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Transcript
00:00हम छोटे थे ननिहाल जाते थे
00:02मेरी नानी महादेव की बड़ी भक्त थी
00:07अब मुझको जब वो देखें तो तो उनकी महादेव भक्ती एकदम ही परवान चड़ जाती थी
00:15वो कहती थी कि जब हमने शिव जी से बहुत पूजा प्रार्थना करी वर्दान मांगा
00:22तो ये लड़का पैदा हुआ मेरा जनम भी महाशिव रात्री को हुआ तो जब हम पहुँच जाएं तो और जादा
00:30शिव भक्ती के कारकरम हुआ करें तो एक वो कैसिट लगा करके सुना करती थी
00:39तो उसमें वो बीच में एक पंक्ति आती है कि उंचा जो उड़ता है वो निश्चे ही नीचे आएगा और जो बैठा है धरती पर उसे नीचे कौन गिराएगा
00:52तो बाकी सब बाते तो चलो जैसी थी वैसी थी पर ये बात मेरे मन में वैठ गई
00:57अब जीवन की आत्रा समय का पहिया हम आगे बढ़े और जीवन ने हमें बहुत मौके दिये उपर उठने के उठे भी
01:06शिक्षा में अपने सब कामकाज में और फिर और आगे बढ़ते गए तो फिर दुनिया में थोड़ा नाम भी फैल गया
01:17ये सब हुता रहा एक के बाद एक करके लेकिन एक बात मैंने अच्छे से याद रखी बाहर बाहर से कोई मुझे उठा ले कितना भी भीतर से मैं जमीन पर ही बैठा रहूँगा मैं नहीं उठने आला
01:30ये मेरी नानी का अशिरवाद उनके हिसाब से मैं मादेओ का भेजा हुआ पारसल हूँ
01:42तो ये मादेओ की सीख कि जो बैठा है धरती पर उसे नीचे कौन गिराएगा तो मैंने कभी अपने आपको उपर नहीं उठने दिया आप मुझे कितना उपर उठा लो
01:54मैं अपनी नजरों में गिरा हुआ ही रहता हूँ धन्यवाद
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