00:00शीप परिवार की दिब्वेकता हिमाले की गोद में जहां मोद भी मंतर बन जाता बहां बिराज मेरा महादे बोलेनाथ उनके साथ है मा पारवती जिनकी करुना से संसार को मा का अर्थ मिला गोद में बैठे है बाल गनेश ग्यान बुद्धियों सुबरम के देवता और सुमी
00:30वहां अबाब नहीं जहीं है शीप परिवार संतूलन सक्तियों सन्हे का अनंत सवरूप हर हर महादे जै मा पारवती जै महा कार
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