00:00जब मानसुन का मौसम आता है तो पेड़ पहार ज़रना जैसे जिन्दगी की नई सांस लेते हैं
00:08बादलों की चादर ओड़े पहार हरा रंग जैसे आस्मान को छूने की कोशिस कर रहे हो
00:16हर पत्ता हर बेल हर फूल जैसे बारिस में नहा कर और भी ज़्यादा जीवन तो हो गए हो
00:24हर ज़रना जैसे कहता है आओ इस बहते पानी के साथ कुछ पल बहालो अपने सारे गम सारी धकान
00:35इस मानसुन चलिए एक बार फिर रोड चलते हैं उन पहारों की और उन ज़रनों की और जहां ज़रने की हर बूंद हमें जिन्दा मासूस कराती हैं
00:48प्रकृती में खो जाइए खुद को फिर से पाने के लिए आज हम आपको ऐसे ही प्रकृती के खजाने की और ले चलेंगे जहां प्राकृतिक सुन्दर था
00:59धार्मिक आस्था एतिहासिक प्रिष्ट भूनी
01:14जब राजा को उपर में दोड़ाए तो सुरंग में घूज जाने की कारण उसमें लगड़ी लगा कर आगी लगा दिये तब राजा मर गया उसके बाद उसके जो रानी लोग थे यह जो देख रहे सिसुपाल वन वाटरफाल उसमें घोड़े में पटी बांदिये अपने आ
01:44कठिर रास्ता परवत के उंची चोटी तक जाने का जी हां हम बात कर रहे हैं सिसुपाल परवत की
01:5736 गड़ की राजधानी रैपूर से 180 किलोमेटर दूर महा समुन जीले के सुदूर ब्लॉक
02:19स्राइपाली से लगभग 28 किलोमेटर की दूरी पर पुजारी पाली नमगाओं के पास इस्थित है
02:27इस स्थान से सिसुपाल परवत के उपर ट्रेकिंग की सुरुवात होती है
02:34सामने आप अपने वहां को पार्किंग कर सकते हैं टू विलर के लिए 20 रुपय का चार्ज और फोर विलर के लिए 50 रुपय का चार्ज लिया जाता है
02:411200 फीट की उपर की चड़ाई है थोड़ी सी खड़ी चड़ाई है जिससे मुश्किल होती है
02:45पर प्रकिती के सांदार नजारे आपके साथी बन जाते हैं जिससे आप कट रहे हैं आसान हो जाता है
02:50तो चलिए इस रोमांचक सफर की सुरुवात करते हैं
02:53हम सिसुपाल परवत के उपर चड़ाई करने वाले थे और हमको मिले यहां सिसुपाल परवत के उपर बहुत ही प्राचिन सीव मंदिर इस्तीत है वहां के बहुत ही पुराने पुजारी जी है इनको सिसुपाल परवत के बारे में बहुत को जानकारी है तो आए इन से जानते ह
03:23यहां पुजा करने के लिए लाया था उसी दिन से इस गाउं का नाम पुजारी पाली रखा गया है जी तो और शिसुपाल परवत के बारे में जो भी प्राचीन जानकारियां हमें बताने का कश्ट करेंगे पुजारी जी देखो राजा जो शिसुपाल नाम था यहां उस रा�
03:53उपर में दवडाय तो शुरंग में घुज गया शुरंग में घुज जाने के कारण उसमें लगड़ी लगा कर आगी लगा दिये तब राजा मर गया उसके बाद उसके जो रानी लोग थे उन लोगों ने उसमें सती प्रधा था तो जीना नहीं चाहते थे तो यह जो देख
04:23और स्रीव मंदिर बहुत प्राचिन बताई जाती है उसके बारे में कुछ बताएंगे इतना पुराना है कि वहां उसमें में न च्क्रता नो श्मेंड था लोग बहुत महनल से चूना बनाते तो उसमें का मंदिर अभी भी अच्छा है वह जब पूटा हुआ था मेरा इक त
