00:00हिस्ट्री के डिस्कुशन में अक्सर गांधी जी और भगत सिंग को बहुत अलग-अलग करके दिखाय जाता है तो वे वास्ताव में इतने अलग-अलग है उंड का परिस्तियों का बहुत चीजों का फर्क है बहुत खुबसूरत होता अगर भगत सिंग और जीवित रह पाते
00:30तो वास्तों में परियाप्त सामगरी नहीं है ठीक से जान पाने की कि क्या होता यह बिलकुल हो सकता था कि किसी सुखद सहीं उपके चलते भगत सिंग जीवित रह पाते तो आप पाते कि 1935-1940 आते आते महत्मा गांधी और भगत सिंग में बड़ी मित्रता है यह तक हो सकत
01:00का पहला प्रधानमंत्रि बनने के लिए मात्मा गांधी भगत सिंग को मनुनीद कर रहे हैं सब हो सकता था समभावना तो कुछ भी हो सकता था इसलिए बोल रहा हूं कि ऐसा हो सकता था क्योंकि सच पर चलने वाले दो लोग बहुत देर तक अलग-अलग नहीं चल सकते हैं �
01:30पर कहीं ने कहीं आकर कि उनके रास्ते एक होई जाएंगे
Be the first to comment