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**Title**: लकड़ियों का गट्ठा – एक प्रेरक नैतिक कहानी
**Description**:
यह है एक प्रेरणादायक हिंदी कहानी — **“लकड़ियों का गट्ठा”**, जिसका संदेश है **“एकता में ही बल है”**।

कहानी में एक किसान के चार बेटे आपस में झगड़ते रहते हैं। पिता उन्हें समझाने के लिए लकड़ियों का एक गट्ठा देता है — जिसे वे अलग-अलग तोड़ सकते हैं, लेकिन जब एक साथ बँधी हों तो कोई नहीं तोड़ सकता। यही जीवन का सबक है:
➡️ यदि हम **साथ मिलकर** काम करें, तो कोई हमें तोड़ नहीं सकता।
➡️ बँटने से हम कमजोर पड़ते हैं; एकता हमें मजबूत बनाती है।

**🎬 कौन-कौन देखें**

* बच्चों के लिए नैतिक कहानियाँ
* पारिवारिक दर्शक
* शिक्षक और अभिभावक जो कहानियों के माध्यम से मूल्यों को सिखाना चाहते हैं

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Transcript
00:005G Bahu
00:30जब भी घर में कोई बात चलती, कोई कुछ भी कहता, तो अमरिता हर्ट से कह देती। ये तो मेरे साथ भी हुआ था, मुझे इसके बारे में सब मालूम है।
00:39एक दिन, सुमित्रा जी, अमित और अपनी बहु अमरिता के साथ, अमित के बुआ जी, फूफा जी, यानि के मुकेश और उर्मिला जी के यहाँ पर मिलने के लिए गया।
01:09इसलिए उसे तो वाक्त ही नहीं मिल पाता। अच्छा, लगता है नौकरी काफी मुश्किल है अमित की।
01:15अरे नहीं नहीं फूफा जी, ऐसी कोई बात नहीं है, आप तो जानते हैं प्राइविट जॉब में कितना काम होता है।
01:21अरे कोई समझे ना समझे, मुझे तो पता है, प्राइविट नौकरी में इतना काम करना पड़ता है कि इनसान की आफ़त आ जाती है।
01:30लेकिन बेटा, तुमने तो कभी जॉब की ही नहीं, तुम्हें कैसे बता।
01:35अरे जॉब नहीं की तो क्या हुआ ममी जी, सब जानती हूँ मैं, सबसे पहले आफिस में जाओ, वहाँ पर अपनी एंट्री डालो, उसके बाद दिन भर सिस्टम पर बैठ कर काम करो।
01:45चारों तरफ कैमरे लगे होते हैं, आप अपनी नजर इधर के उधर नहीं कर सकते।
01:50उसके बाद दिन भर बास की चिक-चिक सुनो वो अलग से। यही सब होता है, मुझे ना सब पता है।
01:58अरे बहुरानी तो काफी इंटलिजिंट है, हर बात की खबर है इसको।
02:03थोड़ी दिर बाद, अब देखे सुमित्रा भावी, इतने दिनों के बाद आई हैं आप, खाना खाकर ही जाना, ऐसे तो मैं आपको जाने नहीं दूँगी।
02:13विसे बुआ जी, खाने में क्या बनाया है?
