00:04लेकिन उसकी बीवी जो की दिखने में काफी जवाला मुखी है इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देती
00:11हलो मेरा नाम प्रिया शर्मा है मैं एक 20 साल की लड़की हूँ
00:16और मध्य प्रदेश की रहने वाली हूँ
00:19आज मैं आपको अपने साथ हुई एक घटना के बारे में बताना चाती हूँ
00:24यह एक कहानी के रूप में सुनाओंगी क्यों की मुझे लगता है कि इसके जरिये मैं इसे बहतर तरीके से व्यक्त कर पाऊंगी
00:33एक दिन मेरे माता पिता किसी काम से मुंबई गए हुए थे
00:37उस समय घर पर सिर्फ मैं और मेरा बड़ा भाई थे
00:41भाई की शादी हो चुकी है और उसकी पत्नी भी उस दिन कहीं बाहर गई हुई थी
00:47इस रात मेरे एक दोस्त का जन दिन था और मैं भी वहाँ जाने की तयारी कर रही थी
00:53मैंने अपने भाई से भी साथ चलने के लिए कहा और वहाँ तुरंत मान गया
00:59हम दोनों करीब छे बजे शाम को घर से निकले
01:03गारी में हम दोनों ही थे
01:05जैसे ही हम रास्ते में थे मुझे एहसास हुआ कि मेरे भाई की नजरे मुझे पर कुछ अलग तरीके से पढ़ रही थी
01:13वह कई दिनों से मुझे अलग नजरों से देख रहा था और अब मुझे इस बात की और भी ज्यादा चिंता होने लगी
01:21मेरा भाई अक्सर मेरी और ध्यान देता था लेकिन उसकी बीवी जो की दिखने में काफी आकरशक है इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देती
01:30मेरी भावी भी अक्सर किसी और लड़के के साथ समय बिताने में व्यस्त रहती है
01:36घर में एक अजीब सा माहौल बना रहता था जहां किसी को किसी के चरित्र की परवाण नहीं थी
01:42मेरी मा भी इस मामले में काफी अलग है
01:46वह भी पैसो के लिए किसी के साथ भी कोई भी काम करने को तयार हो जाती है
01:52जब घर का माहौल इस तरह का हो तो एक इनसान सही रास्ते पर कैसे चल सकता है
01:58लेकिन मैंने हमेशा कोशिश की कि मैं अपने आपको इस सबसे अलग रखूँ
02:03मैंने कभी किसी लड़के के चक्कर में नहीं पड़ी और अपनी इज़त की हमेशा फिक्र की
02:09पर जब ऐसी स्थिती बन जाए कि आप अकेले हों और आपके साथ एक लड़का हो और वह भी अंधेरी रात में तो हालात और भी चुनौती पूर्ण हो जाते हैं
02:21जैसे जैसे हम उस रात गाड़ी में आगे बढ़ रहे थे मेरा मन बेचैन होने लगा
02:26भाई का बरताव मुझे अजीब लग रहा था लेकिन मैं उसे नजर अंदाज करने की कोशिश कर रही थी
02:33रास्ता सुनसान था चारों और अंधेरा चाया हुआ था और सड़के खाली थी
02:39उस माहौल में मेरे मन में डर बढ़ता जा रहा था लेकिन मैं शान्त रहना चाह रही थी
02:45हम थोड़ी देर और चले तभी मेरे भाई ने अचानक गाड़ी एक सुनसान जगह पर रोक दी
02:52मैंने पूछा भाई हम यहां क्यों रुके हैं उसने कोई जवाब नहीं दिया बस मुझे अजीब नजरों से घुड़ता रहा
02:59उस समय मेरे अंदर डर की लहर दोड़ गई
03:03उसकी आंखों में कुछ ऐसा था जिसे मैं समझने में असमर्थ थी पर जो कुछ भी था वह सही नहीं लग रहा था
03:10मैंने गाड़ी से उतरने की कोशिश की लेकिन उसने मेरा हाथ पकड़ लिया
03:15उसकी पकड़ मजबूत थी और वहां मुझे घसीतने की कोशिश करने लगा
03:20मेरा दिल जोड़ जोड़ से धड़कने लगा
03:23मुझे एहसास हुआ कि मैं कितनी बड़ी मुश्किल में फंस गई हूँ
03:28मैं चिलनाई भाई यहां क्या कर रहे हो छोड़ो मुझे
03:32पर उसने मेरी बात अंसुनी कर दी
03:35मैंने खुद को छुड़ाने की पूरी कोशिश की लेकिन वहां मेरे से ज्यादा ताकतवर था
03:41उसकी नियत अब बिलकुल साफ हो चुकी थी
