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साल 2025 का आखिरी महीना चल रहा है और हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास (Kharmas 2025) की शुरुआत हो चुकी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि (Sagittarius) में प्रवेश करते हैं, तो खरमास लगता है। इस दौरान शादी, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों (Auspicous Works) पर रोक लग जाती है। वनइंडिया हिंदी की इस खास रिपोर्ट में जानें कि आखिर खरमास के पीछे की पौराणिक कहानी क्या है। इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि कैसे सूर्य देव (Surya Dev) को अपनी परिक्रमा के दौरान रुकना पड़ा और क्यों उन्होंने अपने रथ के घोड़ों की जगह गधों (Donkeys) का इस्तेमाल किया।
About the Story:
Kharmas has begun, marking a month-long pause on all auspicious activities like weddings and housewarmings in the Hindu calendar. This video explains the mythological significance of Kharmas, narrating the fascinating story of Lord Sun (Surya Dev) and why this period is considered inauspicious. Watch to know the do's and don'ts during this time.

#Kharmas2025 #SuryaDev #Astrology #OneindiaHindi

~HT.410~ED.108~

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Transcript
00:00साल में एक ऐसा समय आता है जब शादी ब्या, ग्रह प्रवेश, मुंडन जैसे किसी भी मांगली के अशुब कारे पर रोक लगा दी जाती हिंदू पंचांग के अनुसार ये पूरे साल का एक महिना होता है हिंदू पंचांग जो कि अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से एप्र
00:30क्यों नहीं किये जाते और इसके पीछे क्या है पौरानिक कथा नमस्कार मेरा नाम है रिचा और आप देख रहे हैं वर इंडिया हिंदी
00:36खर्मास हिंदू पंचांग का वो विशेश समय होता है जब सूर्य देव, धनू या मीन राशी में प्रवेश करते हैं
00:43जोतिश शास्त्र में सूर्य को उर्जा, तेज, जीवन और शुभता का कारक माना जाता है
00:49मानेता है कि जब सूर्य इन राश्यों में होते हैं तब उनका तेज कम हो जाता है
00:55इसी वज़े से विवाह, ग्रिप्रवेश, नामकरण, मुंडन जैसे मांगलिक कारे इस दोरान फलदाई नहीं माने जाते और इन्हें बरजित कर दिया जाता है
01:04अब बात करते हैं इसके पीछे की पौरानी कथा की, पुरानों के अनुसार, सूर्य देव करात साथ गोडों द्वारा खीचा जाता है, जो सब्ता के साथ दिनों का प्रतीक है, लेकिन माना जाता है कि खर्मास के दोरान ये गोडों ठक जाते हैं, ऐसे में सूर्य देव कु
01:34कूल नहीं माना जाता है साल दोहजर पच्चिस में 16 दिसंबर की सुबह 4 बज कर 18 मिनट से सूर्य व्रिश्यक राशी में रहेंगे इसके बाद सूर्य धनु राशी में प्रवेश करेंगे और इसके साथ ही खर्मास की शुरुआत हो जाएगी यह अवधी 15 जन्वरी तक रहे�
02:04का आधना के लिए बेहद शुब माना जाता है शास्त्रों के अनुसार इस दौरान किये गए दान जब तप और सेवा का विशेश महत्व मिलता है
02:12खर्मास के दौरान सुर्य देव के अराधना सर्वोतम माने जाती है प्रते दिन सुर्य को जल अर्पत करना आधित तिर्दे स्प्रोत का पाठ करना और जवरुत मंदों को अन्वस्त्रिया धन का दान करना अत्यंत शुब और अच्छा फल देता है
02:26मानेता है कि इस दौरान किया गया दान स्वभागय बढ़ाता है जीवन की कश्टों को कम करता है खर्मास की समापती के बाद यानि 15 जैन्वरी को मकर संक्रांती मनाई जाती है इस दिन सुर्य देव मकर राशी में प्रवेश कर जाते हैं और उतरायन का आरंभ होता है इसी क
02:56जिसके जिस दिन कोई भी मूर्द चेक करने की जरूरत नहीं होती है वो पूरा दिन ही बहुत शुब माना जाता है तो इस हिसाब से खर्मास को हम ऐसे समझ सकते हैं कि अशुब नहीं है और ना ही कोई डरने का समय बलकि आत्मिक शुद्धी, सैयम, धर्मकर्म का विशेश �
03:26योगा करना चाहिए, मेडिटेशन करना चाहिए, धार्मिक कारे करने चाहिए और जो बाकी हेक्टिक धार्मिक कारे हैं उनसे कुछ दिनों का ब्रेक लेना चाहिए बाकी ख़बरों के लिए देखते हैं, वन इंडिया हैं
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