00:00ज्यान की गोद मैं स्रिष्टी का बीज पर दुनिया ने बस कहानी देखी
00:11भाव नहीं समझा प्रतीक नहीं सीखा
00:24सुनो एक कथा जो लोगों ने गलत लिखी
00:28बेदों की बात को पुराणों ने भिन लिखी
00:33ब्रह्मा जो विचार है सरस्वती जो वाक है
00:40पर धर्ती के लोगों ने इने रक्त संबंध बना दिया
00:45रिगविद भूजता अम्बित में नदीत में देवित में सरस्वती
00:51सर्वुच माता पवित्र नदी दिव्यदेवि ना कोई शाधी
00:56ना कोई शाधी ना कोई खून का रिष्टा सिर्फ ज्यान और स्रिष्टी का योग
01:02एक परम तत्व का द्रिष्च
01:05वाक और ब्रह्म जब मिले तो जग बना जिसे समझा पाप वही तो ज्यान का युग बना
01:13ना वो व्यक्ती ना वो स्त्री पूरुष्वतु मनोर वानी का संगम था कोस्मिक तुरुत
01:18ब्रह्मा वैवरत पूरान में लिखा उसने देखा वो रूप जो कुछ से निकला
01:26संदर्ब ब्रह्मा वरत पूरान प्रकृति खंड अध्याएचा
01:30देखा उस रूप को चार दिशाओं में मुख बना पर भावता स्रिष्टी को सब दिशाओं में जगाना
01:37पूरान ने कहाँ सरस्वती उसकी शक्ती है जो चिंतन से निकली सुरुती में लीन हुई
01:43लोग बोले ये तो उसकी पुत्री थी परवेद बोलते ये उसकी आत्मा की प्रभाथी शक्ती स्वरुपाथी
01:51यहाँ पुत्री का मतलब है उडबवना जन्ना शरीर सिरस्पंदन का प्रभाव जब्रमा ने सोचा ग्याने रूपधारा और जब ग्याने बोला जगने आकार समवारा
02:03वेदान तक है जाब्रमा और वाक का समवाद हुआ
02:21वानी और मनेक हुए स्रिष्टी का निर्वा हुआ
02:25ना पाप ना मोह ना भोग विकार सिर्फ तत्व विचार और ब्रमा कार
02:33फिर यूग बदले भाशा बदली और पदल गए प्रतिक बन गया स्कैंदल पर तत्व भूल गए
02:39मानमे देव को आईने से देखा और अपने फापूस पर लिख दिये यही था असली अंदकार
02:44ब्रमा ने सोचा सरस्वती ने बोला मन ने रूप दिया वानी ने ध्रनी तोली
02:51यही है स्विष्टी ना शादी ना मोये ब्रम और शक्ति का नंत योग जो व्यान को समझे
02:58उसे मोहा कहां जो तत को तो देखे उसे रूप का ग्रहन कहां वेद बोलते ब्रमा और सरसती एक तत्पा है
03:06पर अंध विश्वासियों ने उस तत को पाप बना दिया
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