03:44मेरा दिल घबरा गया पर मेरे अंदर कही ना कहीं हिम्मत भी थी
03:49मैंने अपने पैरों और हाथों से संघर्ष करना शुरू किया उसे धख्का देने की कोशिश की
03:55मैंने जोर से चीखना शुरू किया हालां की मुझे पता था कि इस सुनसान जगह पर मेरी आवाज कोई नहीं सुनने वाला था
04:04उस पल मेरे दिमाग में बस एक ही बात चल रही थी
04:08मुझे यहां से किसी भी तरह भागना है
04:11मैं खुद को बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही थी और अंता मेरे प्रयास रंग लाए
04:17मैंने उसे धक्का देकर खुद को छुड़ाया और तेजी से गाड़ी से बाहर भाग निकली
04:23मेरे दिल की धड़कन तेज थी और मैं बेधाशा दौड रही थी बिना यह जाने की कहां जा रही हूँ
04:30मैं अंधेरी रात में डौरती रही मेरे पास कोई रास्ता नहीं था बस खुद को बचाने की इच्छा थी
04:37रास्ते में कई विचार मेरे मन में घूम रहे थे
04:41क्या मैं कभी सुरक्षित रहूंगी क्या इस घटना के बाद मैं अपने परिवार में फिर से समान पा सकूंगी
04:48मैं बस खुद को बचाने में लगी रही
04:51कुछ देर बाद मुझे दूर से एक गाड़ी की हेडलाइट्स दिखी
04:56मैंने उसे रुखवाने की कोशिश की और सौभाग्य से वह गाड़ी रुख गई
05:01उसमें एक बुजर्ग दमपती थे और उन्होंने मेरी हालत देखकर तुरंत मेरी मदद की
05:07उन्होंने मुझे पास के पुलीस स्टेशन पहुँचाया
05:11पुलीस ने मेरी शिकायत सुनी और तुरंत कारवाई की
05:15मैंने अपनी कहानी पुलीस को सुनाई और उन्होंने मेरे भाई को गिरफ़तार कर लिया
05:21इस घटना ने मेरे जीवन को बदल दिया
05:24मुझे समझ आया कि ऐसे हालात में चुप रहना सही नहीं है
05:29अगर मैं उस समय भागने की कोशिश नहीं करती और अपनी आवाज नहीं उठाती तो शायद मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाती
05:37इस घटना ने मुझे बहुत कुछ सिखाया
05:40मैंने जाना कि चाहे हालात कैसे भी हूँ हमें कभी हाद नहीं माननी चाहिए
05:45हर मुश्किल से लड़ने का साहस होना चाहिए और अपने सम्मान की रक्षा के लिए हर संभव रयास करना चाहिए
05:53इस घटना के बाद मेरी जिन्दगी पूरी तरह से बदल गई
05:58पुलीस की मदद से मेरे भाई को जल्धी न्याय के कटगरे में खड़ा किया गया और उसे उसके किये की सजा मिली
06:05लेकिन यह सब कुछ आसान नहीं था
06:09समाज का सामना करना परिवार की तूटी हुई छवी और खुद की मानसिक स्थिती को संभालना एक लंबी और कठिन लड़ाई थी
06:17जब इस घटना की खबर मेरे माता-पिता तक पहुँची तो उनकी प्रतिक्रिया भी काफी चौकाने वाली थी
06:25मेरी मा जो पहले ही पैसे और स्वार्थ के पीछे अपनी नैतिक्ता खोच चुकी थी ने इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया
06:33उल्ता उन्होंने मुझ पर ही दोश मढ़ने की कोशिश की
06:37उन्होंने कहा तुने ऐसा क्या किया होगा जो तेरा भाई तुझ पर इस तरह नज़र डालने लगा घर की लड़कियां अगर ठीक से व्यवहार करें तो इस तरह की घटनाएं नहीं होती
06:48उनकी बातोंने मुझे और भी ज्यादा आहत किया
06:53मेरे पिता भी इस मामले में मेरी मा का ही साथ देने लगे
06:57उन्होंने कहा कि यहां मामला घर के भीतर ही रहना चाहिए था और इसे पुलीस तक नहीं ले जाना चाहिए था
07:04मेरे लिए यहाँ एक और बड़ा जटका था क्योंकि मैंने सोचा था कि माता-पिता हमेशा अपने बच्चों का साथ देते हैं, खास कर तब जब वे सही होते हैं
07:15लेकिन इस कठिन समय में मेरे कुछ दोस्तों और कुछ अंजान लोगों ने मेरा साथ दिया