02:17वो क्या है ना पिटा, आज तुम्हारी बुआ जी की तब्या थोड़ी ठीक नहीं थी, इसलिए हमने सोचा कि जब तुम लोग यहां आ जाओगे, तो बाहर से खाना मंगवा लेंगे, और साथ में बैट कर खाएंगे।
02:27लेकिन बस प्रॉबलम इतनी सी है कि मुझे बाहर से खाना ओर्डर करना नहीं आता, सोचा जब आमित आएगा तो उसी को बोल दूंगी।
02:36आरे मुझे आता है ना, मैं कर देती हूँ ओर्डर, बतागे क्या-क्या मंगाना है आपको, इटालियन, कॉंटिनेंटल, इंडियन, पंजाबी सब पता है मुझे।
02:46क्या बात है पहू, क्या घर में भी खाना रोज बाहर से ओर्डर करती हो।
02:52अरे नहीं नहीं पुआ जी, ऐसी कोई बात नहीं है, बस मुझे ना, सब पता है।
02:58कोई बात नहीं अमरेता, मैं अपने फोन से ओर्डर कर दीता हूँ।
03:02अरे क्या बात है, आजकल ओनलाइन डिलिवरी पर कोई ओफर नहीं चल रहा है।
03:06अरे बेटा, जिस चीज के बारे में किसे को पता नहीं होता है, हमारी बहु को पता है।
03:36एक काम कर, तू उसी को ओर्डर करने दे।
03:39क्या बात है अमरेता बेटा, तुम तो बहुत इंटलिजेंट हो, सब कुछ जानती हो।
03:45कुछ दिनों के बाद, सुमित्रा जी की कुछ सहलियां उनसे मिलने के लिए आती है।
03:50अरे, सुमित्रा बेहन कैसी हो, बहु कैसी है तुम्हारी।
03:55आरे, पूछी अमर, बहुत इंटलिजेंट है मेरी बहु, साब कुछ जानती है।
04:00क्या बात है, बहु क्याने के बाद तो आरतें दुखी हो जाती है, लेकिन तुम तो बहुत खुश लग रही हो।
04:06वो क्या है न, मेरी बहु है ही इतनी अच्छी।
04:10अरे, तु बुलाओ न, हमारे साथ बैठीगी, बाते करेंगी तो हमें भी अच्छा लगीगा।
04:16सुमित्रा जी, अमरिता को बाहर बुलाती हैं और उसकी बाद सब लोग बाते करने लगते हैं।
04:21क्या बताओं, कुछ दिनों से घुटनों में इतना दर्द हो रहा है कि चला भी नहीं जाता।
04:28अब बुड़ा पे में तो ये सब चलता ही रहता है, क्या कर सकते हैं।
04:33आंटी जी, अप योगा करिए, योगा और साथ में ना काले तिल खाया करिए, आपके घुटनों का दर्द भाग जाएगा।
04:42लेकिन तुमको ये सब कैसे पता बिटा है।
04:45अरे मेरे भी घुट्टों में दर्द होने लगा था, मैंने योगा किया और काले तिल के साथ गुड़ मिलाकर उनके लड़ो बनाकर खाया।
04:53एकदम ठीक हो गया है मेरे पेर।
04:55अमरिता ये तुम क्या कह रही हो, एतनी काम उम्रम है, तुम्हारे पैरों में दर्द कैसे हो सकता है।
05:02अरे ममी जी सच कह रही हूँ, एक बार अगर कोई ये नुस्खा अपना ले ना, बस मज़ा आ जाए।
05:08ठीक है बेटा, अगर तुम कहती हो तो मैं ये करके देखती हूँ, मुझे सब पता है अंटी जी, ये मेरे साथ हो चुका है, इसलिए तो बता रही हूँ मैं आपको, ऐसे नहीं बताती किसी को।
05:21कुछ दिनों के बाद, अमित अमरिता को अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए ले जाता है।
05:51कुछ एक्सेसाइज तो ऐसी बताते हैं, जिन्हें आप अपने आफिस में बैठे-बैठे, मेरा मतलब लैपटॉप पर काम करते-करते भी कर सकते हैं।
05:59अमरिता, ऐसी एक्सेसाइज के बारे में तुम मुझे भी नहीं पता था, तुम्हें कैसे मालूँ?
06:05अरे मुझे सब पता है, हर चीज की ख़बर रखती हूँ मैं, जानते हैं आप।
06:13लेकिन ऐसी कौन सी एप्लिकेशन है और ऐसी कौन सी एक्सेसाइज है भावी?
