00:00देगे यहाँ पर अक्सर गरीव आदमी ही परिसान हुआ है, अमीर तो हुआ नहीं है अभी तक में
00:04बराएंगे उसके लिए गरीव आदमी क्या मुद्दा उठाएगा, जो होता है वो देता हुआ चला आ रहा है
00:10इसके लिए ये सा बात पर मंत्री हो बरा बरा आदमी हो उस पर छोटे छोटी आदमी को देखना जरूरी होता है
00:16इसे जएधा हम क्या कह सकते हैं
00:18हमारा काम है जाओंगा कि राय बरा गा तब ही जाना होगा
00:21कम रहेंगे तब ही जाना होगा
00:23हमारे कहने से कुछ नहीं होगा इस सब सरकार को खुद सुचना चाहिए कि गरी राज करें कैसे पहला एन करें यहां से तो हमेशा ट्रेंज से ही जाना आना होता है अक्षर नहीं
00:32बारा सो तेरे सो किलोमेटर परता है यहां से बढ़ता तो है लेकिन क्या करें जाना तो परेगा हमारा आवाज उठाने से नहीं होगा ना सब लोग का आवाज एक होना चाहिए तब जाके बात बनेगी और भी खर्चा परेंगे
00:48परिवार भी राता है बच्चियों भी राता कभी अकेला भी जाना पता है जिस हमें जिस परकार सोचन वाता है उस परकार जाना होता है कि जो उचित किराया है ताकि हम लोग आराम से याता याद कर सके जैदा होने से हम लोग कहां से भारी बढ़ेगा इतना तो हम लोग कम
01:18जाए आम आदमी जो गरीव है जनरल में जाता है उसको टिकट बगारा मिलता है नहीं उपर से फेर बढ़ा रहे हैं तो सरकार को पहल सबसे पहले मेलब जो बेटिंग सिस्टम एंड का उसको सदारना चाहिए उपर से जब भी हम ततकाल में टिकट करते हैं तो बहुत मुश्क
01:48से कोई बुर्णेशवर से दिल्ली आएगा तो 4000 की राजदानी बढ़ती है और 5000 6000 में फ्लाइट की टिकट मिलती है ट्रेन से माते तो मारा एक दो दिन का टाइम वेस्ट भी होता है तो अगर यह फ्लाइट के बराबर ही टिकट कर देंगे तो रेलवे में कौन जाना चाहि�
02:18तो गरीब आदमी के लिए थोड़ा वो होगा मेरी रिक्वेस्ट है कि पहले जो इनका स्टेशन वागरा है वेटिंग सिस्टम वागरा है साफ सफ़ाई है उसको सुदा रहे उसके वाद यह टिकट जो किराया विडा बढ़ा रहे हैं उसके बाद में यह करना चाहिए जिस
02:48करना और वैसे भी फ्लाइट वगरा उफ़ाऊंट नहीं कर पाते इतना तो रेल्वे ही सोर से इससे वो ट्रावल कर पाते हैं तो वह इकश्पेंसिव हो जाएगा तो वहां का ट्रावलिंग और उनका बजट टाइंच है वह स्वादा हो जाएगा और बजट एक्स्फिन्स
03:18पर किलोमीटर इसके हिसाब से उन पर थोड़ा बोज आ जाएगा पहले के पेक्षा पांच-दस पैसे दी बढ़ जाता है तो थोड़ा तो बोज आई जाएगा जो बिहार जारकन बेंगॉल या पिरादर स्टेट साउथ के साइड जाते हैं जो लोंग डिस्टेंस होता है तो
03:48कि यहां बंदे खरें हम लोग तकाल टीकर बिल्कूल नहीं हो पार अपने मोवाइल से अपने ट्रेव से लेप्टोप से नहीं हो पा रही है मुश्किल से एक से दो मियुक्त खतमगा तो वह तो अन्प लिए और ने करता और नोर्माली आप पैसे दे के आग्रे भेरे करकर
04:18कि आम पब्लिक को सहज तरीके से टीकट मील जाई कम से लिए तो उनको उनको क्या है कि एजेंट के थूर जाना पड़ता है ना तो कम सकंद पांस सो आट सो साथ सो हजार पेक्स्टा लगता है उनको
04:48झाल
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