07:21वे मुझे मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने में मदद करते रहें
07:26उनके सहारे मुझे यह समझ में आया कि मेरी लड़ाई सिर्फ मेरे भाई के खिलाफ नहीं है
07:33बलकि उस सामाजिक सोच के खिलाफ भी है, जो महिलाओं को हमेशा दोशी ठहराती है, चाहे गलती किसी की भी हो
07:40इस घटना के बाद मैंने तै कर लिया कि मुझे अब अपने जीवन की कमान खुद संभालनी होगी
07:46मैंने अपने पढ़ाई में फिर से ध्यान लगाया और जल्दी ही अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की
07:53अपने आत्म समान को बनाए रखते हुए मैंने एक नौकरी पाई और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने की दिशा में कदम बढ़ाए
08:02अब मैं किसी पर निर्भर नहीं हूँ और सबसे एहम बात यहाँ है कि मैंने अपने जीवन का नियंत्रन फिर से पालिया है
08:10मेरे भाई और परिवार से मैंने दूरी बना ली है
08:14यह आसान नहीं था लेकिन मुझे एहसास हुआ कि कुछ रिष्टों को छोड़ना भी जरूरी होता है खास कर जब वे आपकी आत्मा को चोट पहुचाते है
08:24मैंने एक नई शुरुआत की है जहां मैं अपनी शर्टों पर जी रही हूँ
08:29मैं अपने आत्मसमान और स्वतंद्रता की कद्र करती हूँ और दूसरों को भी यही सलाह देती हूँ
08:36मैं अब एक NGO के साथ जुड़ गई हूँ जो महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए काम करता है
08:44मैं उन लड़कियों और महिलाओं की मदद करने में लगी हूँ जो मेरे जैसी स्थिती का सामना कर रही है
08:50ताकि उन्हें किसी से डरने की जरूरत न पड़े
08:54यह घटना मेरे जीवन का सबसे कठे ननुभव था लेकिन इसने मुझे एक मजबूत और स्वतंत्र महिला बना दिया है
09:02मैं अब जानती नहीं कि किसी भी परिस्थिती में चुप रहना सही नहीं है
09:07हमें हमेशा अपनी आवाज उठानी चाहिए चाहे हाला कितने भी मुश्किल क्यों न हो
09:13यह दुनिया बहुत कठोर हो सकती है लेकिन अगर हम खुद पर विश्वास रखें
09:19और सही के लिए लड़े तो हम हर मुश्किल को पार कर सकते हैं
09:22मेरी जिन्दगी अब एक नई दिशा में आगे बढ़ रही थी लेकिन इस सफर में चुनौतियां अभी भी बाकी थी
09:31परिवार से दूरी बनाना और समाज की कड़वी बातों को सहना आसान नहीं था
09:36लोग तरहत्रा की बाते करते थे और अकसर मुझे नीचा दिखाने की कोशिश करते थे
09:43लेकिन इन सब के बावजूद मैंने ठान लिया था कि मैं अपने आत्मसमान और अधिकारों के लिए हमेशा खड़ी रहूंगी
09:50जब इस घटना की बाद बाहर आई तो समाज ने हमेशा की तरह मेरे ही चरित्र पर सवाल उठाना शुरू कर दिया
09:58कुछ लोगों का कहना था कि मैंने अपने परिवार को बदनाम किया है जबकि कुछ का मानना था कि मैं अपने ही भाई के खिलाफ जूट बोल रही हूँ
10:20कहीं दूर भाग जाना चाहिए जहां लोग मुझे पहचान न सकें लेकिन फिर मैंने खुद को यह याद दिलाया कि मुझे भागना नहीं है बलकि इस मानसिक्ता के खिलाफ लड़ना है
10:31इस घटना के बाद मेरे मानसिक स्वास्थे पर गहरा असर पड़ा
10:36अकसर रात को मुझे बुरे सपने आते थे और मुझे अतीर की उन घटनाओं की यादे बार-बार सताती थी
10:43मैं एक मनोवज्ञानिक के पास गई जिसने मेरी बहुत मदद की
10:48उन्होंने मुझे समझाया कि यह सब कुछ जो हुआ वह मेरी गलती नहीं थी
10:53और मुझे इसके लिए खुद को दोशी नहीं ठहराना चाहिए
10:57ध्यान और योग ने भी मेरी मानसिक स्थिती को संभालने में मदद की
11:02धीरे धीरे मैं अपनी मानसिक स्थिती पर काबू पाने लगी
11:06और अपने जीवन को एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने लगी
