Skip to playerSkip to main content
  • 11 months ago
Discover the groundbreaking Artificial Sun Experiment, a revolutionary project that aims to replicate the energy of the sun on Earth. This innovative experiment has the potential to unlock new sources of clean and sustainable energy, transforming the way we power our planet. Learn about the science behind the Artificial Sun, its applications, and the implications it holds for our future. Get an in-depth look at this cutting-edge technology and its potential to change the world. The Artificial Sun Experiment is an extraordinary feat of engineering and a major breakthrough in the field of renewable energy. Join us as we delve into the fascinating world of the Artificial Sun and explore its possibilities.

Category

🤖
Tech
Transcript
00:00साल 1922 प्रशांत महासागर जब आप आस्मान की और देखते हैं तो आपको आस्मान में एक नहीं बलकि दो सूरज दिखाई देता है एक दूर अंत्रिक्ष में असली सूरज जबकि दूसरा प्रिस्वी के वायुमंडल में आर्टिफीशल सन जो अमेरिका ने बनाया था और हा
00:30थी कि पूरा शहर चमक उठता है लोग अपने घरों से बाहर भागते हैं बच्चे रोने लगते हैं और रेडियो टेलिपोन कार की हेडलाइट सब कुछ एक साथ बंद पड़ जाते हैं कोई आवाज नहीं बस एक चमकती सफेद गेंद जो आस्मान के बीचों बीच फैलती
01:00और विट में ही जल गए वो भी एक ऐसे आर्टिफिशल सं के कारण जो अमेरिका ने बनाया था और सिर्थ ये कोशिश एक बार नहीं बलकि पांच बार प्रित्वी के वायमंडल में अलग-अलग डिस्टेंस पर की गई थी और इस रेस में सिर्फ अमेरिका ही नहीं बलकि स
01:30हम इसी मिशन के बारे में जानेंगे जब दुनिया के दो देश प्रित्वी के वायमंडल में लगातार नियूक्लियर एक्स्प्लोजन कर रहे थे
01:38सो हेलो गाईज मैं हो कौशिक और चलिए शुरू करते हैं एक और नहीं पिसूड को
01:42दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले जिस तर आप मेरे साथ यूट्यूब पे गनेक्टेड हो मैं चाहूंगा कि आप उसी तर मेरे साथ इंस्टाग्राम पे भी जोड़ जाओ ये है मेरा इंस्टाग्राम के एजर हैंडल लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में जा
02:12जब घड़ी में रात के ग्यारा बजे तभी अचानक आस्मान से एक ऐसी चमक फूटी कि पूरा शहर दिन की तरह रोशनी में नहां गया। लोगों की आखे चौनिया गई, किसी ने सूचा कि ये उलका पिंड है, किसी ने कहा दुनिया खतम हो रही है, लेकिन वो रोशनी स
02:42की रेडियो स्टेशन अचानक बंध हो गये, कारों की हेडलाइट्स जपकने लगी, कुछ जगहों पर साइरन अपने आप बजने लगे और स्ट्रीट लाइट्स बुझ गई, छे मिनट तक पूरा शहर एक अजीब सी रोशनी में डूबा रहा, किसी को समझ में नहीं आया क
03:12आइफोन 17 बहुत ही अच्छा फोन लगा, पर आपको ये कैसा लगा, क्या आप चाहते हो एक आइफोन 17 जीतने का चांस भाना, अगर हाँ, तो मैंने डिस्क्रिप्शन बॉक्स में एक वीडियो का लिंक दिया हुआ है, जहां पर जाके आप ये जान सकते हो, कैसे आप एक �
03:42जिस मिसाइल का नाम था थोर, और इसके सिर पर लगा था एक बहुत बड़ा थर्मो नुकलियर बम, जिसकी ताकत हिरोशिमा पर गिरे बम से 500 गुना जादा थी, इस लॉंच को पूरी दुनिया से सीक्रेट रखा गया था, और अमेरिका में भी लॉंच की जानकारी सिर्फ
