00:00पैसों की तंगे से तो लोग सिरफ बढ़ाई छोड़ते हैं, वरना दारू, बेडी, सिग्रेट तो कर्ज लेकर भी पिये जाते हैं, सच तो यह है कि भूख पेट की हो तो इनसान समझोता करता है, और भूख अगर आदतों की हो तो इनसान खुद को बरबाद करता है,
00:21गरीब ही कभी इनसान को इतना नहीं गिराती, जितना उसकी प्रात्मिक्ताएं गिरा देती हैं, घर का भविशय किताबों में छुपा था, मगर कमजोर फैसलों ने उसे धूए में उड़ा दे,
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