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  • 11 months ago
भुवनेश्वर: ओडिशा के कटक में मुस्लिम कारीगर दुर्गा पूजा के लिए नायाब कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं. इनमें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता दिखाई जाएगी. कारीगरों में शेख असलम और अजमत खान भी हैं, जो तीन दशक से ज्यादा समय से पारंपरिक जरी शिल्प का काम कर रहे हैं. पीढ़ियों से चली आ रही कला में सुनहरे धागों से देवी दुर्गा के लिए सजावटी पृष्ठभूमि, सिर के वस्त्र, झुमके और दूसरे सजावटी सामान तैयार किए जाते हैं.पृष्ठभूमि तैयार करना काफी मेहनत और एकाग्रता का काम है. इसे तैयार करने में महीनों लगते हैं. इसकी तैयारियां दुर्गा पूजा से करीब छह महीने पहले ही शुरू हो जाती हैं. देश भर की तरह कटक में भी इस साल 28 सितम्बर से दो अक्टूबर तक दुर्गा पूजा का त्योहार मनाया जाएगा. उससे पहले यहां का हिंदू-मुस्लिम भाईचारा प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है.

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00:00ओडिशा के कटक में मुसलिम कारीगर दुरगापूजा के लिए नायाव कलाकर्तियां तैयार कर रहे हैं।
00:08इनमें भारत की समरद सांसकर्तिक विविद्धा दिखाई जाई की।
00:13कारीगरों में शेख असलम और अजमत खान भी हैं।
00:17जो तीन दशक से ज़्यादा समय से पारमपरिग जरी शिल्ब का काम कर रहे हैं।
00:23पीडियों से चलिया रही कलामे सुनहरे धागों से देवी दुरगा के लिए सजावटी प्रश्ट भूमी, सिर्केवस्त, जुमके और दूसरे सजावटी सामान तयार किये जाते हैं।
00:47प्रश्ट भूमें तयार करना काफी महनत और एकाकरता का काम है। इसे तयार करने में महीनों लगते हैं।
01:12इसकी तयारियां दुरगा पूजा से करीब 6 महीने पहले ही शुरू हो जाती है।
01:16हम लोग तो काम तीन मैना पहले से स्टैटिंग करते हैं।
01:20फिर जब महीना देड मैना पास होने के बाद फिर हम लोग दीन, रात, फोला गंटा, अटरा गंटा काम करते हैं।
01:26When it comes to the whole world, we don't want to do it, we don't want to do it, we don't want to do it.
01:32This is a very full culture of Durghapuja, when it comes to the Muslim career, we have a family of ladies, girls, children, all of us do it in Durghapuja, and we are very good to do it.
01:44This is a very popular culture of Durghapuja.
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