04:12उचाई पर पहुँच गया, वही उचाई जहां आज ISS यानि कि इंटरनाशनल स्पेस स्टेशन घूमता है, और फिर एक सफेद गोला अच्चानक फटा और इतना फैला कि वो धर्ती से भी साफ दिख रहा था, उस धमाके की धर्ती पर कोई भी आवाज नहीं आई, क्योंकि
04:42दिवता उतराया हो, लेकिन असल में वो था इंसानी एहंकार का सबसे बड़ा विस्फोर, और जैसा कि मैंने आपको कहा, इसके असर प्रशांत महसागर के 1500 किलोमीटर के इलाके पर पड़े, और इस धमाके से निकले EMP एक्स्प्लोजन, जानि कि इलेक्ट्रो मैगनेटिक �
05:12और इस तबाही ने तो उल्टा उसे और बड़े टेस्ट करने के लिए मोटिवेट कर दिया था, जिसके बाद अमेरिका ने प्लान बनाया कि वो अब अंतरिक्ष में एक दो नहीं, बलकि टोटल पांच न्यूकलियर ब्लास्ट करेगा, ये है हमारी प्रित्वी, जिसके इस
05:42धीरे धीरे बड़ा हो रहा है और उसकी चमक ने पूरा आस्मान और धर्ती सुभा जैसी रोश्नी में बदल दी है, ये है एक टेंपोररी आर्टिफीशियल सूरज, जो एक परमानू धमाके से प्रित्वी के वायो मंदल में बना है, दोस्तों आइफोन 17 जीतने का चांस प
06:12इस फोर्ट ने सिर्फ आस्मान को नहीं, बलकि पॉलिटिक्स, साइन्स और मिलिटरी सोच को भी जगजोर दिया था, पर अमेरिका को अभी भी वो नहीं मिला था, जो उसे चाहिए था, इसलिए उन्होंने काय कि वो अबंद्रिक्ष के साथ साथ प्रित्वी के वायो मंदल
06:42ग्यानिक वहाँ पर मौजूद थे, आस्मान में लगातार रॉकेटों की गड़गडाहट गूल सी राती थी, और फिर वो तारीक आई, जब स्टार फिश प्राइम एक्स्प्लोजन के बाद, अमेरिका ने ऑपरेशन फिश बाउल के तहत 20 अक्टूबर 1962 को प्रित्वी के �
07:12गया था, वहीं पर इसे केवल प्रित्वी की सतह से 147 किलोमीटर की उचाई पर एक्स्प्लोड करने की तैयारी की गई थी, यानि वहाँ पर जहां धरती का वातावरन पतला हो जाता है, और अंतरिक्ष की सीमा शुरू होती है, गाइस डिस्क्रिप्शन लिंक से जाकर के च
07:42अर्टिफीशल सूरज प्रित्वी के वायमंडल में प्रकट हो गया, इसे भी कई तरह के रेडियेशन और इलेक्ट्रोमाइटिक पलसेस निकले, रेडियेशन तो प्रित्वी के वायमंडल में ही फस्कर रह गया, लेकिन इलेक्ट्रोमाइटिक पलसेस दोबारा सतह तक ट्
08:12Bum ko srif 48 km ki uunchaayi pər khoda gaya.
08:15Ye uunchaayi vatavaran ke ghanay hissay mein thi.
08:18Is liye is war visford ke baad vayu mandal me bane
08:20Us nuclear artificial suraj nye roshni ke saath-saath
08:24Kain explosive vibrations jhatke bhi zamein tuk pahunchaayi.
08:29Kuch second tuk aazman mein teiz aag jaisi lapte e uthi
08:32Jho dhiray-dhiray dhuwayen na badan gayi.
08:34Phir aaya king fish.
08:35Amerikaka ka čotha vayu mandal me kiya gaya parmanu dhamaka
08:38Jho 1 November 1962 me nila.
08:41Ye dhamaaka 95 km ki uunchaayi pər kia gaya tha.
08:45Jaisi hi dhamaaka hua.
08:47Chamkili lal lapate aasman mein fayal gayi.
08:50Eek bada fireball bantate huye kuch saamayi ke liye
08:52Eek bada se artificial nuclear sun ne pahle ki tarah aasman ko dhag liya.
08:57Or kuch second baad pura vatavaran ajjeev si chamak mein badal gaya.
