00:00इसके वक्त में क्रिस्मस, गिफ्ट, मौज, मस्ती और चुट्टी का एक उत्सव बन गया है लेकिन इसकी जड़े गिर्जागर आस्ता रविश्वास से जुड़ी हुई है
00:10क्रिस्मस डे इसाई धर्म का सबसे प्रमुक और बड़ा तेवहार है
00:14ये तो सबी जानते हैं कि क्रिस्मस डे इसा मसी के जन्म की याद में मनाया जाता है
00:20इस दिन चर्चों में प्रार्तनाय होती हैं घर सजाय जाते हैं लोग एक दूसरे को शुब कामनाय देते हैं
00:27लेकिन क्रिस्मस की पीछे गहराधार्मिक और अतिहासिक महत्व है जो अंदकार पर प्रकाश का संदेश देता है
00:34क्रिस्मस इसा मसी के जन्म दिन की रूप में मनाते हैं इसाई मानेता के अनुसार
00:38इसा मसी इश्वर के पुत्रत और उन्हें मानवता का उद्धार करता माना जाता है
00:43उन्होंने प्रेम, छमा, सेवा और त्याक का मार्ग दिखाया
00:47उनके जीवन और उपदेशों की स्मृति में ये पर्व मनाते हैं
00:51ताकि समाज में करुणा और भायचारे का भाव बना रहे
00:54वैसे तो हर साल 25 दिसंबर को बड़ी धूम से क्रिस्मस फेस्टिवल सेलिब्रेट किया जाता है
01:02लेकिन बाइबल में ईसा मसी की सटी जन्मदिती का कोई जिक्र नहीं है
01:07इतिहास कारों के अनुसार रोमन सामराज्य में 25 दिसंबर को सूर्य देव का पर्व मनाते हैं
01:13ये समय शीत अन्यात के आसपास होता है जब दिन बड़े होने लगते हैं
01:19चोथी शताबदी में गिरजा घर ने ईसा मसी के जिन्मदिवस को 25 दिसंबर से जोड़ दिया
01:24क्रिसमस को पहली बार आपचार करोप से चोथी शताबदी में रोम में मनाय गया
01:35इसका पहला लेखे तुले 36 इस्वी में मिलता है
01:39इसके बाद ये उद्सप समय के साथ योरॉप और फिर दुनिया भर में फैल गया
01:43भारत में क्रिस्मस का अगमन पूर्टगाली और ब्रिटिश मिशनरियों के साथ हुआ जिसके शुरुवात गोवा केरल और पूर्वुत्तर राज्यों से मानी जाती है
01:51क्रिस्मस के दिन लोग चर्च जाकर विशेश प्रार्थनाय करते हैं केरॉल गाये जाते हैं
01:56घरों और चर्चों में रोष्णि और सजावट की जाती है क्रिस्मस ट्री सजाह जाते हैं
02:01इससा मसी के जन्नकी खुशी में गाय जाने वाले गीतों को केड् memo कहते हैं
02:06इस शुब अपसर पर क्रिस्मस ट्री सजाना, केक काटना और एक दूसरे को गिप्ट्स देना ये खास परमपरा रही है।
02:12सैंटा क्लॉस बच्चों के लिए खुशी और उपाहरों का प्रतीक भी माने गए हैं।
02:15फिल्हाल इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें। साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें।
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