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प्रदोष स्तोत्रम् | Pradosh Stotram | By Jitendra Sharma |

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00:00जै देव जगनाथे, जै संकर सास्वते, जै सर्व सुराध्यक्षे, जै सर्व सुरार्चीते
00:13हे जगनाथ, अर्थात समस्त जगत के स्वामिन, हे देव आपकी जै हो, हे सास्वत संकर, अर्थात सर्वदा कल्यान करने वाले आपकी जै हो, हे सर्व सुराध्यक्ष, अर्थात समस्त देवताओं के अध्यक्ष, आपकी जै हो, तथा हे सर्व सुरार्चीत, अर्थात समस्त �
00:43गुणातीत जय सर्व वर्प्रद जय नित्य निराधार जय विश्वंभरावय
00:54हे सर्व गुणातीत अर्थात सभी गुणों से अतीत आपकी जय हो
01:01हे सर्व वर्प्रद अर्थात सब को वर्प्रदान करने वाले आपकी जय हो
01:07हे नित्य निराधार अर्थात नित्य निराधार रहने वाले आपकी जय हो
01:15हे अविनासी विश्वंभर आपकी जय हो
01:19जै विश्वेक वन्देश जै नाग्यंद्र भूषण जै गौरी पते संभो जै चंद्रार्ध सेखर
01:32ए विश्वेक वन्देश अर्थात समस्त विश्व के एक मात्र वंदनिय परमात्मन आपकी जै हो
01:42ए नाग्यंद्र भूषण अर्थात नाग्यंद्र को आभूषण के रूप में धारन करने वाले आपकी जै हो
01:50ए गौरी पते आपकी जै हो ए चंद्रार्ध सेखर अर्थात अपने भाल देश में अर्ध चंद्र को धारन करने वाले संभो आपकी जै हो
02:02जै कोटर्क संकास है जै अनन्त गुणास रए जै भद्र विरू पाक्ष है जै आचिंते निरंजन है
02:16हे कोटर्क संकास अर्थात करोडो सूर्य के समान दिप्ति वाले आपकी जै हो
02:24हे अनन्त गुणास रए अर्थात अनन्त गुणों के आश्रय परमात्मन आपकी जै हो
02:31हे विरू पाक्ष अर्थात तेन नत्रो वाले कल्याणकारी भगवान शिव आपकी जै हो
02:38हे अचिंते हे निरंजन आपकी जै हो
02:41जै नाथ क्रिपा सिंधो जै भक्तार ती भन्जन जै दुस्तर संसार सागर उत्तारण प्रभो
02:54हे नाथ आपकी जै हो हे भक्तों की पीड़ा को विनस्ट करने वाले क्रिपा सिंधो आपकी जै हो
03:02हे दुस्तर संसार सागर से पार लगाने वाले प्रभो आपकी जै हो
03:07हे महादेव मैं संसार में बहुत दुखी हूँ
03:26मुझे बड़ी चिंता है मेरे उपर प्रसंद हो जाईए
03:30हे परमेश्वर मेरे सारे पापों का नास करके मेरी रक्षा कीजिए
03:35महादारिद्रे मगनस्य महापाप्रहतस्य चै
03:42महाशोकनिविष्टस्य महारोगातुरस्य चै
03:49रिनभारे परितस्य दैहे मानस्य कर्मभीही
03:56ग्रहे प्रैपिड्डे मानस्य प्रसीदेमम संकरे
04:02हे संकर मा दरिद्रता के सागर में डूबा हुआ हूँ
04:06महान पाप से आहत हूँ
04:09अनन्त चिन्ताय मुझे गेरी हुई है
04:11भयंकर रोगों से मा दुखी हूँ
04:14रिन के भार से दबा हुआ हूँ
04:16कर्मों की आग में जल रहा हूँ
04:18और ग्रहों से अतन्त फिडित हूँ
04:20आप मेरे उपर प्रसन्न हो जाईए
04:23दरिद्रह प्रार्थ यद देवं
04:28प्रदोशे गिरिजापतिं
04:30अर्थाढ्धो वाथ राजावा
04:34प्रार्थ यद देवं इस्वरं
04:37दिर्ग मायु सदारोग्यं
04:40कोश बृद्धीर बलोन्नती
04:43ममास्तु नित्य मानन्दह
04:47प्रसाद्धा तव संकर
04:49यदि दरिद्र व्यक्ति
04:52प्रदोश काल में देविस्वर गिरिजापति की प्रार्थना करता है
04:56तो वह धनी हो जाता है
04:58और यदि राजा देव देविस्वर भगवान संकर की
05:03प्रदोश काल में प्रार्थना करता है
05:05तो उसे दिर्ग आयुप्राप्त होती है
05:07वह सदा निरोग रेता है उसके कोश की विध्धी तथा सेना में अभिविध्धी होती है
05:14हे भगवान संकर आपकी कृपा से मुझे विनित्यानंद की प्राप्ति हो
05:20मेरे सत्रु छीनताको प्राप्त हो तथा मेरी प्रजाएं सदा प्रसन रहे
05:41चोर डाकु नश्ट हो जाए राष्टर में सारा जन समुदाए अपति रहित हो जाए
05:47प्रित्वितल पर दुर्भिक्स महामारी आदिका सन्ताप्सांत हो जाए
06:09सबी प्रकार की फसलों की सम्रिद्धी हो दिशाएं सुखमई बन जाए
06:14इव माराधयत देवं पूजानते गिरिजापतिम ब्राम्हनान बोजयत पस्चाद दक्षिना भिष्च पूजयत
06:28इस प्रकार गिरिजापति की आराधना करनी चाहिए आराधना के अंत में ब्राम्हनों को भोजन कराना चाहिए
06:36तत्थ पस्चात दक्षिना आदि के द्वारा उनकी अर्चना करने चाहिए
06:41सर्व पाप एक्षय करी सर्व रोग निवारिनी
06:47सिव पूजा माया ख्याता सर्व भिष्ट फल प्रदा
06:53यह जो भगवान सिव की पूजा मने बतलाई है
06:57वह समस्थ पापों का नास करने वाली सभी रोगों का निवारन करने वाली और समस्थ अभिष्ट फलों को परदान करने वाली है
07:07ओम नमस्षिवाय
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