09:01Dhrti aur aasman mein kai 1000 km mein aaisi vibrations fayali.
09:05Or is swissfort ke bilkul niche karib 1000 km ke chhetr mein
09:09Maujud samudur me chalne wale jahazo ke radar systems fail ho gaya.
09:13Lekin baki test ki tarah ameerika ka is test me bana artificial nuclear sun
09:18Is bar bhi kuch second se jadha aapni chamak berkarar nahi rakh paaya.
09:22Or dhire dhire vayu mandal me buchta chala gaya.
09:25iPhone 17 paana chate ho?
09:26To description me link dya hoa hai.
09:28Ja karke jarur dhekna us video ko.
09:29और इसके बाद ameerika ने launch किया
09:31अपना final और आखरी पर्मानो भम
09:34जो 4 नवंबर को launch किया गया था.
09:37और इसे पृत्वी के वायu mandal में
09:39सरिफ 21 km की उचाई पर फोड़ना था
09:42जिसका नाम रखा गया
09:43Tight Rove.
09:44कम उचाई होने के कारण
09:46जब ये पृत्वी के वायu mandal में फटा
09:47तो इसने बाकी सबसे ज़्यादा तबाही मचाई.
09:50इसकी शॉक वेव्ज कई 1000 km तक सुनी गई
09:53जहां ये ब्लास्ट हुआ
09:54उसके नीचे मौजुद आईलेंड पर
09:56कई जगा छोटे भूकम के जटके मसूस हुए
09:59और सबसे बड़ी बात
10:00इस बार आसमान में जो आर्टिफीशल सूरज बना था
10:03वो बाकी सभी से बड़ा था
10:05और क्योंकि ये पृत्वी के काफी करीब था
10:07इसलिए इसका आकार भी
10:09हमारे नॉर्मल सूरज से कहीं गुना ज़्यादा था
10:12जिसके कारण जो heat और electromagnetic तरंगे पैडा हुई थी
10:15उनसे और भी बड़े इलाके में तबाही मज गई
10:18और electronic devices जल गए
10:20कई साफ पानी वाली नदिया
10:22radiation से contaminate हो गई
10:23साथी साथ जमीन पर भी high radiation level record किये गए
10:27और इसके बाद पूरी दुनिया को
10:29अमेरिका के secret के बारे में पता चल गया
10:31जिसके बाद अमेरिका को तुरंग
10:33वायू मंडल में किये जा रहे है
10:35ये nuclear test रोकने पड़े
10:37लेकिन अभी भी दुनिया को एक सवाल का जवाब
10:39नहीं मिला था कि आखिर अमेरिका
10:41बार बार अंतरिक्ष और पृत्वी के
10:43वायू मंडल में ये परमाणू
10:45विस्पोर्ट कर क्यों रहा था
10:47जिसके बाद कुछ अजीब होता है
10:49क्योंकि अमेरिका के इन टेस्ट को
10:51बंद करने के बावजूद यूरोप के
10:53कुछ हिस्सों में लोगों ने पृत्वी
10:55के आसमान में रात के समय
10:56बार बार बड़े बड़े आर्टिफिचल सन
10:59बनने की बाद गही
11:00मानो कोई और भी था जो अमेरिका के अलावा
11:03ये टेस्ट कर रहा था पर आखिर वो कौन था
11:06तो सोवियेट यूनियन
11:14एक ऐसा देश जिसने
11:15एक समय पर टेकनोलोजी को
11:17दुनिया में लीड किया था
11:18अमेरिका जैसे देश भी
11:20क्योंकि सबसे पहले अंतरिक्ष में अपनी सैटेलाइट
11:22स्कुटनिक लॉंच करने के बाद
11:23स्पेस में पहला इंसान भी
11:25सोवियेट यूनियन नहीं भेजा था
11:27बात हतियारों की हो या टेकनोलोजी की
11:29सोवियेट एक समय पर पूरी दुनिया से आगे था
11:33लेकिन अब अमेरिका उन्हें सिर्फ चुनोती ही नहीं दे रहा था
