00:00मैं गुर्बत और महंगाई की वज़ा से परेशान और उखड़ा उखड़ा रहता था एक तरफ बुड़े माबाप और उनकी दवाई दारू का खर्चा और दूसरी तरफ बीवी बचे और उनका नानो नफका ना माबाप की खिद्मत वपाती ना बीवी बच्चों के अखरा
00:30हम जा ही रहे थे कि कुरान की तिलावत मेरे कानों में पड़ी गुर्बत की वज़ा से बच्चों का कतल ना करो अल्ला उनको भी रिजक देगा और तुमें भी मैं आज भी वो वक्त याद करता हूँ तो फौरन सजदे में गिर पड़ता हूँ