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Transcript
00:00मनो विज्ञान और नियूरो साइंस दोनों का जो उपयोग है वो बेहोश रखने के लिए किया जा रहा है अभी और वो बाजारवाद द्वरा किया जा रहा है
00:09यह अटेंशन इकनॉमी है जिसने आपकी आखें पकड़ ली उसने आपकी जेब भी पकड़ ली
00:15आपको क्या लगता है यह जो अलग-अलग तरह के sports हैं यह क्यों इतने popular हो गए, प्रचलित हो गए मुझे बताईब तो
00:25क्यों हो गए क्योंकि sports होगा तभी तो add होगा ना आप सोचते हो कि match के बीच में add आ रहा है नहीं
00:31एड के बीच में मैच आ रहा है
00:33मैच चाहिए ताकि आपको एड दिखाया जा सके
00:37आप बहुत जल्दी बोल देते हो कि
00:39अरे फलाना क्रिकेटर मेरा
00:41वो कुछ नहीं है
00:42वो विज्यापन बेचने का जरिया है
00:44और विज्यापन दाता है
00:46एसे नए नए जरिये खोशते रहेंगे
00:48अब टीम का कोई नया कप्तान बनेगा
00:50आप देखेंगे विज्यापनों में वही चा गया है
00:52आप सोचते हो अख़वार आपके पास आता है
00:55ताकि आप ख़बरे पढ़ सको नहीं
00:57आप जो 10-15 रुपय अख़वार का देते हो
01:00उससे थोड़े ही चल रही है मीडिया इंडस्ट्री
01:03अख़वार चलता है विज्यापन से
01:05और चुके विज्यापन प्रमुख है
01:08इसलिए ख़वरे भी आपको वही दी जाएंगी
01:10जो विज्यापन से एलाइंड हो
01:12एक विज्यापन आपको अगर दिखाया जाता है
01:15मान लीज़े 8 सेकेंड 10 सेकेंड का है
01:17कमर्शियल
01:18करोणों लगते हैं पहले तो उसको बनाने में
01:21और फिर उसको एयर करने में भी
01:24दसियों करोड खर्च किये जाते हैं
01:27तो सोचो उसके एक एक सेकेंड में
01:30एक एक फ्रेम में
01:33कितनी चालाकी डाली गई होगी
01:36कि वो जो करोणों लगाए गए हैं
01:39वो वापस मिल जाएं उस पर ROI मिल जाए
01:42और आप उसको ऐसे देख लेते हो
01:44कि अच्छा अच्छा ये तो मुझे मुझे मुझे मुफ्त में
01:46एक एड दिखाया जा रहा है
01:47एड ही तो है एड देखने के पैसे थोड़ी लगते है
01:49इसने वो बनाया है वो बहुत शातिर आदमी है
01:52आप लोग कहते हो ना कि आचारे जी
01:55मीडिया आपको
01:57कवर क्यों नहीं करता आपकी उपेक्षा क्यों करता है
01:59अगर अखबार या
02:01मीडिया मुझे कवर करने लगे
02:03तो उनके एड़ोटाइजर्स भाग जाएंगे
02:05अगर सोशल मीडिया का एल्गॉरिदम मुझे सपोर्ट करने लगे
02:09तो उनके भी एड़ोटाइजर्स भाग जाएंगे
02:12बहुत सतर्क रहा गरिये
02:14बहुत सतर्क
02:15सब कुछ
02:16सिर्फ इसलिए है
02:18ताकि कोई आपसे अपना स्वार्थ सिद्ध कर सके
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