06:18एक मिनिट, एक मिनिट, मैं आपको अपने मुंबाइल में दिखाती हूँ।
06:21अरे वागई मैं भावी तो सही कह रही है, देखो यार इसमें कितनी अच्छी एक्सेसाइज दिखाई गई है, अपनी चैर पर बैठे बैठे एक्सेसाइज भी कर लो, काम भी और हैल्थ भी, वाव भावी वाव मज़ा आ गया।
06:32लेकिन अमरे तो तुम्हें इस बारे में कैसे पता?
06:36अब मेरे साथ जो चीज हो चुकी है, उसकी बारे में तो मुझे पता होगा ही ना, आमीद?
06:41मतलब, तुम कभ आफिस में काम करने गई? जो तुमने आफिस करते-करते एक्सेसाइज की?
06:46मैं जो किचिन में काम करती हूँ, आमीद, घर की काम, वो किसी आफिस की काम से काम है क्या?
06:54बास, मैं भी वो सब करते-करते, इन में से कुछ एक्सेसाइज ट्राइ कर लेती हूँ, इसलिए मुझे सेब पता है.
07:01सही है यार, तुम दो बहुत इंडेलिजिंट हो, कुछ दिनों की बाद.
07:06ये क्या है? एक दोस्त ने मेरे साथ एक मजा किया है, लेकिन समझ में ही नहीं आ रहा?
07:12अरे बेटा तो अमरिता से पूछ ले ना, उसके पास कोई ना कोई जवाब जरूर होगा.
07:19ठीक है ती है ममी जी, मैं सब जानती हूँ.
07:22लेकिन अमरिता ये थोड़ा मुश्किल है, सोच लो.
07:25मेरे लिए कुछ भी मुश्किल नहीं, दुनिया की कोई भी पहली हो, मैं चिटकी में सॉल कर लेती हूँ.
07:31अच्छ ठीक है, देखो मेरे दोस्त ने मुझे एक खाली पेपर दिया है, और कहा है कि इस पर उसने मेरे लिए कुछ मैसेज लिखा है.
07:38अब एक बात बताओ यार, खाली पेपर पर, I mean, जिस पर कुछ भी नहीं लिखा हुआ, उसे मैं कैसे पढ़ कर बताऊँ?
07:46अरे, बस इतनी सी बात, इससे तो मैं चुटकियों में साल कर दूँगी, अमीत.
07:53लेकिन कैसे बाहू, इस पेपर पर तो वाकई मैं कुछ नहीं लिखा हुआ, एकदम खाली पेपर है, कैसे, क्या पढ़ोगी तुम?
08:01अमीत, एक छोटा सा काम करो, जल्दी से एक मुम्बती लिख रहा हूँ.
08:06अरे, बाहू पेपर में आग लगाने का इरादा है, क्या?
08:09नहीं, नहीं, ममी जी, इस पेपर पर अमीत के दोस्त का लिखा हुआ मैसेज पढ़ने का इरादा है.
08:16अमीत, कैंडल लिख रहाता है.
08:19अब ना बैस इस पेपर को धीरे-धीरे कैंडल के उपर घुमाते रहो.
08:23देखना दोहे मिनिट में मैसेज अपकी आँखों के सामने होगा.
08:27अच्छा, ठीक है, मैं ऐसा करके देखता हूँ.
08:30दो मिनिट के बाद.
08:31आरे, वाग कहीं मैं, इस पर तो अक्षर बनने लगे.
08:35लेकिन यह हुआ कैसे, और अमरिता तुम्हें कैसे पता?
08:40बाद सिंपल है, ममी जी.
08:41अमेत के दोस्त ने निम्बो के रस से मैसेज लिखकर उसे सुखा दिया.
08:46आप अगर मैसेज पढ़ना हो ना, तो पेपर को आग के सामने ले जाओ.
08:50और लेटर्स अपने आप उभर कर आ जाते हैं.
08:54वाब हुआ, लेकिन तुम यह सब कैसे जानती हो?
08:58अरे ममी जी, जब मैं छोटी थी ना, तो अपनी सहलियों के साथ ऐसे ही गेम खिला करती थी.