04:53जो सिंडी बने जो योजना है कि सिंडी बनेगा और सफ़ाई होगा इसलिए फ्रेश्ट और लोगों के स्वयोग से इस पाइसा को लिया जा रहा है ताक कि भविस समय काम बंडी यहां पर कि समय बहुत लोगों की ज्यादा से ज्यादा भीड होती है जब बारिस आने लगत
05:23आज रवी बार है इस आज वी कम से कम तुछ लोग आने का समभावना दीक रहा है किया कुछ मेला भी लगता है क्या मकर संग्रांती में मेला लगता है जिसमें वो बीते साल कम से कम 15 हजाब लोगों को खाना फीरी में खिला सके पंडी जीने हमको बहुत ही अच्छी जानका
05:53थे यह कहता है कि मुद्धान पांव में कि अच्छी जबार कि नियुक्त थे ज्में भी कर आधा फांदी जिसमें जिसमें बीत थे आप है कि मर थे जार बबाबा वादम के तू वो और अश्वाह थे एक यहा आस्ताँ कबर कर चुक हैं दोस्तों लेकिन
06:23खड़ी चड़ाई होने के कारण ट्रेकिंग थोड़ा मुस्किल है तो आप जब भी सिसुपाल परवत को पर ट्रेकिंग करते हैं
06:29कमफर्टेवल कपड़े और कमफर्टेवल जूते और साथ में पानी ना ना भूलें
06:34तो चलिए इती रोपांचक सफर को जारी रखते हैं और आगे की और बढ़ते हैं
06:45जब आप प्रेकिंग का लगभख अधादूरी तैय करते हैं तो यहां पर वीर बजन गुबली जी का एक छोटा समंदिर बना हुआ है
06:55आप देख सकते हैं यहां से 300 मीटर और उपर इस्तित है मैं सिसुपाल परवत की चोटी जहां पर है और भी अधभुत अधभुत प्रक्तिके अनुपम द्रिश और मैं घोडाधार निचरना
07:09पहारी से पानी रिसाल हो रहा है जिससे फिसलना का डर रहता है तो यह है एक ऐसा इस्थान है जहां पर पहारी से पानी फिसल है और नीचे तरव आप देख सकते हैं रखाई है तो आप सावधानी पुलवक रसी को पकड़ के ही चढ़ें
07:29जैसे ही आप उपर पहुंसते हैं अचानक आपके सामने एक बड़ा शपाड मैदान आता है
07:54जैसे कोई प्राकितिक इस्टेडियम हो और साथ ही किनारे खड़ा परवत और परवत के किनारे से बहती जल्धारा को देखकर आपके मुँसे स्वतर ही वाह निकल जाता है
08:04विश्मय और हर सरस एक साथ आपके चेहरे पर जलकती है ट्रेकिंग का ठकान मानो गायप सा हो जाता है
08:11वैसे तो हमें सिसुपाल परवत पर कई वाटरफॉल्स दिखाई देते हैं
08:28लेकिन इस सभी में सबसे आकरशक वाटरफॉल है घुडा धार वाटरफॉल
08:32इसका पानी इतनी उचाई से गिरती है कि दूर से ही इस्तियावाज दिल को सुकुम दे देती है
08:38घुडा धार वाटरफॉल एक मौसमी जर्ना है जो 660 फिट उचाई से गिरती है
08:44बारिस के बाद इसका वेक सबसे अधीक होती है
08:48यहां की ठंडी हवा और पानी की भून आत्मा को ताजगी देती है
08:53यह है गोराधार जर्ना तो यह सिसुपाल परवत रूपी खजाने का कोहिनूर है
09:10तो आए इस जर्ने के अध्भूत अविस्वमरनी नजारों का त्रिश्यों का आनंद उठाते हैं
09:40कर दो कर दो कि अधीड़न की अधाने का तो आत्मा का तो यह हैं
10:10अभी रोमांच खतम नहीं हुए दोस्तों
10:38अभी हम जाने वाले हैं सिसुपाल परवत की सबसे उंची चोटी खेमा खूटी
10:43खेमा खूटी जो की सिसुपाल परवत का सबसे उंची चोटी है
10:47और वहां से हम आपको सिसुपाल परवत का द्रिश से आपको दिखाने वाले हैं
