00:00दोस्तों मैं पिछले कई सालों से कॉमेडी राइटिंग कर रहा हूं तो सोचा एक वीडियो बना कर अपने अनुभव को आपके साथ साजा करो
00:14कॉमेडी फिल्म हम सबको पसंद आती है और अच्छी कहानी हो तो वह हमेशा ही कॉमेडी फिल्म जो है वह बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाती है पर यह कॉमेडी कहानी लिखते कैसे है तो मुझे लगता है दोस्तों कि अगर एक खास पैटन को फॉलो किया जाए तो यह कॉमेड
00:44दूसरे किरदारों से कुछ न कुछ चिपाता है जैसे कभी वह अपनी पहचान चिपाता है कभी कोई बात चिपाता है कभी कोई रास चिपाता है कभी कोई अपनी खामिया चिपाता है तो कोई आधित चिपाता है कुछ न कुछ चिपाने से हमेशा ही फनी सिच्योशन क्रि
01:14अबुराव और शाम का किरदार है वो किड़ने पर कबीरा से अपनी पैचान चिपाते हैं वह चुपके-चुपके फिल्म आपको याद है धर्मेंद्र जी वाली उसमें धर्मेंद्र जी का किरदार राइवर बनकर ओम प्रकास जी के जो किरदार है उनसे मिलता है तो वहां प
01:44फिर उसमें फस्ता ही चला जाता है बस यही बात है ऐसे ही comedy create होती है दूसरा point है interesting characters यह funny interesting characters बनते कैसे हैं ऐसे जो funny characters होते हैं वो कई तरीकों से create होते हैं पर उसमें एक जो तरीका है उससे हमेशा यादगार characters create हुए हैं जो timeless हैं आज भी हम उन्हें याद करते हैं ऐसे किरदा
02:14रुज़कारी जन्द देती है ना तो उनके पास कोई पैसा होता है ना काम होता है ना घर होता है उनमें आत्मविश्वास की भी कमी होती है अभी सोचता हूं तो सबसे पहला जो नाम है वो Charlie Chaplin का मेरे दिमाग में आता है आपने उनकी फिल्मों में देखा होगा वो हमेशा
02:44किराय के पैसे भरने में दिक्कत होती थी और हिराफिरी की बात करें तो आपको पता ही है उसमें बाबुरा शाम और जो राजू का किरदार है वो कंगालियत से ही जूज रहे थे तो यह जो कैरेक्टर होते है ना तो आप कह सकते हैं ऐसे कैरेक्टर का पेट खाली होता है प
03:14हमेशा ही संयोग से
03:16बहुत ही funny situation create होती है
03:18आपने गोलमाल फिल्म देखी है न तो उसमें
03:20वो जो राम प्रसाद है
03:22वो फुटबॉल मैच खेलने जाता है तो संयोग
03:24से भवानी संकर उसके जो बहुत से
03:26वो भी वहाँ आ जाते हैं तो वहीं
03:28से फिर कहानी टर्न लेती है और कॉमेडी सिच्योशन
03:30पैदा होती है और कहानी आगे बढ़ती है
03:32वैसे ही हेरा फिरी फिल्म में भी देख लिजिए
03:34उसमें भी बाबुराओ के घर
03:36जो फोन आता है रॉंग नंबर पर
03:38वो संयोग से आता है और अंगूर
03:40फिल्म अंगूर फिल्म में भी जो कहानी के शुरुवात होती है उसमें दो जुड़वा जो भाई होते हैं वो संयोग से अलग हो जाते हैं फिर वापी संयोग से ही मिलते हैं दोस्तों इसलिए संयोग कॉमेडी कहानी में बहुत जरूरी है
03:52मैं कह सकता हूं ऐसे कि संयोग वो धागा है जो बिखरे हुए किरदारों को और उल्जी हुई सिच्वेशनों को आपस में जोड़ देता है
