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  • 4 months ago
आस्था और कला का संगम, गया के फल्गु नदी के तट पर ये देखने को मिला.कुमारी प्रियंका सूप पर अपनी श्रृद्धा को उकेरती हैं. ये इन सूपो पर मधुबनी पेंटिंग बना रही हैं. इनकी पेंटिंग का शौक जो अब भक्ति का रूप ले चुका है.सूर्य देव और छठ माता के चित्र बनाते हुए वो कहती हैं कि ये चित्र बनाते हुए ऐसा लगता है जैसे खुद अर्ध्य दे रही हूं.प्रियंका कोरे सूपों पर अपनी मधुबनी पेंटिंग से इनको जिवंत कर देती हैं.गन्ना, फल, दिए, केले के पत्ते, मिट्टी का हाथी और उसके ऊपर छोटा घड़ा, महिला का सूर्य भगवान को अर्ध्य देते चित्र, इनकी आस्था को प्रकट करते हैं. यह कला मिथिला की परंपरागत शैली पर आधारित है, जिसमें प्राकृतिक रंगों, ज्यामितीय आकृतियों और सांस्कृतिक प्रतीकों से देवी-देवताओं, प्रकृति और लोक जीवन की कहानियों को दर्शाया गया है.प्रियंका सूप पर केवल इस कला को बनाती हीं नहीं है. बल्कि वो छात्राओं को इस का प्रशिक्षण भी देती हैं.अब तक 500 से अधिक छात्राओं को प्रशिक्षित कर चुकी हैं. उनका मानना है कि ये कला न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनी है.बल्कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर फैला भी रही है.

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00:00आस्था और कला का संगम गया के फल्गू नदी के तट पर देखने को मिला और सूप पर अपनी श्रधा उकेरती ये हैं प्रियंका कुमारी जो इन सूपों पर मदुवनी पेंटिंग बना रही हैं इनकी पेंटिंग का शौग जो अब भक्ती का रूप ले चुका है
00:20सुर्यदेब और छट माता का चित्र बनाते वो कहती हैं कि ये चित्र बनाते हुए ऐसा लगता है जैसे खुद अर्ग दे रही हूँ
00:29प्रियंका कोरे सूपों पर अपनी मदुवनी पेंटिंग से
00:59इनको जीबंद कर देती हैं गन्ना फल दिये केले के पत्ते मिट्टी का हाथ ही और उसके उपर छोटा घड़ा महिला का सुर्य भगवान को अर्ग देते हुए चित्र इनकी आस्था को प्रकट करते हैं यह कला मिथला की परंपरागत शैली पर आधारित हैं जिनमें प्राक
01:29छट के दिन पूजा की जाती है दीब जलाए जाते हैं सूप में सारे फल पान पत्ते कसैली और अनारियल यह सब रखे जाते हैं और यहां पर जो छट वरत की महिला है वो अर्ग दे रही हैं
01:44प्रियंका सूप पर केबल इस कला को ही नहीं बनाती बलकि वो छात्रों को इस कला का प्रशिक्षन भी देती हैं अब तक 500 से अधिक छात्राओं को प्रशिक्षित कर चुकी हैं उनका मानना है कि यह कला ना केबल आर्थिक सशक्ति करण का माध्यम बनती हैं बलकि विहार की
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