11:35बलकि हराने भी लगा था
11:37और यही वज़व थी कि अमेरिका को हमेशा डर लगा रहता था
11:41कि दुनिया में बढ़ते उसके इंफ्लुएंस के कारण
11:43कहीं सोवियेट यूनियन उन पर ऐसा हमला ना कर दे
11:47जिसका उनके पास कोई भी जवाब ही ना हो
11:49और तभी अमेरिका को एक सीक्रेट रिपोर्ट मिली
11:52सोवियेट यूनियन द्वारा अंतरिक्ष और पृत्वी के वायव मंडल में किये जा रहे
11:56नुकलियर टेस्ट की जिसमें सोवियेट यूनियन एक ऐसी टेक्नलोजी विकसित कर रहा था
12:01या सरल शब्दों में कहें तो एक ऐसा हत्यार बना रहा था
12:04जिससे कुछ ही पलो में किसी भी देश की पूरी इलेक्टरिक ग्रिड और टेक्नलोजी सिस्टम को एक जटके में ठप किया जा सकता था
12:13डिस्क्रिप्शन में देवी लिंक से आईफोन 17 पाने का मौका मिल सकता है गाईस
12:16चेक आउट जरूर करना
12:17और हैरानी की बात ये थी कि सोवियेट उनियन की वो टेक्नलोजी जो इतनी भारी तबाही मचा सकती थी वो और कुछ नहीं बलकि यही परमानू बम थे
12:27पर आखिर कैसे तो आपको याद होगा कि अमेरिका दुआरा अर्थ एट्मोसफेर में किये गए सभी टेस्ट के दौरान मैंने एक बात बार बार जिक्र किया था
12:35EMP का यानि Electromagnetic Pulses का
12:39हाँ वही पल्स जिससे हवाई के सारी Electric Grid जल कर राख हो गई थी और उनके बैटरी वाले electronic devices भी बंद हो गए थे
12:46तो न्यूकलियर प्रोग्राम में काम कर रहे सोवियत वैग्यानिकों ने बहुत जल्दी ये पता लगा लिया था कि इस तरह के radioactive pulses नीचर में केवल सूरज के solar तोफानों में बनती है
12:56पर क्यूंकि प्रित्वी के पास magnetic field है इसलिए वो हमारी technology को नुकसान नहीं पहुचाती
13:01पर अगर इसी तरह के electromagnetic pulse प्रित्वी के वाई मंदल में किसी देश के बिलकुल ऊपर बनाई जाए तो ये आसानी से किसी भी देश का पूरा electric infrastructure तबाह कर सकती है
13:13जिसके बाद उस देश पर हमला करना बिहद आसान हो जाएगा क्योंकि सारे सिस्टम फेल होने पर वो देश जबाब ही नहीं दे पाएगा
13:21और electromagnetic pulse वाई मंदल में generate करने का सबसे अच्छा तरीका है बर्मानू बम को ही वाई मंदल में किसी देश के उपर blast कर देना
13:30और जैसे ही ये बात सोवियत मिलिटरी को पता चली उन्होंने कई टेस्ट कंड़क्ट करके इस टेकनोलोजी में महारत हासिल कर दी
13:37अब अमेरिका का यही डर था कि कहीं उन पर सोवियत ये हमला ना कर दे इसलिए अमेरिका ने भी एक के बाद एक अलग-अलग कई नूटलियर टेस्ट प्रिथवी के वाई मंदल और स्पेस में किये
13:49और उन सभी टेस्ट को बहुत ध्यान से स्टडी किया गया आखिर EMP पल्स कैसी बनती है फैल्थी कैसे है और कितना नुकसान पहुचा सकती है
13:57जाने से पहले दोस्तो आईफोन 17 पाने का मौका मत खोना डिस्क्रिप्शन में लिंक दिया हुआ है जाकर के उस वीडियो को एक बार जरू देखना
14:03इसके अलाबा अलग-अलग डिस्टेंस पर परमानू परिक्षन करके अमेरिका ने ये भी सुनिश्चित किया कि वो इस तरह के हमले के दोरान नुकसान को कम से कम कर सके
