00:00बगवान जगरनात की आंखे इतनी बड़ी क्यूं है कहते है जब बगवान शीडी क्रिशन ने प्रिटवी से बिदा ली तो उनका दिब्बे हरिद्य आज भी डरकता रहा उसी हरिद्य से प्रकट हुए बगवान जगरनात बलवद और सुवद्रा जब इस कर्मेंड उनकी म�
00:30बे अमीर गरीब में भेड नहीं करती वो राजा रंग सबको एक समान देखती है बे हर दिशा में बगवान जगरनात की आंखे इतनी बड़ी है क्यूंकि उनका प्रेम भी उतना ही विशाल है जै जगरनात बगवान की जै हो
01:00झाल झाल झाल झाल
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