00:00शिव का अर्थ क्या है? न वो आदी है, न अंत, न रूप में है, न नाम में. वो शुन्य है, जिसमें सब कुछ समा जाता है, जब जीवन में सब छोट जाए. तब ही जो शेश रहे, वो शिव है. शिव कोई व्यक्ति नहीं, एक अवस्था है. जहां मन शांत होता है, जहां �
00:30और समरपण, जो कुछ भी तुम्हें बांध रहा है, उसे छोड़ दो, और शिव बन जाओ. वो शुन्य ही तो सबसे बड़ा सत्य है.
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