09:03यह तो मेरे साथ कितनी बाहर हो चुका है, मुझे सब पता है.
09:08ठैंकियो यार अमरिता, तुमारी वज़़से हमें कुछ भी सोचने के जरुवत ही नहीं पड़ती.
09:12तुम सब कुछ बता देती हो.
09:15कुछ दिनों के बाद, सुमित्रा जी को अमरिता के प्रेगनेंट होने की खुश ख़बरी मिलती है.
09:20और सुमित्रा जी अमरिता को डॉक्टर की यहां लेकर जाती है.
09:24देखे सुमित्रा जी, आपकी बहु की तबिद बिलकुल ठीक है.
09:42ठीक रहे और आने वाले बच्चे की भी.
09:45हैरी मम्मी जी, इसमें डॉक्टर से पूछने की क्या जरुरत है?
09:49किश्मिश है, अनार है, पालक है, यह सब खाना चाहिए.
09:52आयन का लेवल बिलकुल बराबर रहता है.
09:55अरिवा, आपकी बहु तो सब कुछ पहले से ही जानती है.
09:59ये बहुत अच्छी बात है.
10:01देखो, आयन की साथ तुम्हें कैल्शियम भी खाना होगा.
10:05जानती हूँ मैं, अगर आयन की खाली सप्लिमेंट लेते हैं और कैल्शियम नहीं लेते,
10:09तो बाड़ी उसे अच्छी से अबसर्ब नहीं कर पाती.
10:12सब पता है मुझे.
10:14बहु ये भी मालुम है.
10:16हाँ ममी जी, आपको जानती है न.
10:19मुझे सब पता है.
10:22आपकी बहु की बाते सुनकर अच्छा लग रहा है.
10:25मुझे ऐसी बहुत कम लड़कियां मिलती हैं,
10:39बहुत खयाल रखती हूँ मैं हर चीज़ का.
10:42और जानती है आप,
10:43हमारे घर में तो किसी को किसी चीज़ के बारे में
10:46गूगल करने के जुरुती नहीं पड़ती.
10:49बिल्कुल ठीक कहा रही है, अमरिता.
10:51आरे, कुछ भी पूछ लो, इसे, सहाब पता होता है.
10:54अरे, वा, तुम तो बड़ी कमाल की लड़की हो.
10:58चलो, ये तो बहुत अच्छी बात है.
11:00लेकिन फिर भी डॉक्टर की सलापर पूरा ध्यान देना चाहिए.
11:03वैसे, क्या चाहिए तुम्हें, बेटा या बेटी?
11:07आरे, डॉक्टर साब, कुछ भी हो जाए.
11:09बस बच्चा अच्छी से हो जाना चाहिए.
11:12मुझे तो दोनों में से किसी से कोई भी परिशानी नहीं.
11:15और सुमित्रा जी, आप?
11:17डॉक्टर मेडम, मुझे तो लड़के और लड़की में कभी भेट करने की आदत ही नहीं है.
11:23पोता आये या पोती, मेरे लिए तो दोनों एक बराबर है.
11:26सुनकर अच्छा लगा.
11:28वैसे आप जानती हैं, हमारे यहाँ पर तो लोगों को बड़ी बेचे नहीं रहती है.
11:32ये जानने की के पेट में लड़का है या लड़की.
11:36लेकिन विदेशों में ऐसा नहीं होता.
11:38हाँ, वहाँ पर तो सब कुछ पहले से ही बता देते हैं ना.
11:42ये भी कोई बात हुई बला.
11:44लेकिन तुम्हें कैसे पता कि वहाँ पर सब कुछ पहले ही बता देते हैं?
11:47Okay, you know everything you know before you know.
11:51You know everything you know before you know.
11:54No, no, Mommy, this is my first time with me.
11:59So, I can't say this dialogue.
12:02I'm listening to this story,
12:04Sumitra and Doctor both laugh.
12:17I'm listening to this story.

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