00:00दीपवल्ली महल और साथ जली बत्तियों का रहस्या
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00:08हिमपरवतों के बीच था दीपवल्ली महल
00:11जहां साथ दीपक उसकी रक्षा करते थे
00:14एक सुभा राजकुमारी ईश्वरी ने देखा तीन दीप बुच चुके थे
00:18रहस्य शुरू हुआ
00:20पहला दीप सिखाता है धैर्य, दूसरा सुरक्षा, तीसरा यादो का उजाला, चौथा अपनापन, पाँचवा आत्म विश्वास, छठा सच्चाई, सात्वा बताता है असली उजाला भीतर से आता है
00:34जब ईश्वरी ने ये सबक सीखे, सारे दीप फिर से जगमगा उठे, माता पिता बोले अब तुम इस महल की सच्ची रक्षक हो
00:44दीपवल्ली महल फिर से रोशनी में नहा उठा, यह कहानी है उजाले, आत्म विश्वास और प्रेम की
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