14:13लेकिन अमेरिका और सोवियत यूनियन दोनों द्वारा प्रित्वी के वायमेंडल में किये गए इन नुकलियर टेस्ट से एक अजीव और डरावनी चीज हुई
14:20एक ऐसी चीज जो प्रित्वी पर मौजूद हर इंसान की जिंदगी को प्रभावित कर सकती थी
14:26और यही कारण था कि डरे हुए सोवियत और अमेरिका दोनों देशों ने दुनिया के साथ आकर एक ट्रीटी साइन करते हुए स्पेस और अट्मोसफेर में नुकलियर टेस्ट बंद गती है
14:38पर आखिर क्यों? आखिर ऐसा क्या था जिससे ये दोनों कंट्रीज इतनी जादा डर गए थे
14:43दरसल उन धमाकों से निकले इलेक्ट्रॉन्स और गामा किर ने प्रित्वी के चुमबकिये शेत्र में फस गई थी
14:50वो बाहर नहीं निकल पारी थी बस घूमती ही जारी थी जैसे किसी काच के गोले के अंदर फसी बिजली की लहरे थी
14:57अब इनमें इतना रेडियेशन भरा था कि उसने लिट्रली प्रित्वी की ओर्बिट में मौजूद कई सेटलाइट्स को जला दिया
15:03वैज्यानिकों ने इसे आर्टिफीशियल रेडियेशन बेल्ट नाम दिया
15:06इसमें रहने से कुछी हफ्तों में सबसे पहले ब्रितेन का एरियल वन सेटलाइट फेल हुआ
15:11उसका ट्रांस्बिटर बंद हो गया
15:13फिर टेल स्टार वन वो सेटलाइट जिसने पहली बार अमेरिका और यूरोप के बीच टेलिविजन सिगनल भीजे थे अचानक बंद पढ़ गया
15:20उसके सोलर पैनल्स रेडियेशन से जल गए और बाकी कई सेटलाइट में भी ऐसी ही खराबिया आने लगी
15:26धिरे धिरे अमेरिका और सोवियत उनियन को इन घटनाओं से एसास हुआ कि ये प्रियोग सिर्फ इन दोनों देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरा बन सकते हैं
15:35वैग्यानिकों ने चेतावरी दी की अगर ऐसे धमाके फिर हुए तो अंतरिक्ष का वो इलाका जहां सैटलाइट्स काम करते हैं हमेशा के लिए बेकार हो जाएगा
15:44वो समय था जब अंतरिक्ष पहली बार राजनिती से नैतिक्ता का मुद्धा बना धर्ती के बड़े बड़े नीता एक ही टेबल पर बैठे अमेरिका ब्रिटेन और सोवियत उनियन और वहीं पर बनी एक नई ट्रेटी दा लिमिटेट टेस्ट बैन ट्रेटी 1963 में
16:00इस संदी ने तै किया कि अब कोई भी देश अंतरिक्ष, समुद्र या वायुमंडल में परमानू परिक्षन नहीं करेगा ये एक ऐसा कदम था जिसने मानव इतिहास का रुख बदल दिया था
16:11क्योंकि दुनिया जानते थी कि भविश में यही सैटेलाइट्स हमारी पूरी जिन्दगी और देशों को चलाएंगी
16:17हमारे बैंकिंग सिस्टम हो जा फिर गवर्मेंट सिस्टम, एंटेटेन्मेंट या हमारे मुवाइल सब कुछ औरविट में घूम रही सैटेलाइट्स पर ही निर्भर करता है
16:25यानि साल 1962 में प्रशांत महसागर पर बने आर्टीफीशियल सन सिर्फ टेस्ट नहीं थे
16:30उन्होंने आज के हमारे भविश्य को उस समय लिख दिया था और यह तैय किया था कि भविश्य में दुबारा आपको आकाश में परमानु परिक्षन के नाम पर वो ढरावना नजारा कभी देखने को नाम ले
16:41आज के इस वीडियो से आपने काफी कुछ नया सीखा होगा और आपको यह वीडियो काफी पसंद आओगा अगर पसंद आया तो इस वीडियो को लाइक कर देना अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करना अगर आप नए उस चैनल पर तो इस चैनल को सब्स्राइब करने के
17:11You
Comments

Recommended