04:01दोस्तों अब आते हैं हमारे चौथे पॉइंट को उपर चौथा पॉइंट है युनिक लाव स्टोरी देखे हिंदी कहानी लिख रहे हैं दो मुझे लगता है लाव स्टोरी होनी चाहिए मैंने देखा है कि युनिक लाव स्टोरी हमेशा ही बहुत अच्छी कॉमेडिक क्रे�
04:31हमको बहुत मज़ा आया था और बहुत सारी फ़री सिच्वेशन क्रियेट हुई थी और मुझे याद आ रहा है चुपके चुपके जिसमें धर्मेंद्र जी की और शर्मिला जी किर्दार की जो लव स्टोरी होती है उस समय बहुत ही अलग थी कह सकते हैं कि अगर आपकी लव स
05:01है किर्दार का मोटिव उसका सपना महत्वक आंक्षा गोल उसकी कोई इच्छा चाहतें कॉमेडी कहानी में किर्दार का कोई ना कोई मोटिव होता है आप कहेंगे कि हर टाइप की कहानी में तो मोटिव तो होता ही है कॉमेडी कहानी में जो मुख्य किर्दार होता है उसका क
05:31कॉमेडी कहानी में जो मोटिव होता है वो
05:33ज्यादा तर साधर और सिंपल होता है
05:35जितना साधर और सिंपल मोटिव होगा
05:37दर्शक उतना ही उससे कनेक्त करते हैं
05:40आपने आफिर वही बात लूगा गुल्माल में भी
05:43मोटिव क्या था मुसकर जौब पाना था
05:45राम परसत का मोटी था एक जॉब पाए अच्छी जॉब कंए प다면 उसको बचाने के लिए वो सारी जड़ोजखेत रही रहत रहता है वैसे ही ही फेरे में भी मोटीव क्या था राज्यू का मोटी था हुआ अपनी मां के लिए
05:57पैसे कमाने हैं बाबु राव का मोटी था अपना करजा चुकाना है शाम का मोटी था नौकरी चाहिए ऐसे कई सारी आप फिल्में देख लेंगे मुन्ना भाई में भी मोटीव क्या था जानवी का प्यार पाना है एकडम सिंपल और साधरा और मोटी होता है तो उससे दरसक त
06:27कमेडी कहानी की हैं जिए पूड़ तोड़ी अलग है उसको पूरा करने के लिए उसको चुनोति आती है वह एकडम असाधरन होती है जैसे मद्द मखअ करते हैं मुन्ना भाई वे भी मिना भाई को झानवी का प्यार पाना है
06:57और उनका खुद का किरदार तो है ही तो इन तीनों की जब खिचडी पकती है उससे फणी सिचूशन क्रियेट होती है एक साथ तीन तीन की परसाइलटी उनको प्ले करनी पड़ती है देखो दूस्तों खाना तो बन गया है सारा मसाला आ गया है पर उसको तड़का लगाना है �
07:27प्लेटा में एक सीन है जिसमें अमर परेम साडीह साथ अज़्जर का चीलर लेकर अपने ससूर को चुड़ाने जाते हैं टो यह बहुत मेडनेस बात है
07:40वैसे ही हिराफिरी फिल्म तो पूरी मैडनेस से भरी हुई है, जिस तरह से वो एक सीन था मुझे याद आ रहा है कि परेश रावल जी पेड के नीचे बात्रूम करने बैड जाते हैं, तो मैडनेस जो होती है वो भी बहुत जरूरी हमारी कॉमेडी को एक धमाल कॉमेडी बना
08:10यह चीजों का सही से इस्तेमाल होना चाहिए, जैसे उसका एक्जेक्यूट प्रोपरली होना चाहिए, अगर फोर्स फूली हो गई, फिर वो कॉमेडी इतनी अच्छी नहीं लगती हो, दरसों को लुभाती नहीं है, इसलिए उसका एकडम सही से एक्जेक्यूशन हो वो बह
08:40कहानी थोड़ी सी भी प्रेडिक्टेबल हो गई, दरसों को अंदाजा होगा कि आगे क्या होने वाला है, तो वो कहानी जो है, वो बोरिंग हो जाती है, पर कॉमेडी को एक वरदान है, कॉमेडी अगर अनप्रेडिक्टेबल होगी, तो भी दरसक हसते हैं, और प्रेडिक्�
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