00:00एक दिन घने पेड पर कववा और तोते आमने सामने बैठ कर जोर-जोर से बहस करने लगे।
00:05कारण था एक लाल सा चमकदार फल जो दोनों को चाहिए था।
00:09कववा बोला ये फल मैंने पहले देखा था, इसलिए ये मेरा है।
00:13तोता जो हरे रंका सुंदर सीधा सा बैठा था बोला, देखा होगा पर मैं पहले उड़कर आया था, इसलिए ये फल मेरा है।
00:19दोनों में बहस बढ़ते बढ़ते लड़ाई होने लगी। कववा काउं काउं करता इधर उधर ओनने लगा, तोता चिलाता ना ये फल मेरा है।
00:27पेड के बाकी पक्षी डर कर दूर हट गए। इसी बीच पेड के नीचे से एक बूढ़ा उल्लू उड़कर उपर आ गया।
00:33उल्लू ने कहा, इतनी लड़ाई किस बात की। दोनों एक साथ बोले, फल मेरा है।
00:37उल्लू मुस्कुराया और बोला, क्या तुम दोनों ने फल को चक्खा भी है। दोनों चुप हो गए। ना तो कववा ने फल खाया था नहीं तो तेने।
00:45उल्लू ने समझाया, जिस फल के लिए तुम लड़ रहे हो, वो तो बाहर से लाल है पर अंदर से कच्चा है। तुम दोनों ना चक्कर ही लड़ रहे हो। क्या ये समझदारी है। कववा और तोता शर्मिंदा हो गए। तोता बोला, हमें पहले जांच करनी चाहिए थी।
01:15किया कि अब कभी बिना सोचे समझे नहीं लड़ेंगे।
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