11:10समाज के तानों और परिवार के बरताव से निराश होकर मैंने एक बड़ा फैसला लिया
11:17मैंने अपने शहर को छोड़ कर एक नए शहर में बसने का निरने लिया
11:21यहां आसान नहीं था लेकिन मैं जानती थी कि अगर मुझे अपनी पहचान और इज़त को बनाए रखना है
11:28तो यहां कदम उठाना जरूरी था
11:30मैंने एक नए शहर में एक नौकरी तलाश की और वहां अपनी नए जिन्दगी शुरू की
11:36वहां की जिन्दगी बिलकुल अलग थी ना कोई पुरानी यादे ना लोग जो मुझे जानते थे
11:43यहां मेरे लिए एक मौका था खुद को फिर से खोजने का और बिना किसी रुकावट के अपने सपनों को पूरा करने का
11:51नए शहर में मैंने खुद को पूरी तरह से अपने काम और अपने लक्षों में डुबो दिया
11:57मैंने अपने करियर में बहतरीन प्रदर्शन किया और जल्दी ही मेरी महंत रंग लाने लगी
12:02मेरी तरकी देखकर मुझे यह एहसास हुआ कि जब आप खुद पर विश्वास रखते हैं
12:09और अपनी राह पर चलते रहते हैं तो सफलता जरूर मिलती है
12:13इसके साथ ही मैंने अपनी जिन्दगी का एक और महत्वपूर्ण लक्षत तै किया
12:18उन लड़कियों और महिलाओं की मदद करना जो अपने जीवन में इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है
12:24मैंने अपने अनुभवों से सीखा की चुप रहना कभी समाधान नहीं होता
12:30और इसलिए मैंने उन लोगों को सशक्त बनाने का काम शुरू किया जिन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने की जरूरत थी
12:37मैंने अपने करियर के साथ साथ एक छोटा संगठन भी शुरू किया जो महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करता है
12:44हम उन्हें कानुनी सहायता मानसिक स्वास्थ्य समर्थन और सुरक्षा के उपाए प्रदान करते हैं
12:51मेरा मकसद है कि कोई भी लड़की या महिला अपने जीवन में उस भयावा अनुभव से न गुजरे जिससे मैं गुजरी थी
12:59मैंने अपने संगठन के जरिये बहुत सी महिलाओं को जागरु किया कि कैसे वे अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो सकती है
13:07और किसी भी तरह की हिंसा या उत्पीडन के खिलाफ आवाज उढ़ा सकती है
13:12मैंने कई महिलाओं की कहानिया सुनी और मुझे एहसास हुआ कि मैं अकेली नहीं थी
13:18हर जगह ऐसी महिलाएं थी जो अपनी आवाज दबाने के लिए मजबूर थी
13:24लेकिन अब वे अपनी ताकत को पहचान रही थी
13:27आज मैं एक मजबूत और स्वतंत्र महिला हूँ जो अपने जीवन को अपने तरीके से जी रही है
13:35मैंने अपनी लड़ाई लड़ी और अपने लिए एक सम्मान जनक जीवन की राह बनाई
13:40यह सफर कठिन था लेकिन मैंने इसे पार किया और आज मैं गर्व से कह सकती हूँ
13:46कि मैं हारने वालों में से नहीं हूँ
13:48मेरे परिवार से रिष्टे कभी ठीक नहीं हो पाए लेकिन अब मुझे इस बात का कोई अफसोस नहीं है
13:55मैं जानती हूँ कि मैंने सही किया और मैंने अपने आत्मसमान को किसी भी कीमत पर नहीं खोने दिया
14:03मेरी कहानी का यही संदेश है कि हमें किसी भी परिस्थिती में अपने अधिकारों और सम्मान के लिए खड़ा होना चाहिए
14:11चाहे समाज कुछ भी कहे, चाहे परिवार साथ ना दे, लेकिन अगर हम खुद पर विश्वास रखें, तो हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं
14:21लडाई कठिन हो सकती हैं, लेकिन जीत हमेशा उन लोगों की होती हैं, जो हार मानने से इनकार करते हैं
14:27दोस्तों आपको यह कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताएं
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