा का जूंका उसकी रीड में उतर गया।
01:52महल के अंदर कदम रखते ही उसके जूतों के नीचे तूटा कांच चर्मराया।
02:08जाला, फ्लैश ओन किया, क्लिक, फ्लैश की रोशनी में कुछ पल को लगा जैसे किसी स्त्री की छवी उसके ठीक पीछे खड़ी है।
02:17लाल घागरा, लंबे बाल, माथे परबिंदी, आरव ने पीछे मुड़ कर देखा, कोई नहीं, बस हवा में वो इतर की मीठी खुश्बू फिर से फैली हुई थी।
02:29महल का बीच का कक्ष था, शीशा धरबार, सैकडों शीशे, हर आकार के, दिवारों पर, छट पर, यहां तक की फर्ष में भी, वो अपने कैमरे के साथ धीरे धीरे आगे बढ़ा, हर शीशे में उसकी परच्छाई अलग लग रही थी, कहीं मुस्कुरा रही थी, कहीं उदा
02:59पर जैसे ही उसने अगला फोटो लिया, फ्लैश में किसी की आखे जिल मिलाई, इस बार वो सिर्फ एक प्रतिविम नहीं था, वो किसी की आत्मा की जहलक थी, रात गहराने लगी थी, आरव ने अपने रिकॉर्डर में गाव वालों से सुनी बात दोहराई, रानी चमपाव
03:29धीरे धीरे ये मुस्कुराहट एक रास बन गई, रानी को जब सक्चाई का एहसास हुआ, उसने मालती को शीशों के कमरे में बंद कर दिया, अब इन शीशों में खुद को देखो, जब तक तुम्हारी सांस खत्म न हो जाए, तीन दिन तक वो कमरा बंद रहा, जब दर्व
03:59मालती की आत्मा उन शीशों में कैद है, जो कोई भी उसे देख लेता है, वो उसका अगला प्रतिविम बन जाता है, रात के करी 12 बचे, आरव ने कैमरा नीचे रखा, और अपने टेंट में आराम करने लगा, पर तभी शीशों से आवाज आई, टप, टप, टप, जैसे को�
04:29दिखाई दी, एक औरत की, जो धीरे धीरे मुस्कुरा रही थी, आरव ने धीरे से कहा, तुम कौन हो, आवाज आई, मैं तुम्हें देख रही हूँ, वो पीछे हटा, पर उसके पीछे वाले शीशे में अब उसका अपना चेहरा नहीं था, वहाँ वही औरत थी, लाल घा�
04:59तन, आरव डर गया, उसने भागने की कोशिश की, पर दर्वाजा अपने आप बंध हो गया, शीशे से कई आवाजे आने लगी, अब तुम भी हमारे साथ रहो, वो हमें भूली, अब तुम मत भूलना, आरव जोर से चिलाया, छोड़ दो मुझे, उसने कैमरा उठाया, ले
05:29होंट मुस्कुराने लगे, और फिर वो खुद मालती बन गया, वो चीखा, पर आवाज किसी शीशे में समा गई, अब हर शीशे में सिर्फ एक ही चहरा था, मालती का, अगली सुबह कुछ चरवाहे महल के पास आए, दर्वाजा खुला हुआ था, अंदर सब कुछ शान्त �
05:59मुस्कुराती हुई, चरवाहे डर के मारे भाग गए, कहते हैं, उस दिन से कांच महल के शीशों में अब दो आत्माय कैद है, मालती और आरफ, आज भी जब कोई उस जगे जाता है, वो देखता है, तूटी दीवारों में कुछ परचाईया अब भी हिलती है, कभी कभी हव
06:29जारा किसी न किसी शीशे में हमेशा के लिए रह जाता है, कभी कभी आत्माय मौत के बाद भी आईनों में जीती है, वो चाहती है कि कोई उन्हें देखे, महसूस करे, याद रखे, पर कांच, कभी सिर्फ दिखाता नहीं, कैद भी करता है, अगर इस कहानी ने आपकी रू�
06:59झाल
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