10:52तो रोमांच के साथ हमारे साथ मने रहिए और चलिए खेमा खोटी की और
10:57यह वह कठीर रास्ता परवर्टी है उची चोटी तक जाने का आप देख सकते हैं
11:11तो चलिए हम चलते हैं पहारी के अपरी चोटी तक जाने वाले दोस्त
11:17जैसे जैसे हम उपर की और बढ रहे हैं प्रक्रिती की खुबसूरती भी बढ़ती जा रही है
11:22खुबसूरत नजारों को देखकर चोटी तक पहुचने की एकसाइटमेन भी बढ़ती जा रही है
11:27अपर चड़ते हैं और वहां से हम आपको 360 डिग्री अध्भुत नजारा दिखाते हैं
11:37और साथ ही ड्रोन सोट का भी यहां से आपको लुफ्त उठाने का मुलका मिलेगा दोस्तों
12:57सिसुपाल परवत की उची चोटी से प्रकृति का यहाँ अध्भूत द्रिश्य कमेंड में ज़रूर बताईए लेके रुके रुके अभी भमाच अभी भी खतम नहीं होया दोस्तों अब हम आपको दिखाने वाले हैं नीचे प्राक्टिक स्लाइट पूल जहां से आप प्राक
13:27जी के प्राचिन मंदीर के दर्शन करवाने हैं तो चलिए नीचे के और चलते हैं
13:31चलिए सिसुपाल परवत के और कुछ नगीने ठिपापानी जलप्रपात और मंदीर के पास इस्तित जलप्रपात के अनुकौं देश्यों का लुपत उठाते हैं
13:53तो दोस्तों यह है नजारा भीपाप पानी जलप्रपात का बहुत ही सुन्दर द्रिश्या आप देख सकते हैं
14:07तो दोस्तों अब चलिए भगवान के दर्शन करते हैं
14:25अब चलिए भगवान के दर्शन करते हैं पहले भगवान के पूजा करते हैं उसके बाद पेट पूजा करेंगे
14:40देख सकते हैं घने जंगल शिसुपाल परवत की गोद में प्रकृती की गोद में भगवान शिवजी का यह प्राचिन मंदीर के दर्शन करने का श्वभाग हमको मेर रहा है
14:52यह मंदीर सांत अश्था में वर्शों से खरा हुआ है वैसे भगवान भोले नात के दर्शन कर हमारे मन को भी वह सांती मिलती है
15:10और यहां मंदीर के सामने ही एक जलधारा बहती है जो की गोड़ादार जर्ना में गिरती है इस जलधारा को देखकर ऐसा लगता है जैसे भगवान भोले नात के जटा में इस्थितमा गंगा बहकर गोड़ेदार जर्ना में गिर रही हूँ
15:28भगवान की पूजा होती है दोस्तों और अब पेट पूजा की बारी है और आप देख सकते हैं हम यह घर से लेकर आये होए थे यह है पूरी चावल है आलू चना के सब्जी टमाटर चटनी यह खीर और यह है शांभर तो चलिए हम खाने का भी मजा उठाते हैं और वो भी क
15:58सिसुपाल परवत सिर्फ एक पर्यटन इस्थल नहीं यह है प्रकृती इतिहास और आस्था से जुड़ा अनुखाओ अगर आप प्रकृती साहस और आस्था को एक साथ महसुस करना चाहते हैं तो यह इस्थान आपके लिए है
16:28सब्सक्राइब करना ना भूलें और बैल आइकॉन का भी दबाके रखें दोस्तों कि
16:57हम जब भी वीडियो डालेंगे सबसे पहले आपके पास नोटिफिकेशन जाएगा और आप उसी वीडियो का मजा उठा सकती है
17:02वीडियो देखने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
17:06झालेंगे के लिए ओमारेंगे उसक्ता फम्रेशे रिएागा तृम्राइब कर दोलेसे
17:08पर रखेंगे के लबादे पेंगे कर दोड़के बहुत लेगीडियो दो वीडियो लिए में रूम्राटू ते
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